• Author at Kremlin in Moscow

उड़ता सिद्धू (Udta Sidhu)

July 26, 2016 1

    दो महीने पहले भाजपा को अपनी मां कहने के बाद नवजोत सिंह सिद्धू पार्टी को छोड़ गए हैं। कसमें खाने के बाद लोग मुकर जाते हैं। राजनीतिक मजबूरी में भी लोग बदल जाते हैं यह बात तो समझ अाती है लेकिन यह नहीं समझ अाता कि तीन महीने पहले सिद्धू ने राज्यसभा का मनोनयन क्यों स्वीकार किया था अगर उन्होंने इसे छोड़ना ही था? यह उन लोगों से विश्वासघात है जिन्होंने उसे इस काबिल समझा और खुद महामहिम राष्ट्रपति के पद का अनादर है जिन्होंने उनका मनोनयन किया। यह तो साफ है कि उन्होंने अकाली-भाजपा के साथ अपने सारे पुल साढ़ लिए हैं। उनकी पत्नी कह चुकी हैं कि लालबत्ती वाली गाडि़यों में ड्रग्स जाते हैं। खुद सिद्धू […]

इनके गले में हार नहीं डाले जा सकते (Can Not Garland Them)

July 19, 2016 0

आतंकी बुरहान वानी की सुरक्षाबलों के हाथों हुई मौत के बाद कश्मीर अभी तक अशांत चल रहा है। कुछ लोगों का कहना है कि जब से वहां पीडीपी-भाजपा गठबंधन सरकार बनी है तथा वहां पंडितों की वापिसी और सैनिक कालोनी बनाने का प्रयास हो रहा है तब से असंतोष बढ़ गया है। यह बात आंशिक तौर पर ही सही है। ठीक है पीडीपी-भाजपा गठबंधन अभी तक मजबूत तथा उद्देश्यपूर्ण सरकार नहीं दे पाया लेकिन असंतोष तो वहां आज से नहीं पिछले 30 वर्षों से है। प्रदर्शन उनके डीएनए में है। कश्मीर अंतरराष्ट्रीय जेहाद और जिसे फ्रांस के राष्ट्रपति ने ‘इस्लामिक टैरर’ कहा है, से भी अछूता नहीं रह सकता। बुरहान वानी एक जेहादी टैररिस्ट था। पाकिस्तान का कहना है कि […]

हमारी लापरवाही का नतीजा (Cost of our carelessness)

July 12, 2016 0

बांग्लादेश की हाल की घटनाएं हमारे लिए भी गंभीर खतरा हैं। ढाका में हुआ हमला बताता है कि आईएस का फोकस मध्य पूर्व से परे हो गया है। पिछले कुछ महीनों से अल कायदा तथा आईएस जैसे आतंकी संगठन बांग्लादेश के रास्ते भारत पर हमला करने की बात कह रहे हैं। ढाका से कोलकाता बहुत दूर नहीं है। भारत और बांग्लादेश के बीच 4096 किलोमीटर लम्बी असुरक्षित सीमा है। भारत के लिए दोतरफा चुनौती है। एक तरफ पाकिस्तान हमारे खिलाफ आतंक को प्रेरित कर रहा है तो दूसरी तरफ बांग्लादेश घुटने टेकता प्रतीत होता है। हाल ही में बांग्लादेश के आईएस मुखी शेख अबू इब्राहिम अल हनीफ ने कहा है कि आईएस की पाकिस्तान तथा बांग्लादेश के लड़ाकुओं को स्थानीय […]

इफतार की सियासत (Politics of Iftar)

July 5, 2016 0

रमज़ान के दौरान इफतार जो भाईचारा बढ़ाने तथा अपने से कमज़ोर लोगों के साथ मेलजोल का मौका है, को हमारे लाजवाब नेताओं ने राजनीति का इवेंट बना दिया है। विशेष तौर पर दिल्ली में इफतार पार्टी का आयोजन एक बड़ी सैक्युलर कवायद बन गई है। किसने पार्टी दी है, कौन-कौन इसमें हाजिर हुआ, कौन नहीं आया, बड़ा राजनीतिक बयान भी बन गया। कांग्रेस पार्टी इफतार का आयोजन करती रही। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी इफतार पार्टी देते रहे जबकि परम्परा के अनुसार तो इफतार पर ‘पार्टी’ बनती ही नहीं। रोज़ा तोड़ने के बाद खजूर तथा सेवेइयां के सेवन की जगह इन बड़ी पार्टियों में कबाब, मुगलई खाना तथा गोश्त पलाव खाने का मौका बन गया। ऐसी कथित इफतार पार्टियों से आम […]