• Author with Sh. Atal Bihari Vajpayee

राहुल के लिए पिच टेढ़ी

July 4, 2013 0

राहुल के लिए पिच टेढ़ी   विदेशमंत्री सलमान खुर्शीद का कहना है कि  राहुल गांधी कांग्रेस के सचिन तेंदुलकर हैं।  कांग्रेस पार्टी ने हाल ही में औपचारिक रूप  से राहुल गांधी को चुनाव समन्वय समिति  का अध्यक्ष भी बना दिया है। अर्थात्  अगला चुनाव उनकी कमान के नीचे लड़ा  जाएगा। अगर सलमान खुर्शीद की तुलना  को सामने रखा जाए तो कहा जा सकता है  कि कांग्रेस की तरफ से राहुल गांधी बैटिंग  खेलेंगे। चुनाव से 18 महीने पहले यह  मामला तय कर कांग्रेस विशेष तौर पर यह  संदेश देना चाहती कि भाजपा के अंदर  अराजक स्थिति की तुलना में उसका घर  पूरी तरह से व्यवस्थित है। लेकिन यह लिखने के बाद जरूर कहना  चाहूंगा कि राहुल गांधी कोई सचिन  तेंदुलकर […]

नो बॉल या हिट विकेट?

July 4, 2013 0

नो बॉल या हिट विकेट? पाकिस्तान की क्रिकेट टीम के भारत दौरे की घोषणा कर दी गई है। यह मैच चेन्नई, कोलकाता, दिल्ली, बैंगलूर तथा हैदराबाद में खेले जाएंगे। जब अंतिम बार एक-दूसरे से भिड़े थे वह 2007 की बात है। उसके बाद 2008 में मुंबई पर हमला हो गया और भारत सरकार ने घोषणा कर दी कि पाकिस्तान के साथ तब तक क्रिकेट के संबंध कायम नहीं किए जाएंगे जब तक पाकिस्तान मुंबई हमले के आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करता। अभी तक पाकिस्तान ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की फिर भारत सरकार क्रिकेट खेलने के लिए कैसे तैयार हो गई? हमने उन्हें झुकाने का जबरदस्त प्रयास किया वे झुके नहीं तो हम ही झुक गए। 2008 से लेकर […]

हंगामें हैं, हंगामों का क्या

July 4, 2013 0

हंगामें हैं, हंगामों का क्या रविवार को कांग्रेस ने दिल्ली की रामलीला ग्राऊंड में विशाल रैली कर एक बार फिर अपनी संगठनात्मक क्षमता का परिचय दे दिया। सबसे अधिक लोग हरियाणा से थे इसीलिए कार की छत्त पर बैठे भुपिन्द्र सिंह हुड्डा बहुत आश्वस्त और प्रसन्न नजर आ रहे थे। पर इस महारैली के चित्र देख कर और त्रिमूर्ति के भाषण सुन कर मेरा तो यही कहना है, यह जश्न, यह हंगामें, दिलचस्प खिलौने हैं कुछ लोगों की कोशिश है कुछ लोग बहल जाएं! यह सही है कि यह सरकार मनरेगा और सूचना के अधिकार जैसी क्रांतिकारी योजनाएं ले कर आई थी पर यह पिछली मनमोहन सिंह सरकार का योगदान था। वर्तमान सरकार की कारगुजारी तो पूरी तरह से नकारात्मक […]

साख बचानी है या अध्यक्ष?

July 4, 2013 0

साख बचानी है या अध्यक्ष? सलमान खुर्शीद को नया विदेश मंत्री बना दिया गया। मंत्रिमंडल में फेरबदल का यह सबसे बड़ा संदेश है कि आदमी कैसा भी हो, कैसी भी गल्तियां करें जब तक वह कांग्रेस के प्रथम परिवार के लिए मरने को तैयार है सब कुछ माफ है। सलमान खुर्शीद तथा उनकी पत्नी द्वारा चलाए जा रहे एनजीओ में भारी घपले की जानकारी सार्वजनिक हो चुकी हैं लेकिन इसके बावजूद उनकी पदोन्नति बताती है कि कांग्रेस के हाईकमान को लोकलाज की चिंता नहीं है। केजरीवाल तथा कंपनी को भी बता दिया गया कि आप ने जो बोलना है बोलते रहो, हमारी सेहत पर कोई असर नहीं है। कांग्रेस के प्रथम परिवार के प्रति वफादारी ही सब कुछ है। विपक्ष […]

एक ही सिक्के के दो पहलू?

July 4, 2013 0

एक ही सिक्के के दो पहलू? यह वह देश है जहां कभी एक रेल दुर्घटना के बाद रेल मंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने इस्तीफा दिया था पर आज दबंग सब कहते हैं, ‘मैं क्यों इस्तीफा दूं?’ ऐसे -ऐसे घोटाले हुए हैं कि सर चकरा जाता है पर किसी की अंतरात्मा नहीं जागती कि वे भी नैतिक जिम्मेवारी लेकर इस्तीफा दे दें। उलटा केंद्रीय मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा का कहना है कि एक केंद्रीय मंत्री के लिए 71 लाख रुपए तो मामूली रकम है, 71 करोड़ रुपए होते तो गंभीर मसला होता। इससे उत्तर प्रदेश के मंत्री शिवपाल सिंह यादव का कथन याद आ गया कि सरकारी कर्मचारी अगर छोटा पैसा हजम करते हैं तो कोई बात नहीं, उन्हें मोटी रकम […]

जो बेरोजगारी बढ़ाए वह ‘रिफॉर्म’ कैसा?

July 4, 2013 0

जो बेरोजगारी बढ़ाए वह ‘रिफॉर्म’ कैसा? मैं अर्थ शास्त्री नहीं हूं। विशेषज्ञ भी नहीं हूं। अर्थ व्यवस्था को किस तरह सही करना है और विकास की दर कैसे बढ़ानी है इसका कोई कारगर सुझाव मेरे पास नहीं है। लेकिन हां, भाषा का कुछ ज्ञान है इसलिए जिस लापरवाही से हमारे देश में ‘रिफॉर्म’ शब्द का इस्तेमाल किया जा रहा है उसे देख कर हैरानी होती है। ‘रिफॉर्म’ का हिन्दी अनुवाद ‘सुधार’ है। ‘इकनौमिक रिफॉर्म’ का अर्थ आर्थिक सुधार। पर यहां पश्चिम से जो भी आए उसे ‘रिफॉर्म’ कहा जाता है, चाहे इससे लोगों की हालत सुधरने की जगह कितनी ही और बिगड़ जाए। नवीनतम मिसाल एफडीआई को लेकर है। खुदरा व्यापार में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को बहुत बड़ा ‘आर्थिक सुधार’ […]

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