• Author with Sh. Atal Bihari Vajpayee

भारत, न ‘कांग्रेस मुक्त’ न ‘भाजपा मुक्त’ (India Neither Congress Mukt nor BJP Mukt)

December 12, 2018 0

लोगों ने संतुलन कायम कर दिया। इन पांच राज्यों के परिणाम का अगर कोई संदेश है तो यह कि भारत की जनता को अपना विपक्ष चाहिए। वह एक पार्टी के भरोसे नहीं रहना चाहती क्योंकि बहुत संभावना है कि तब तानाशाही रवैया हावी हो जाता है जो हमने नोटबंदी के समय देखा भी जब लोगों की तकलीफों की चिंता किए बिना और बिना बहुत तैयारी किए कठोर आर्थिक कदम लोगों के गले उतारने की कोशिश की गई। सोचा नहीं कि इसका आम आदमी की जिंदगी पर कितना भयावह असर हो सकता है। 2014 में भाजपा के पास केवल 4 प्रदेश थे इन चुनावों से पहले 20 थे। 2014 के बाद हुए प्रादेशिक चुनावों में कांग्रेस केवल पंजाब और पुड्डेचेरी ही […]

यह बर्लिन वॉल से मज़बूत दीवार है (This is stronger than Berlin Wall)

December 6, 2018 0

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है और पाकिस्तान में करतारपुर साहिब गुरुद्वारा में हरसिमरत कौर बादल ने भी दोहराया  कि अगर बर्लिन की दीवार गिर सकती है तो भारत और पाकिस्तान दोस्ती और शांति से क्यों नहीं रह सकते? दोनों ही गलतफहमी में हैं। भारत और पाकिस्तान के बीच कंक्रीट की दीवार नहीं है जैसे पहले दोनों बर्लिन के बीच थी। भारत और पाकिस्तान के बीच नफरत की दीवार है जिस पर पाकिस्तान लगातार पलस्तर करता आ रहा है। हर आतंकी हमले से यह दीवार मजबूत होती है। बर्लिन में यह दीवार 28 वर्ष रही थी। इसे द्वितीय विश्व युद्ध में विजेता देशों ने जर्मनी को सजा देने के लिए जबरदस्ती बनाया था। दोनों तरफ एक ही कौम के लोग […]

सिद्धूजी से एक गुज़ारिश (A Request To Navjot Singh Sidhu)

November 28, 2018 0

भारत तथा पाकिस्तान के बीच करतारपुर साहिब गलियारा खोलने पर सहमति हो गई है। इस मुबारिक मौके पर सबको बधाई!  विशेष वर्णन पंजाब के मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू का करना चाहूंगा जिन्होंने इमरान खान के शपथ समारोह से लौटने के बाद हमें बताया था कि जप्फी डालने के बाद पाक सेनाध्यक्ष जनरल बाजवा ने उनके कान में कहा था कि पाकिस्तान करतारपुर साहिब गलियारा खोलने जा रहा है। नवजोत सिंह सिद्धू का इमरान खान के बारे कहना है कि बंदा खरा है और वह भारत के साथ दोस्ती और शांति चाहते हैं लेकिन अगर सिद्धू अपना जोश कुछ नियंत्रण में रखे और मेरी गुस्ताखी माफ करें तो मैं कुछ सवाल करना चाहूंगा। अगर इमरान साहिब और उनकी सरकार वास्तव में […]

यह वह सहर तो नहीं! (A False Dawn?)

November 22, 2018 0

राष्ट्रीय बजरंग दल की तीन महिला कार्यकर्त्ताओं ने ताजमहल के अंदर आरती की है। उनका कहना है कि ताजमहल वास्तव में एक शिव मंदिर है जिस पर नमाज अता करने से यह अपवित्र हो गया है। कुछ लोग इसे गंगा जल से धोने की धमकी भी दे रहे हैं। राजस्थान में कांग्रेस के उम्मीदवार मानवेन्द्र सिंह का कहना है कि मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे राजस्थानी नहीं है क्योंकि वह यहां पैदा नहीं हुई इसलिए  ‘आऊटसाइडर’  अर्थात बाहरी है। अमृतसर में निरंकारी समागम पर हमले पर बादल परिवार की प्रतिक्रिया है कि  मुख्यमंत्री अमरेन्द्र सिंह ऐसा करवा कर पंजाब को पुराने काले दिनों में ले जा रहें हैं। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह का कहना है कि वह सरकारी दफ्तरों में संघ […]

विभाजन और भव्य त्रिमूर्ति (Partition: The Grand Triumvirate)

November 15, 2018 0

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और वह लोग जो जवाहर लाल नेहरू को आजादी के बाद प्रधानमंत्री बनाए जाने की आलोचना करते हैं यह भूलते हैं कि यह फैसला महात्मा गांधी का था जिसे सरदार पटेल ने सहर्ष स्वीकार किया था। गांधी जी ने जवाहर लाल नेहरू के बारे लिखा था, “यह मेरी भाषा बोलेगा।” गांधी जी की इस इच्छा को पटेल ने खुशी से स्वीकार कर लिया था और उन्होंने नेहरू को कहा था, “उस लक्ष्य के लिए जिसके लिए भारत में किसी ने उतनी कुर्बानी नहीं दी जितनी आपने दी है मेरी बेहिचिक वफादारी और निष्ठा आपके साथ है। हमारी जोड़ी बेजोड़ है।“ जो लोग नेहरू की आलोचना करते हैं उन्हें पटेल के इन शब्दों का ध्यान रखना चाहिए जिनमें […]

क्योंकि तब सरदार पटेल थे (Because Sardar Patel was There)

November 8, 2018 0

सरदार वल्लभभाई पटेल के बारे मई 1933 में महात्मा गांधी लिखते हैं,“क्या मुझे इस बात का अहसास नहीं कि भगवान की मुझ पर कितनी अनुकंपा रही है कि मुझे वल्लभभाई जैसे असाधारण व्यक्ति का साथ मिला है। ” उन्होंने पटेल से यह भी कहा था, “तुम्हारा दिल शेर जैसा हैं”। लेकिन सरदार पटेल के योगदान के बारे सटीक टिप्पणी राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने मई 1959 में की थी कि, “आज एक भारत है जिसके बारे हम सोच सकते हैं और बात कर सकते हैं तो यह बहुत कुछ सरदार पटेल की शासन कला तथा मजबूत प्रशासन का परिणाम है।“ भारत की प्राचीन सभ्यता है लेकिन हम सदा बिखरे रहें हैं। यही कारण है कि 1947 से लगभग एक हजार […]

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