• In Kuwait

किसी को जनादेश नहीं (No One Gets Mandate)

October 31, 2019 0

सभी पंडितों, विशेषज्ञों, पत्रकारों, सर्वेक्षणकर्त्ताओं को गलत सिद्ध करते हुए लोगों ने हरियाणा में भाजपा का बहुमत छीन लिया और महाराष्ट्र में पार्टी को शिवसेना की ब्लैकमेल के लिए खुला छोड़ दिया। भाजपा का विजय रथ रोक दिया गया है पर किसी दूसरी पार्टी को भी पूरा समर्थन नहीं दिया। विपक्ष ने भी कुछ कमाल नहीं दिखाया, केवल जनता ने अपनी आवाज़ बुलंद की है कि वह नाराज हैं, पर बहुत भी नहीं। उसे एक पार्टी पर आधारित व्यवस्था पसंद नहीं इसलिए जैसे-तैसे विपक्ष को मज़बूत कर रही है। लोग विपक्ष चाहते हैं और वह अपने पास दलों का भाग्य बनाने या बिगाडऩे की ताकत चाहते हैं। इन चुनावों का आने वाले दिल्ली और झारखंड चुनावों पर असर पड़ेगा। प्रभाव […]

इन्हें बख्श दो (Why Divide Freedom Fighters)

October 24, 2019 0

  महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव बहुत असुखद विवाद छोड़ गया है। भाजपा ने अपने संकल्प पत्र में विनायक दामोदर सावरकर जिन्हें वीर सावरकर के नाम से भी जाना जाता है, को भारत रत्न देने की मांग की है। चुनाव प्रचार में भाजपा के नेताओं ने कांग्रेस से स्पष्टीकरण मांगा कि उनकी सरकारों ने सावरकर को भारत रत्न क्यों नहीं दिया? वह भूल गए कि अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार तथा नरेन्द्र मोदी की पहली सरकार ने भी सावरकर को भारत रत्न नहीं दिया था लेकिन अब महाराष्ट्र के चुनाव की मजबूरी थी इसलिए मामला गर्म किया गया। इसके विपरीत बहुत से लोग है जो सावरकर को भारत रत्न देने का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि सावरकर ने पांच […]

अनाड़ी से खिलाड़ी : मनोहरलाल खट्टर (The Khattar Factor)

October 17, 2019 0

पांच साल पहले जब अनुभवहीन मनोहरलाल खट्टर को नरेन्द्र मोदी ने हरियाणा का मुख्यमंत्री बनाया तो सारा प्रदेश दंग रह गया। आम राय थी कि अनाड़ी के हाथ प्रदेश को संभाल दिया गया। खट्टर के बारे अधिक जानकारी भी नहीं थी इसके सिवाय कि वह राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रचारक रहें हैं और कुछ महीने वह और एक और प्रचारक नरेन्द्र मोदी, पंचकूला में एक ही घर में रहे थे। उनकी प्रशासनिक अनुभवहीनता तथा राजनीतिक अनाड़ीपन की आशंका उस समय सही सिद्ध होती नज़र आई जब फरवरी, 2016 में प्रदेश को हिंसक जाट आंदोलन का सामना करना पड़ा। दस दिन प्रदेश में व्यापक स्तर पर आगजनी हुई। अराजक माहौल था। फिर रामपाल का मामला उठा और हरियाणा का प्रशासन […]

तल्ख थे, तल्ख रहेंगे (India-China, Tense Relationship)

October 10, 2019 0

अमेरिका के पूर्व विदेशमंत्री हैनरी किसिंजर ने चीन के नेतृत्व के बारे अपनी किताब  ‘ऑन चायना’ में लिखा था,  “वह सौदेबाजी या वार्ता को विशेष महत्व नहीं देते… वह नहीं समझते कि व्यक्तिगत संबंध का फैसलों पर विशेष असर पड़ता है चाहे वह व्यक्तिगत संबंधों के द्वारा अपने प्रयासों को बढ़ाने की कोशिश कर सकते हैं।” अब जबकि चेन्नई के पास प्राचीन मंदिरों के शहर मामल्लापुरम में भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तथा चीन के राष्ट्रपति जी जिनपिंग एक बार फिर मिल रहे हैं, आशा है कि हमारे प्रधानमंत्री किसिंजर की इस समझदार राय को याद रखेंगे। प्रधानमंत्री मोदी पहले शी जिनपिंग का अहमदाबाद में सागरमती के किनारे स्वागत कर चुके हैं। पिछले साल दोनों चीन के खूबसूरत शहर वुहान […]

बिल्लियों की लड़ाई में अंग्रेजी बंदर (The Monkey in Cats Fight)

October 3, 2019 0

किसी ने सही कहा है कि भारत में तूफान खड़ा करना बहुत आसान है। ऐसा ही ये हाल ही में गृहमंत्री अमित शाह द्वारा हिन्दी दिवस पर की गई टिप्पणी के बाद भी हुआ जब द्रमुक के नेता स्टालिन ने कह दिया कि इससे देश की एकता पर असर पड़ेगा। कुछ और भी राजनेता बोलने लगे कि अगर देश में हिन्दी  ‘थोपी गई’  तो देश बंट जाएगा। यह भूलते हुए कि वंदे मातरम् के रचयिता बंकिम चंद्र चैटर्जी ने भविष्यवाणी की थी कि एक दिन हिन्दी देश की राष्ट्रभाषा होगी और उसकी सहायता से देश में एकता होगी, ममता बैनर्जी ने भी कह दिया कि हमें मातृभाषा भूलनी नहीं चाहिए। लेकिन अमित शाह ने इतना आपत्तिजनक कहा क्या कि यह […]

अबकी बार ट्रम्प से प्यार (Ab Ki baar Trump se Pyar)

September 26, 2019 0

यह मानना पड़ेगा कि अमेरिकी राष्ट्रपतियों को साधने की कला में नरेन्द्र मोदी का कोई मुकाबला नहीं। जवाहर लाल नेहरू की अगवानी के लिए खुद राष्ट्रपति कैनेडी हवाई अडड्डे पर गए थे लेकिन रिश्ता आगे बढ़ नहीं सका क्योंकि तब तक नेहरू वृद्ध हो गए थे और युवा अमेरिकी राष्ट्रपति से संबंध कायम नहीं कर सके। सबसे कड़वे रिश्ते इंदिरा गांधी तथा अमेरिका के राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन के रहे हैं। बांग्लादेश के संकट के समय निक्सन ने हमारी बात सुनने से ही इंकार कर दिया था। जब दूसरे दिन मुलाकात का समय आया तो निक्सन ने इंदिरा गांधी को अपने दफ्तर के बाहर 45 मिनट इंतजार करवाया था। इंदिरा गांधी को भी आभास था कि वह एक प्राचीन सभ्यता की […]

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