• Author with Sh. Atal Bihari Vajpayee

अकाली दल का ब्लूस्टार (Akali Dals Blue Star)

September 20, 2018 0

पंजाब में अकाली दल तथा उसके नेतृत्व की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। अब तो फिर पुलिस घेरे में पार्टी रैलियां कर रही है पर पहले तो अकाली नेताओं ने लोगों के गुस्से के डर से घर से बाहर निकलना बंद कर दिया था। बरगाड़ी में श्री गुरु ग्रन्थ साहिब की बेअदबी के बाद धरने पर बहिबलकलां बैठे दो सिखों की पुलिस गोली में मौत से मामला और बिगड़ गया है। गोली चलाने का हुकम किसने दिया, किसने नहीं दिया यह विवाद बन गया है। सरदार प्रकाश सिंह बादल कहते हैं कि उन्होंने नहीं दिया लेकिन तब वह मुख्यमंत्री थे और उनके पुत्र सुखबीर बादल गृहमंत्री थे इसलिए लोगों की नजरों में वह गोली चलने की जिम्मेवारी से […]

कूटनीति के विकल्प और चुनौतियां (Choices and Challenges of Diplomacy)

September 13, 2018 0

भारत की विदेश नीति पर अपनी किताब ‘चौयसेस’ अर्थात  ‘विकल्प’ में मनमोहन सिंह सरकार के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शिव शंकर मेनन भारत-अमेरिका रिश्ते पर तब ली गई पहल के बारे लिखते हैं, “यह पहल इस धारणा पर आधारित थी कि बदली परिस्थिति में यह हमारे हित में है। चाहे दोनों देश यह कहने में शर्माते हैं कि उनकी सांझेदारी चीन से संतुलन बनाने के लिए है पर यह स्पष्ट है कि चीन का उत्थान इसकी प्रमुख प्रेरणा है… भारत अपने को बदलने, अपने विकास के लिए तथा स्थिर तथा शांतमय वातावरण के लिए अमेरिकी टैकनालिजी, बाजार तथा समर्थन चाहता है।“ इस सब पर कोई विवाद नहीं हो सकता है। जवाहर लाल नेहरू से लेकर सभी प्रधानमंत्रियों ने अमेरिका के साथ […]

जनून का दौर है (The Madness in Us)

September 6, 2018 0

महाराष्ट्र पुलिस द्वारा इस आरोप पर कि वह सरकार के खिलाफ साजिश रच रहे थे आधा दर्जन लोगों की गिरफ्तारी  को लेकर बहुत बवाल मचा है। सुप्रीम कोर्ट ने दखल देकर आगे की कार्रवाई पर रोक लगा दी है लेकिन इसके बावजूद कई वामपंथी झुकाव के लोग शिकायत कर रहे हैं कि देश में एमरजैंसी जैसी हालत है। लेखिका अरुणाधति राय तथा वकील प्रशांत भूषण तो इससे भी आगे बढ़ गए और उनका आरोप है कि देश की स्थिति एमरजैंसी से भी बदतर है। प्रशांत भूषण लिखते हैं,  “नवीनतम गिरफ्तारियां लगातार नागरिक आजादी, मूल अधिकारों तथा भारत में लोकतंत्र के क्षरण का अत्यंत खतरनाक चरण है… जो कई मायनों में 1975 की एमरजैंसी से भी अधिक खतरनाक है। “ सचमुच? […]