और भी गम हैं ज़माने में! (There Are Other Worries In The World)

March 29, 2017 0

उत्तर प्रदेश में भाजपा की भारी जीत पर कथित सैक्युलरवादी बहुत तड़प रहे हैं। विशेषतौर पर पांच बार सांसद योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद तो विलाप हदों को पार कर रहा है। प्रभाव यह दिया जा रहा है कि जैसे गणतंत्र के अंत की शुरुआत हो रही है। वह योगी को कारगुजारी दिखाने का मौका भी नहीं देना चाहते। उनके लिए काफी है कि योगी ने भगवा पहना हुआ है इसलिए पहले से ही फैसला कर लिया है कि योगी के मुख्यमंत्री बनने से अनर्थ हो जाएगा। आखिर वह बाबा गोरखनाथ पीठ के पीठाधीश को कैसे बर्दाश्त कर सकते हैं? ऐसे लोगों को समर्थन देते हुए राजमोहन गांधी ने एक लेख लिखा है कि उनके जैसे कई लोगों […]

और पंजाब बच गया! ( And Punjab Was Saved! )

March 22, 2017 1

पंजाब के चुनाव परिणाम के बाद राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़े एक व्हट्सअप चैट पर मनोज सिंह का यह संदेश था, ‘‘जिन्हें लोग ‘भक्त’ कहते हैं उन्होंने एक बार फिर प्रमाणित किया कि वह सिर्फ देशभक्त हैं! और वह देश के लिए कुछ भी कर सकते हैं। वोटिंग के समय विचारधारा को छोड़ सकते हैं, पार्टी को छोड़ सकते हैं।’’ इसका अर्थ क्या है? साधारण भाषा में इसका अर्थ यह है कि पंजाब में संघ ने डूबती और अप्रासंगिक भाजपा को अपने हाल पर छोड़ कर प्रदेश को आप के अराजक शासन से बचाने के लिए कांग्रेस को वोट दिलवा दिए। पंजाब में कांग्रेस की जीत जहां अमरेन्द्र सिंह के अनुभवी नेतृत्व पर मोहर थी वहीं यह शहरी वोटर, […]

जवाहरलाल, इंदिरा और मोदी ( Jawaharlal, Indira and Modi)

March 15, 2017 0

नरेन्द्र मोदी और भाजपा की जीत में विपक्ष की बेवकूफियां तथा घिसी पिटी आउटडेटड राजनीति का बड़ा हाथ है। मैंने पहले नरेन्द्र मोदी और फिर भाजपा का नाम इसलिए लिया है क्योंकि भाजपा से अधिक यह नरेन्द्र मोदी की जीत है। मोदी अपने कंधों पर अब पार्टी को उठाए हुए हैं। अगर मणिपुर में भी कमल खिला है तो इसलिए कि कमल मोदी का फूल है। जिन लोगों ने उनकी पार्टी के लिए वोट दिया है उससे अधिक उनकी व्यक्तिगत लोकप्रियता है। जैसे जवाहरलाल नेहरू तथा इंदिरा गांधी की थी क्योंकि दोनों ही कांग्रेस से बड़े थे। लोकप्रियता के साथ जिम्मेवारी भी आती है। विकास का वायदा पूरा करना होगा क्योंकि रुकावट डालने वाला विपक्ष तो रहा नहीं। विशेषतौर पर […]

हमारी हकीकत अधिक खूनी है (Our Reality is More Bloody)

March 8, 2017 0

देश में एक बार फिर वही सहिष्णुता/असहिष्णुता बहस शुरू हो गई है। अंग्रेजी मीडिया के एक वर्ग तथा सोशल मीडिया के बल पर फिर यह प्रभाव दिया जा रहा है कि जैसे देश असहिष्णु बन रहा है। विशेषतौर पर दिल्ली के रामजस कालेज तथा शहीद की बेटी गुरमेहर के फिज़ूल बयान के बाद प्रभाव यह दिया जा रहा है कि जैसे देश में बर्दाश्त खत्म हो रही है। जिन्हें संघ/भाजपा/मोदी सरकार को लताड़ने के लिए कुछ चाहिए वह इन दो घटनाओं को लेकर देशभर में तूफान खड़ा कर रहे हैं। अभिव्यक्ति की आजादी की बात की जा रही है जबकि केरल में तो जीने की आजादी छीनी जा रही है। एक मामला शहीद की बेटी के इस कथन से सम्बन्धित […]

तुम्हारा गधा मेरे गधे से बड़ा गधा कैसे है! (How is Your Donkey Bigger Donkey Than My Donkey !)

March 1, 2017 0

महाराष्ट्र में स्थानीय निकाय के चुनाव एक बार फिर बता गए हैं कि विपक्ष चाहे कुछ भी कहे, नोटबंदी का भाजपा को नुकसान नहीं हुआ जबकि मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस का पतन जारी है। मैं नहीं कह रहा कि देश कांग्रेस मुक्त हो रहा है जैसे कुछ विश्लेषक कह रहे हैं क्योंकि पंजाब में पार्टी का प्रदर्शन संतोषजनक रहा है लेकिन यह तो स्पष्ट ही है कि पार्टी तेजी से अपना आधार खो रही है। असली समस्या संजय निरूपम की नहीं है असली समस्या है कि कांग्रेस की दिल्ली कमजोर है जिसका असर प्रदेशों पर पड़ रहा है। राहुल गांधी फालतू बनते जा रहे हैं। पार्टी को खुद को नया स्वरूप देना होगा। नई तस्वीर बनानी होगी। लेकिन बनाएगा कौन? […]