• In Kuwait

हमारे भी है मेहरबान कैसे कैसे (The kind of ‘Leaders’ We Have)

August 29, 2019 0

पुरानी कहावत है कि आप चाहे खुद को कितना भी बड़ा समझो कानून आपसे भी उपर है। इस वक्त चल रहे अम्रपाली मामले में जहां घर खरीदने वालों का 3500 करोड़ रुपया इस ग्रु्रप ने इधर-उधर कर दिया पर सुप्रीम कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी की है कि, “इस घपले के पीछे ताकतवर लोग हैं लेकिन वह कितने भी ताकतवर हो हम उन्हें सजा देंगे।” सुप्रीम कोर्ट का यह सख्त संदेश अब पूर्व वित्तमंत्री पी चिदंबरम को भी समझ आ गया होगा जब कपिल सिब्बल तथा मनु अभिषेक सिंघवी जैसे नामवार वकीलों के उद्यम के बावजूद अदालत ने राहत देने से इंकार कर दिया। उन पर आरोप है कि उन्होंने एक मीडिया कंपनी के साथ साजिश कर अपने पुत्र कार्ति चिदंबरम […]

सोनिया गांधी की वापिसी (Return of Sonia Gandhi)

August 22, 2019 0

सोनिया गांधी अपने पति राजीव गांधी के राजनीति में प्रवेश और बाद में प्रधानमंत्री बनने के जबरदस्त विरुद्ध थी। इंदिरा गांधी ने खुशवंत सिंह को बताया था कि  “राजीव की राजनीति में कोई दिलचस्पी नहीं है। सोनिया ने धमकी दी है कि अगर वह राजनीति में कदम रखेंगे तो वह तलाक दे देंगी।” लेकिन पहले संजय गांधी की हवाई दुर्घटना में मौत और फिर खुद इंदिरा गांधी की हत्या ने सब कुछ बदल डाला। जिस वक्त अभी इंदिरा गांधी का गोलियों से छलनी शव हस्पताल में ही था, दूसरे कमरे में सोनिया गांधी अपने पति से “शेरनी की तरह” , यह शब्द उनके अपने हैं, लड़ रही थीं कि वह प्रधानमंत्री न बने। बाद में उन्होंने कहा था, “राजीव के […]

मोदी का दाव और इमरान की बेबसी (Aggressive Modi and Helpless Imran)

August 15, 2019 0

पाकिस्तान की संसद में भारत द्वारा धारा 370 रद्द किए जाने को लेकर तीखी बहस हो रही थी। विपक्ष प्रधानमंत्री इमरान खान पर ताबड़तोड़ हमला कर रहा था कि उन्होंने एक बार कहा था कि  “शायद अगर भाजपा जो एक दक्षिणपंथी पार्टी है, जीत जाती है तो कश्मीर का समाधान निकल जाए”  लेकिन यहां तो नरेन्द्र मोदी ने नक्शा ही बदल डाला। इमरान खान बेबस हैं। एक बार अपनी संसद में झल्ला कर उन्होंने विपक्ष से यह सवाल जरुर कर दिया कि  “आप क्या चाहते हैं कि मैं क्या करुं? भारत पर हमला कर दूं?” यह नहीं कि इमरान खान ने खुद जंग की धमकी नहीं दी। वह संसद में कह चुके हैं कि अगर युद्ध होता है तो यह […]

जय हो! (Jai Ho)

August 8, 2019 0

यह एक एतिहासिक क्षण है। एक प्रहार से इतिहास बदल दिया गया। जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटा कर उसे एक सामान्य दिल्ली जैसा राज्य बना दिया गया है। अनुच्छेद धारा 370 पूरी तरह से अस्थाई थी। अम्बेदकर तो इसके बिलकुल खिलाफ थे पर शेख अब्दुल्ला के दबाव में जवाहर लाल नेहरू इसके लिए तैयार हो गए थे। वह भी चाहते थे कि समय के साथ यह प्रभावहीन हो जाए। समझा गया था कि इसके द्वारा कश्मीर का बाकी देश में भावनात्मक विलय हो जाएगा लेकिन हुआ इसका उलट। इस अनुच्छेद ने कश्मीर और बाकी देश के बीच अलंघ्य दीवार खड़ी कर जिसके भारी दुष्परिणाम निकले, देश के लिए भी और कश्मीर के लिए भी। कश्मीर की तरक्की रुक गई क्योंकि […]

रिश्तों की नींव हिल गई (Uncertainty in Indo-US Relations)

August 1, 2019 0

अमेरिका, भारत और पाकिस्तान के अनिश्चित रिश्तों के बारे अपनी किताब में चार अमेरिकी राष्ट्रपतियों के सलाहकार रहे ब्रूस रीडल लिखते हैं,  “इस क्षेत्र में अमेरिका अपने अधिकतर लक्ष्यों को प्राप्त करने में असफल रहा है। रुज़वैल्ट से लेकर ओबामा तक अधिकतर अमरीकी राष्ट्रपतियों ने पाया कि उपमहाद्वीप में आगे बढ़ना मुश्किल है… इतिहास साक्षी है कि अमेरिकी कदमों ने बुरी स्थिति को बदतर बना दिया था…।” अगर अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प ने यह किताब पढ़ी होती या अपने सलाहकारों की राय मानी होती तो इमरान खान के साथ अपनी बैठक में कश्मीर में अपनी मध्यस्थता की अनावश्यक पेशकश न कर बैठते। इमरान खान के लिए तो छींका फूटने वाली बात हो गई लेकिन अपनी इस लापरवाही से ट्रम्प […]