• Author at Kremlin in Moscow

डॉलर के जाल में फंसे कबूतर (False Dollar Dreams)

April 12, 2018 0

पंजाब ग़मगीन है। जब से इराक में मारे गए 39 भारतीयों, जिनमें 27 पंजाबी हैं, के अंग-भंग शव लाए गए हैं तब से हर घर में इसकी चर्चा है क्योंकि यह त्रासदी सब को छूती है। जिसे पंजाब में ‘कबूतरबाजी’ अर्थात इंसानी तस्करी या गैर कानूनी ढंग से बाहर भेजना कहा जाता है, यह धंधा हजारों पंजाबी घरों को छूता है। बेरोजगारी, ड्रग्स तथा भ्रष्टाचार ने कभी देश के 1 नंबर रहे प्रांत का हुलिया बिगाड़ दिया है। खेती लाभकारी नहीं रही। सरकारी नौकरियां सीमित हैं तथा आरक्षण ने उन्हें और सीमित कर दिया जिस कारण जो बाहर निकल सकता है वह सही या गलत कोशिश कर रहा है। कई कामयाब हो भी जाते हैं पर कई इराक में मारे […]

United States of India

April 5, 2018 0

 विपक्ष का सर्कस शुरू हो गया है। नेता जगह-जगह इकट्ठे हो रहे हैं। ममता बैनर्जी विशेष तौर पर रिंग मास्टर बनना चाहतीं है। कई नेताओं जिनमें सोनिया गांधी भी शामिल है, से वह मिल चुकी हैं। सर्कस की तरह ट्रपीज़ पर चंद्र बाबू नायडू जैसे इधर से उधर झूल रहे हैं। कई और झूलने की तैयारी में है। जब से भाजपा गोरखपुर तथा फूलपुर में बुरी तरह से पिटी है तब से यह प्रभाव फैल गया कि इसे हराया जा सकता है। वह अजेय नहीं रही। तर्क गलत भी नहीं। पिछले चुनाव में भाजपा को मात्र 31 प्रतिशत वोट पर ही बहुमत मिल गया था क्योंकि बाकी 69 प्रतिशत बिखरा हुआ था। 2014 में भारी कांग्रेस विरोधी तथा मोदी पक्षीय […]

शेर जो निकला चूहा (The Lion Who Turned A Mouse)

March 29, 2018 0

सबको बुलंदियों का सलीका नहीं शमीम वह सर पर चढ़ रहे थे कि दिल से उतर गए अरविंद केजरीवाल। कितनी जल्दी पतन हुआ और कैसा पतन हुआ! उनके धारावाहिक माफीनामे से नेता और आम आदमी पार्टी की विश्वसनीयता चूर-चूर हो चुकी है। अब यह कटी पतंग बन चुकी है। पाठक साक्षी है कि मैं अरविंद केजरीवाल का कभी भी प्रशंसक नहीं रहा मुझे सब कुछ फ्रेब, झूठ और दिखावा नजर आता था। वह पहले अन्ना हजारे के चेले बने और मंच पर हाथ जोड़ कर शिष्य की तरह बैठे रहते थे। कहा, हम देश बचाने आए हैं। यहां तक कह दिया कि मैं राजनीति में कभी नहीं जाऊंगा और बाहर रह कर देश बदलूंगा। फिर गुरु हजारे को दगा देकर […]

जिस दिन भगत सिंह को फांसी दी गई (The Day Bhagat Singh was Hanged)

March 22, 2018 0

हमारे आजादी के आंदोलन ने बड़े-बड़े नायक पैदा किए हैं लेकिन भगत सिंह और उनके साथी राजगुरु तथा सुखदेव की अपनी अलग जगह रहेगी। भगत सिंह विशेष तौर पर आजादी की लड़ाई के क्रांतिकारी लोकनायक थे। उनकी शहादत के 87 वर्ष के बाद भी आज कई युवा पीली पगड़ी पहन कर भगत सिंह के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हैं जबकि भगत सिंह ने कभी पीली पगड़ी नहीं डाली। याद रखना चाहिए कि वह अलग समय था। अब कोई भगत सिंह पैदा नहीं होगा। भगत सिंह का जीवन अत्यंत रोचक है। जन्म जाट सिख परिवार में हुआ जिस पर आर्य समाज का बड़ा प्रभाव था। बाद में मार्कसी विचारधारा से प्रभावित होकर भगत सिंह नास्तिक बन गए और उन्होंने भगवान […]

विकल्प है, तो विकल्प क्या है? (Where is the alternative ?)

March 15, 2018 0

सोनिया गांधी ने घोषणा की है कि वह भाजपा तथा नरेन्द्र मोदी को सत्ता में वापिस आने नहीं देंगे। उनका यह भी विश्वास है कि 2019 में कांग्रेस वापिसी करेगी। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि वह जानती थी कि मनमोहन सिंह उनसे बेहतर प्रधानमंत्री होंगे लेकिन फिर सवाल उठता है कि उन्होंने पर्दे के पीछे से मनमोहन सिंह की लगाम अपने हाथ में क्यों रखी? मनमोहन सिंह को तो एक प्रकार से स्टैपनी प्रधानमंत्री बना दिया गया जिनकी इज्जत न पार्टी करती थी न उनके मंत्री। उनका बड़ा तमाशा तो तब बन गया था जब राहुल गांधी ने जबरदस्त अहंकार दिखाते हुए उस वक्त मंत्रिमंडल द्वारा पारित अध्यादेश के टुकड़े कर दिए जब प्रधानमंत्री वाशिंगटन में अमेरिकी राष्ट्रपति से […]

2019 अभी दूर है (Waiting For 2019)

March 8, 2018 0

भाजपा बम-बम है। लगभग एक महीना पहले नीरव मोदी और मेहुल चौकसी के बैंक घोटाले तथा राजस्थान, पश्चिम बंगाल तथा मध्यप्रदेश के उप चुनावों में पराजय के बाद पार्टी की हालत पतली नज़र आ रही थी पर कहा गया है कि राजनीति में तो एक सप्ताह भी बहुत समय होता है। इस एक-डेढ़ महीने में कार्ति चिदम्बरम जेल में है और उत्तर पूर्व के तीन राज्यों में भाजपा ने चौकाने वाली जीत दर्ज की है। विशेष तौर पर त्रिपुरा की जीत तो चमत्कार से कम नहीं। चाहे मार्कसी पार्टी के पास मानिक सरकार में एक करिश्माई नेता हैं और वहां उसका मज़बूत संगठन भी है पर वह भाजपा के बढ़ते कदमों को रोक नहीं सके। 2013 में भाजपा को वहां […]

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