जहां कमल मुरझा रहा है

जहां कमल मुरझा रहा है

पंजाब! देश भर में नरेंद्र मोदी की लहर शेर शाह सूरी मार्ग पर पंजाब के शम्भू-बार्डर के बाद कमज़ोर पड़ती नज़र आ रही है। पंजाब भाजपा के नेताओं के अकालियों के आगे समर्पण तथा भाजपा हाईकमान की पंजाब के प्रति बेरुखी का परिणाम है कि यहां कमल मुरझा रहा है। जोश खत्म हो रहा है। भाजपा के समर्थक शहरी मतदाता को जिस तरह टैक्सों से दबाया गया है इससे न केवल आम आदमी बल्कि कार्यकर्ताओं में भी बगावत की स्थिति बन रही है। सब असुखद सवाल पूछते हैं कि पंजाब की सरकार का रवैया इतना शहरी विरोधी क्यों है? कसूर केवल कमजोर प्रादेशिक नेतृत्व का ही नहीं पार्टी के हाईकमान ने भी पार्टी को अकाली नेतृत्व की मर्ज़ी पर छोड़ दिया है।

 अकाली नेतृत्व भारतीय जनता पार्टी को उसी तरह मसल रहा है जिस तरह कभी हरियाणा में ओम प्रकाश चौटाला ने किया था। अपने ग्रामीण समर्थक को संभालते हुए अकाली एक स्पष्ट नीति के अंतर्गत भाजपा को कमजोर कर रहे हैं। वैसे तो अकालियों को भाजपा की जरूरत भी नहीं रही क्योंकि उनका अपना बहुमत है, लेकिन वे भूलते हैं कि भाजपा एक बड़े महत्वपूर्ण वर्ग का प्रतिनिधित्व करती है। अगर चौटाला ने भाजपा को साथ रखा होता तो आज हरियाणा तथा उनका अपना इतिहास अलग होता। चाहे इस समय सुखबीर बादल आश्वस्त हैं कि कांग्रेस के नेता आपस में लड़ रहे हैं पर हिन्दू, दलित, व्यापारी तथा उद्योगपति की उपेक्षा कर अकाली नेतृत्व भी कांग्रेस की वापिसी का रास्ता तैयार कर रहा है। कांग्रेस कह रही है कि जब वह सत्ता में आएगी तो प्रापॅर्टी टैक्स रद्द कर देगी।

हाल ही में जब उपमुख्यंत्री सुखबीर बादल जालन्धर आए तो तीन दर्जन अकाली-भाजपा पार्षदों में से केवल आधा दर्जन ही वहां मौजूद थे जबकि पहले सुखबीर बादल के कार्यक्रमों में पहुंचने के लिए पार्षदों में धक्का मुक्की होती थी। पार्षद भी क्या करें? उनकी कोई सुनता नहीं और उन्हें रोज़ाना अपने लोगों से गालियां सुननी पड़ रही हैं तीन में से केवल एक ही विधायक मौजूद था। भाजपा के नेताओं की हालत तो दयनीय बनती जा रही है। प्रदेश अध्यक्ष कमल शर्मा ने जब अपने फेसबुक ‘फ्रैंडस’ से मोदी के समर्थन में वार्तालाप करना चाहा तो यह ‘फ्रैंडस’ ही पीछे पड़ गए। अधिकतर सवाल ये ही थे कि क्या कारण है कि शहरियों पर बोझ डाला जा रहा है जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में मुफ्त चीज़े बांटी जा रही हैं,और भाजपा इस धक्के के खिलाफ खामोश क्यों है?

कमल शर्मा जो पंजाब में भाजपा के पतन की अध्यक्षता कर रहे हैं का जवाब था कि केंद्र उन्हें मजबूर कर रहा है कि प्रापर्टी टैक्स लगाया जाए। यह बात सही नहीं है। यह योजना मार्च में खत्म हो चुकी है। और जहां बादल साहिब ने केंद्र की बात नहीं माननी होती, जैसे ग्रामीण क्षेत्र में मुफ्त बिजली पानी को लेकर, वह टस से मस नहीं होते। किसी प्रकार का दबाव काम नहीं आता लेकिन भाजपा के समर्थकों को वे दबाते जा रहे हैं। अपने समर्थकों के लिए नेता गठबंधन की कुर्बानी दे देते हैं जैसे ममता बनर्जी, नीतीश कुमार या नवीन पटनायक ने दी पर यहां तो गठबंधन के लिए भाजपा अपने समर्थकों की कुर्बानी दे रही है…!

