• Author with Sh. Atal Bihari Vajpayee

यह हादसों का देश है (The Tragedy in Amritsar)

October 25, 2018 0

एक बार फिर यह साबित हो गया है कि यह हादसों का देश है। यहां इंसानी जिंदगी की कोई कीमत नहीं यहां तक कि इंसानों को भी अपनी जिंदगी की कीमत नहीं। नहीं तो कोई कारण नहीं कि अमृतसर में इतनी बड़ी संख्या में लोग पटरी पर खड़े होकर रावण दहन देख रहे थे यह जानते हुए कि यह व्यस्त रेल-पथ है। अब सरकार ने मैजिस्ट्रेट की जांच का आदेश दिया है पर घोर लापरवाही के कारण जो 61 जिंदगियां लील गई उनकी जिम्मेवारी किस पर है? एक कुछ महीने की बच्ची है जो बच गई पर उसके मां-बाप मारे गए। उसका और कोई नहीं कौन करेगा इसका पालन? देश, विशेष तौर पर पंजाब, गहरे सदमें में है। एक ही […]

तो फिर कयामत होगी! (#MeToo in India!)

October 18, 2018 0

लगभग एक दर्जन महिला पत्रकार द्वारा शोषण की शिकायत पर अकबर का कहना है कि यह आरोप झूठे हैं और वह इस पर कानूनी कार्रवाई करेंगे जो उन्होंने शुरू कर भी दी है। एक महिला प्रिया रमानी के खिलाफ 97 वकील खड़े कर दिए हैं। उनका यह भी सवाल है कि चुनाव से पहले यह तूफान को उठा? कोई एजेंडा है क्या? अगर लगभग एक दर्जन महिलाएं अलग-अलग आरोप लगा रही हैं तो इसे ‘एजेंडा’ कैसे कहा जाएगा? आरोप लगाने वालों में ब्रिटेन में काम करने वाली पत्रकार डेविड रुथ भी है। इन आरोपों को चुनाव से जोडऩा तो बेहूदगी है लेकिन इस सारे विवाद के और पहलू भी हैं। पहली बात सरकार की खामोशी है। जिस सरकार ने “बेटी […]

मायावती, मंज़िल और मजबूरी (Mayawati, Ambition and Limitation)

October 11, 2018 0

2014 के आम चुनाव में मायावती की बसपा को एक भी सीट नहीं मिली थी। 2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भी बसपा का प्रदर्शन कमज़ोर रहा था तथा पार्टी को मात्र 19 सीटें ही मिली थीं। पिछले वर्षों में बसपा का ग्राफ तेजी से गिरा है। पांच सालों में बसपा ने 2021 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ा लेकिन केवल 32 सीटें ही जीत पाई। आठ राज्यों में वह अपना खाता भी नहीं खोल पाई। लोकसभा चुनावों में पार्टी ने 503 उम्मीदवार खड़े किए, एक भी जीत नहीं सका। 99 प्रतिशत उम्मीदवार तो जमानत तक नहीं बचा सके। जिन तीन प्रदेशों में चुनाव होने जा रहे हैं उनमें पिछली बार मध्यप्रदेश में बसपा को छ: प्रतिशत, राजस्थान में तीन […]

झटके खाती हमारी कूटनीति (The Failure of Diplomacy)

October 4, 2018 0

हमने प्रयास किया। बार-बार ईमानदार प्रयास किया। अटल जी बस में लाहौर गए तो कारगिल मिला। नरेन्द्र मोदी नवाज शरीफ के पारिवारिक समारोह में शामिल होने के लिए पहुंचे तो तत्काल पठानकोट और उरी हो गया। जब उधर से हमारे प्रयास का जवाब आतंकी हमले से मिलता है तो हम नाराज़ हो जाते हैं। दुनिया के मंचों से उन्हें लताडऩे लगते हैं जैसे अब न्यूयार्क में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने किया। सुषमा जी का संयुक्त राष्ट्र में दिया भाषण अच्छा था। अटल जी के बाद वह हिन्दी में सबसे अच्छी सार्वजनिक वक्ता हैं लेकिन यह भाषण किस मकसद से है? उन्होंने पाकिस्तान को आतंकियों का पनाहगार कहा। कहा कि इस माहौल में जब वह आतंकियों का महिमामंडन कर रहे […]