और पंजाब बच गया! ( And Punjab Was Saved! )

March 22, 2017 1

पंजाब के चुनाव परिणाम के बाद राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़े एक व्हट्सअप चैट पर मनोज सिंह का यह संदेश था, ‘‘जिन्हें लोग ‘भक्त’ कहते हैं उन्होंने एक बार फिर प्रमाणित किया कि वह सिर्फ देशभक्त हैं! और वह देश के लिए कुछ भी कर सकते हैं। वोटिंग के समय विचारधारा को छोड़ सकते हैं, पार्टी को छोड़ सकते हैं।’’ इसका अर्थ क्या है? साधारण भाषा में इसका अर्थ यह है कि पंजाब में संघ ने डूबती और अप्रासंगिक भाजपा को अपने हाल पर छोड़ कर प्रदेश को आप के अराजक शासन से बचाने के लिए कांग्रेस को वोट दिलवा दिए। पंजाब में कांग्रेस की जीत जहां अमरेन्द्र सिंह के अनुभवी नेतृत्व पर मोहर थी वहीं यह शहरी वोटर, […]

जवाहरलाल, इंदिरा और मोदी ( Jawaharlal, Indira and Modi)

March 15, 2017 0

नरेन्द्र मोदी और भाजपा की जीत में विपक्ष की बेवकूफियां तथा घिसी पिटी आउटडेटड राजनीति का बड़ा हाथ है। मैंने पहले नरेन्द्र मोदी और फिर भाजपा का नाम इसलिए लिया है क्योंकि भाजपा से अधिक यह नरेन्द्र मोदी की जीत है। मोदी अपने कंधों पर अब पार्टी को उठाए हुए हैं। अगर मणिपुर में भी कमल खिला है तो इसलिए कि कमल मोदी का फूल है। जिन लोगों ने उनकी पार्टी के लिए वोट दिया है उससे अधिक उनकी व्यक्तिगत लोकप्रियता है। जैसे जवाहरलाल नेहरू तथा इंदिरा गांधी की थी क्योंकि दोनों ही कांग्रेस से बड़े थे। लोकप्रियता के साथ जिम्मेवारी भी आती है। विकास का वायदा पूरा करना होगा क्योंकि रुकावट डालने वाला विपक्ष तो रहा नहीं। विशेषतौर पर […]

हमारी हकीकत अधिक खूनी है (Our Reality is More Bloody)

March 8, 2017 0

देश में एक बार फिर वही सहिष्णुता/असहिष्णुता बहस शुरू हो गई है। अंग्रेजी मीडिया के एक वर्ग तथा सोशल मीडिया के बल पर फिर यह प्रभाव दिया जा रहा है कि जैसे देश असहिष्णु बन रहा है। विशेषतौर पर दिल्ली के रामजस कालेज तथा शहीद की बेटी गुरमेहर के फिज़ूल बयान के बाद प्रभाव यह दिया जा रहा है कि जैसे देश में बर्दाश्त खत्म हो रही है। जिन्हें संघ/भाजपा/मोदी सरकार को लताड़ने के लिए कुछ चाहिए वह इन दो घटनाओं को लेकर देशभर में तूफान खड़ा कर रहे हैं। अभिव्यक्ति की आजादी की बात की जा रही है जबकि केरल में तो जीने की आजादी छीनी जा रही है। एक मामला शहीद की बेटी के इस कथन से सम्बन्धित […]

तुम्हारा गधा मेरे गधे से बड़ा गधा कैसे है! (How is Your Donkey Bigger Donkey Than My Donkey !)

March 1, 2017 0

महाराष्ट्र में स्थानीय निकाय के चुनाव एक बार फिर बता गए हैं कि विपक्ष चाहे कुछ भी कहे, नोटबंदी का भाजपा को नुकसान नहीं हुआ जबकि मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस का पतन जारी है। मैं नहीं कह रहा कि देश कांग्रेस मुक्त हो रहा है जैसे कुछ विश्लेषक कह रहे हैं क्योंकि पंजाब में पार्टी का प्रदर्शन संतोषजनक रहा है लेकिन यह तो स्पष्ट ही है कि पार्टी तेजी से अपना आधार खो रही है। असली समस्या संजय निरूपम की नहीं है असली समस्या है कि कांग्रेस की दिल्ली कमजोर है जिसका असर प्रदेशों पर पड़ रहा है। राहुल गांधी फालतू बनते जा रहे हैं। पार्टी को खुद को नया स्वरूप देना होगा। नई तस्वीर बनानी होगी। लेकिन बनाएगा कौन? […]

मेजर दाहिया को किसने मारा? (Who Killed Major Dahiya ?)

February 22, 2017 0

जम्मू-कश्मीर में उपद्रवी जो सेना के काम में दखल देते हैं को सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत की चेतावनी से विवाद खड़ा हो गया है। हैरानी यह है कि कश्मीर के अलगाववादी तो भड़क ही रहे हैं विपक्ष के गुलाम नबी आजाद जैसे नेता भी जनरल की आलोचना कर रहे हैं कि इससे कश्मीर में स्थिति और खराब होगी। पर जनरल ने कहा क्या है? सैनिक कार्रवाई को बाधित करने वाले लोगों को कड़ी चेतावनी देते हुए जनरल रावत ने कहा है कि ऐसे लोग परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहें और कश्मीर में पाकिस्तान तथा आईएसआईएस के झंडे लहराने वालों को देशद्रोही माना जाएगा। जनरल राजनेता तो है नहीं। घुमा फिरा कर बात करनी सैनिकों को नहीं आती इसलिए […]

मनमोहन सिंह का रेनकोट (Manmohan Singh’s Raincoat)

February 15, 2017 1

अमेरिका के 33वें राष्ट्रपति हैरी ट्रूमैन ने कहा था कि अगर आप ताप नहीं सह सकते तो रसोई में कदम मत रखो। अर्थात् अगर आप राजनीति में हैं तो आलोचना और यहां तक कि अपशब्द भी सहने की ताकत आप में होनी चाहिए। कुछ ऐसी ही बात पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव ने भी कही थी कि राजनीति में मोटी चमड़ी चाहिए और गालियां तक सहने को तैयार रहना चाहिए। इसलिए प्रधानमंत्री मोदी की पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर की गई टिप्पणी पर कांग्रेस का बवाल समझ नहीं आता। अपने प्रतिद्वंद्वियों पर हमला सब राजनीतिक दल करते हैं। विदेशों में भी होता है। कई जगह तो हमसे भी अधिक आक्रामकता और निम्न ढंग से होता है। यहां प्रधानमंत्री मोदी को […]

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