इंसाफ़ या इंतक़ाम ( Justice or Revenge?)

March 26, 2020 0

निर्भया के क़ातिल बलात्कारियों को सात वर्ष के बाद आख़िर फाँसी पर चढ़ा दिया गया।  हमारे समाजिक इतिहास का बहुत घिनौना अध्याय बंद हुआ। जिस मज़बूती  से उसका परिवार विशेष तौर पर उसकी माता आशा रानी ने इस मामले का पीछा किया है वह क़ाबिले तारीफ़ है। अगर वह इतनी मज़बूती न दिखाते तो मामला अभी भी अदालतों में लटकता पड़ा होता। एक बार तो कई महीने कोई जज नहीं था जबकि यह हाई प्रोफ़ाइल मामला है। मुख्य न्यायाधीश एस ए बोबडे ने सही कहा है कि मृत्यु दंड के मामलों के ख़िलाफ़ अपील की सीमा होनी चाहिए और यह लड़ाई अंतहीन नहीं हो सकती। उनकी बात सही है पर यह भी एक कड़वी सच्चाई है कि देश में बलात्कार […]

अज़ दिल्ली ता पालम (Is Congress Sinking?)

March 19, 2020 0

शाह आलम द्वितीय डूब हो रहे मुगल साम्राज्य के 18वें बादशाह थे। उनकी ताकत इतनी क्षीण हो चुकी थी कि फारसी में किसी ने लिखा था, ‘सलतनत शाह आलम, अज़ दिल्ली ता पालम!’ अर्थात बादशाह शाह आलम की सलतनत केवल दिल्ली से पालम तक ही सीमित है। दिलचस्प है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया के पलायन के बाद फारसी की यह कहावत कांग्रेस के मुखर सांसद मनीष तिवारी को याद आ गई है। एक ट्वीट में उन्होंने इसके साथ दार्शनिक जार्ज संतायाना का यह कथन भी जोड़ दिया कि  ‘जो इतिहास को भूल जाते हैं उनसे यह दोहराया जाता है।’ उस वक्त जब झटके खाती कांग्रेस पार्टी को ज्योतिरादित्य सिंधिया के दलबदल से एक और करंट पहुंचा है और मध्य प्रदेश में […]

‘विश्व नमस्ते दिवस’आयोजित करने का समय (Vishwa Namaste Divas)

March 12, 2020 0

जैसे-जैसे चीन में कोरोना वायरस का प्रभाव घट रहा है यह दूसरे लगभग 100 देशों में फैल गया है। एक लाख से अधिक संक्रमित हैं। इटली में तो हाहाकार मचा है और लगभग एक चौथाई देश को सील कर दिया गया है। अमेरिका जो अपनी भुगौलिक स्थिति के कारण खुद को सुरक्षित समझता था में भी 20 के करीब लोग मारे गए हैं। न्यूयार्क तथा कैलिफोर्निया स्टेट ने आपातकालीन स्थिति घोषित की है। दुनिया भर में 30 करोड़ बच्चे स्कूल नहीं जा रहे क्योंकि स्कूल बंद कर दिए गए हैं। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार इतिहास में पहली बार ऐसा हो रहा है। इसकी अलग सामाजिक प्रतिध्वनि होगी। बिल गेटस का कहना है कि कोरोना वायरस सदी की सबसे प्रचंड महामारी […]

यह कहां आ गए हम (Where Have We Reached?)

March 5, 2020 0

दिल्ली के दंगों में मरने वालों की संख्या 50 के करीब पहुंच गई है। करोड़ों की जयदाद नष्ट हो गई है। केवल एक इलाके में 170 वाहन जला दिए गए हैं। देश की और बड़ी हानि हुई  है क्योंकि साम्प्रदायिक सौहार्द पर आंच आ गई और एक विकासशील,शांतमय, लोकतांत्रिक देश की हमारी छवि तहस-नहस हो गई है। 2014 में जब नरेन्द्र मोदी प्रधानमंत्री बने तो देश में बहुत जोश था। दो बार अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा की भारत यात्रा से इस बात की पुष्टि हो गई है कि अब भारत बड़े अंतर्राष्ट्रीय मेज़ में बैठने वाला स्थाई देश बन चुका है। देश में आत्मविश्वास था जो बालाकोट के हमले से और पक्का हो गया था। लेकिन दिल्ली चुनाव के लिए […]

ऐशिया का ‘बीमार आदमी’ चीन (Is China The Sick Man of Asia?)

February 27, 2020 0

न्यूयार्क से प्रकाशित होने वाले अखबार वॉल स्ट्रीट जरनल ने कोरोनावायरस फूटने पर चीन को ‘ऐशिया का असली बीमार आदमी’ कहा है। चीन इस परिभाषा से खफा है और उसने उस अखबार के तीन संवाददाता वहां से निकाल दिए हैं, लेकिन जिस तरह यह महामारी वहां फूटी है और जिस तरह शुरू में चीन की व्यवस्था इससे निपटी है, निश्चित तौर पर चीन के समाज तथा वहां की व्यवस्था पर सवाल खड़े करते हैं। यह भी याद रखना चाहिए कि चीन में ही 2002-2003 में उत्पन्न सार्स वायरस से भी वहां 700-800 लोग मारे गए थे लेकिन कोरोनावायरस इससे अधिक घातक है। चीन के वुहान शहर में उत्पन्न इस वायरस से चीन में लगभग 2500 लोग मारे जा चुके हैं और […]

क्या देश ‘नई राजनीति’ का उदय देख रहा है? (Are we seeing rise of ‘New Politics’

February 20, 2020 0

तीसरी बार सीएम की शपथ लेते समय दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि “दिल्ली ने देश में नई राजनीति को जन्म दिया है… इससे अब देश बदलेगा।” अर्थात अपने शपथ ग्रहण समारोह से ही अरविंद केजरीवाल स्पष्ट कर रहे थे कि अब उनकी नज़रें राष्ट्रीय राजनीति पर है। दिल्ली में उन्हें तथा उनकी पार्टी को प्रभावशाली जीत मिली है। संदेश गया है कि मोदी-शाह अजय नहीं है। कांग्रेस के उतार से भी देश की राजनीति में शून्य सा पैदा हो रहा है। भाजपा की उग्र राजनीति और  ‘गोली मारो’ भाषणों के बाद भाजपा के अपने समर्थक भी समझते हैं कि संतुलन कायम करने की बहुत जरूरत है। अगर दिल्ली में आप को इतनी बड़ी जीत मिली है तो इसका […]

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