• In Kuwait

क्या देश ‘नई राजनीति’ का उदय देख रहा है? (Are we seeing rise of ‘New Politics’

February 20, 2020 0

तीसरी बार सीएम की शपथ लेते समय दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि “दिल्ली ने देश में नई राजनीति को जन्म दिया है… इससे अब देश बदलेगा।” अर्थात अपने शपथ ग्रहण समारोह से ही अरविंद केजरीवाल स्पष्ट कर रहे थे कि अब उनकी नज़रें राष्ट्रीय राजनीति पर है। दिल्ली में उन्हें तथा उनकी पार्टी को प्रभावशाली जीत मिली है। संदेश गया है कि मोदी-शाह अजय नहीं है। कांग्रेस के उतार से भी देश की राजनीति में शून्य सा पैदा हो रहा है। भाजपा की उग्र राजनीति और  ‘गोली मारो’ भाषणों के बाद भाजपा के अपने समर्थक भी समझते हैं कि संतुलन कायम करने की बहुत जरूरत है। अगर दिल्ली में आप को इतनी बड़ी जीत मिली है तो इसका […]

नकारात्मक को दिल्ली ने नकार दिया (Dilli Negates The Negative)

February 13, 2020 0

दिल्ली के इतिहास का सबसे भद्दा चुनाव खत्म हुआ। अरविंद केजरीवाल तथा उनकी आप को प्रचंड बहुमत मिल गया है। दिल्ली वालों ने ‘गोली मारो’ राजनीति को वोट की गोली मार दी। नफरत की राजनीति को रद्द कर दिया। भाजपा का प्रदर्शन फीका रहा जबकि कांग्रेस यह प्रभाव दे रही है कि वह जिंदा रहने को तैयार नहीं। दिल्ली के ठीक बीच स्थित गार्गी कालेज में छात्राओं के साथ कुछ गुंडों ने जो अभ्रद व्यवहार किया है उसकी जितनी भी निंदा की जाए वह कम है। ऐसी-ऐसी हरकतें की गई कि लिखा भी नहीं जा सकता और जैसा हर बार हो रहा है, पुलिस यहां भी तमाशबीन खड़ी रही। जब नेता राजनीति पर जरूरत से अधिक केन्द्रित हो जाएं तो प्रशासन […]

यह उभर रही महाशक्ति की तस्वीर नहीं है (Not An Emerging Superpower)

February 6, 2020 0

9 जनवरी को अपने लेख  ‘लेकिन इन हवाओं को रोकिए’ में मैंने लिखा था, “नफरत की दीवार खड़ी की जा रही जिसकी आगे चल कर बड़ी कीमत चुकानी पड़ सकती है।” मुझे दुख है कि मेरी बात की पुष्टि हो रही है। जिस तरह दिल्ली के जामिया और शाहीन बाग में गोली चलाई गई और गोली चलाने की कोशिश की गई, उससे नज़र आता है कि जो नफरत भरे भाषण कुछ भाजपा नेता दे रहे हैं उनका अपरिपक्व दिमाग पर बहुत गलत प्रभाव हो रहा है। सौभाग्यवश कोई जानी नुकसान नहीं हुआ पर सारे देश ने देखा कि पुलिस तमाशबीन खड़ी रही। विदेशों में जब भी कोई इस तरह हिंसक होता है उसे उसी वक्त गोली मार दी जाती है। पर […]

भाजपा की अकाली-दुविधा (BJP and Akalis)

January 30, 2020 0

जिसे कभी प्रकाश सिंह बादल ने नाखुन तथा मास का रिश्ता कहा था, वह अलग होता नज़र आ रहा है। शिरोमणि अकाली दल ने घोषणा की है कि वह दिल्ली विधानसभा का चुनाव नहीं लड़ेंगे। असलियत यह है कि दोनों अकाली दल तथा भाजपा में मतभेद इतने बढ़ चुके हैं कि दोनों अब इक्ट्ठे नहीं चल सकते इसलिए भाजपा के खिलाफ चुनाव लडऩे से कतराते हुए अकाली दल ने फिलहाल दिल्ली विधानसभा से ही किनारा कर लिया है। इससे पहले हरियाणा विधानसभा चुनाव के दौरान भी दोनों दलों के बीच तलखी नज़र आई थी और अब दिल्ली, जहां सिखों की अच्छी-खासी जनसंख्या है, के विधानसभा चुनाव से अकाली दल बाहर हो गया है। यह अकाली दल की कमज़ोरी भी दर्शाता […]

तुम ही सो गए दास्तां कहते कहते (The Loss of Ashwani Chopra)

January 23, 2020 0

अश्विनी नहीं रहे। सब संघर्ष पर विजय पाई लेकिन यह एक ऐसा संघर्ष था जिस से लडऩे में इंसान बेबस महसूस करता है। वह कैंसर से हार गए और यह शायद उनकी एकमात्र हार थी। जिंदगी में बहुत दिलेरी से संघर्ष किया। बहुत बढ़िया विरासत छोड़ गए इसीलिए आज एक शायर के यह शब्द उन्हें सच्ची श्रद्धाजंलि होगी, जिंदगी में बड़ी शिद्दत से निभाओ अपना किरदार कि परदा गिरने के बाद भी तालियां बजती रहें पर्दा अब गिर चुका है लेकिन तालियां बज रही हैं और बजती जाएंगी क्योंकि वह बंदा ही ऐसा था। बहुत प्यारी शख्सियत थी। पत्रकारिता जगत के शूरवीर थे। सच्चे दोस्त थे। बाहर से कईयों को वह सख्त लगते थे लेकिन अंदर से बिलकुल साथ-सुथरे बेकपट […]

दिल्ली बेरहम है (Dilli is Merciless)

January 16, 2020 0

दिल्ली के गली-कूचे इतिहास की बेरहम करवट के गवाह रहें हैं। बहुत कुछ देखा, बहुत कुछ बर्दाश्त किया और बहुत कुछ बर्बाद भी किया। मीर तक्की मीर जिन्हें दिल्ली से इश्क था, ने दिल्ली की बेरहमी के बारे लिखा था, दिल्ली में आज भीख भी मिलती नहीं उन्हें था कल तलक दिमाग जिन्हें ताज-ओ-तख्त का लाल हरदयाल ने मीर को भी जवाब दिया था, पगड़ी अपनी संभालिएगा मीर और बस्ती नहीं यह दिल्ली है अब फिर पगड़ी संभालने का मौका आ गया है। फरवरी में चुनाव है। क्या अरविंद केजरीवाल अपनी पगड़ी संभाल पाएंगे? और अगर उनके सर पर नहीं तो पगड़ी और किस के सिर पर बंधेगी? दिल्ली आज पूरे देश का लघु रूप है। कभी यह लाहौर के […]

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