असली समस्या अकाली नेतृत्व की मानसिकता की है जो दुर्भाग्यवश शहरी विरोधी नज़र आती है। जब वैट लगाया गया तो सरकार ने कहा था कि दूसरा कोई टैक्स नहीं लगाया जाएगा पर सात महीने में पांच नए टैक्स लगा दिए गए है। हर शहरी को प्रॉपर्टी टैक्स देना पड़ेगा यहां तक कि खाली प्लाट पर भी टैक्स देना पड़ रहा है। कई जगह किराए से अधिक टैक्स लग रहा है। इस टैक्स के खिलाफ बार-बार शहर तथा बाजार बंद हो रहे हैं लेकिन सरकार सुनने को तैयार नहीं। लुधियाना के अकाली मेयर हरचरण सिंह ने कहा है कि उन्हें प्रापर्टी टैक्स लगाने का ‘फंडा’ समझ नहीं आ रहा। अब एडवांस टैक्स लगाया जा रहा है। यह जाने बिना कि जो सामान वे प्रदेश के बाहर से मंगवा रहे हैं वह बिकेगा कि नहीं व्यापारी को उसके प्रवेश पर टैक्स देना पड़ेगा। यह नया टैक्स भी उस वक्त लगाया जा रहा है जब कई सौ करोड़ रुपए का वैट रिफंड नहीं दिया जा रहा। लेकिन कोई सुनने वाला नहीं। इस रवैये का ही परिणाम है कि पंजाब से निवेश निकल रहा है। मण्डी गोबिंदगढ़ खाली हो रहा है। सुखबीर बादल बाहर से बड़े उद्योग को लाने का प्रयास कर रहे हैं लेकिन इस माहौल में बाहर से कौन आएगा जब यहां ही व्यापार तथा उद्योग पलायन करना चाहते हैं?

मिलिटैंट इंदिरा गांधी के हत्यारे बेअंत सिंह, सतवंत सिंह तथा केहर सिंह की याद में स्मारक बनवाने की मांग कर रहे हैं। इससे पहले ब्लू स्टार में मारे गए मिलिटैंटस तथा भिंडरावाला की याद में स्वर्ण मंदिर परिसर में स्मारक बन चुका है। पहले मुख्यमंत्री बादल कहते हैं कि यह बनने नहीं देंगे पर जब बन गया तो कह दिया कि हमें नहीं पता शिरोमणि गुरूद्वारा प्रबंधक कमेटी ने इसकी इज़ाज़त दे दी जबकि सब जानते हैं कि शिरोमणि कमेटी बादलों की जेबी संस्था है। मैं निश्चित तौर पर कह सकता हूं कि इंदिरा गांधी के हत्यारों का भी यहां स्मारक बनेगा क्योंकि अकाली नेतृत्व सिख कट्टरवादियों को खुश रखने के लिए किसी भी हद तक जा सकता है। इसी महीने जालंधर में कुछ कट्टरवादी सिख ‘आजादी मार्च’ निकाल चुके हैं जिसमें हिन्दुओं के खिलाफ आपत्तिजनक नारे लगाए गए। इसकी इज़ाज़त कैसे दे दी गई? बादल साहिब को स्मारक बनाने का खूब शौक है पर एक स्मारक वे नहीं बनाएंगे। पंजाब में आंतकवाद के दौर में मारे गए बेकसूर लोगों की याद में स्मारक बनाने की मांग को पंजाब के मुख्यमंत्री सुनने को भी तैयार नहीं।

हाईकमान की मजबूरी है कि क्योंकि राजग गठबंधन के लिए अकाली दल की जरूरत है इसलिए प्रदेश भाजपा की कुर्बानी दी जा रही है। लेकिन आम चुनाव में इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है। नवजोत सिंह सिद्धू ने भी क्या गलत कहा था? केवल यही कि अमृतसर के फंड तरनतारन में भेजे जा रहे हैं। सिद्धू में कम से कम कड़वी सच्चाई बयान करने का दम तो है कमल शर्मा तो इधर-उधर छिपते फिर रहे हैं। हैरानी तो भाजपा के हाईकमान की है कि प्रदेश अध्यक्ष उसको बना दिया जो बादल के मातहत उनका मीडिया सलाहकार रहा हो। वह बादल के सामने कैसे डट सकते हैं? उन्होंने व्यापारियों को बताया कि एडवांस टैक्स लगाने के बारे भाजपा को विश्वास में नहीं लिया गया इस पर सवाल उठता है कि तब आप मंत्रिमंडल से बाहर क्यों नहीं आ गए? फिर मुख्यमंत्री ने कह दिया कि उद्योग तथा व्यापार की समस्याओं को लेकर किसी ने उनसे बात नहीं की, जबकि कमल शर्मा का कहना है कि उसी दिन सुबह उन्होंने शांताकुमार तथा जेपी नड्डा के साथ उनसे मुलाकात कर इन समस्याओं से अवगत करवाया था। अब मालूम नहीं कि दोनों में से कौन सही है पर इससे यह तो पता चलता है मुख्यमंत्री पंजाब की शहरी वर्ग के प्रति इतनी बेरुखी है कि उन्हें मालूम ही नहीं कि उद्योग तथा व्यापार इतने बेचैन हैं? इन परिस्थितियों में भाजपा का नेतृत्व जकड़ा जा रहा है। उनके अपने लोग उन्हें दुत्कार रहे हैं और अकाली नेतृत्व उनसे जरूरत से अधिक देर तक ठहरे मेहमान जैसा बर्ताव कर रहा है। लेकिन इसमें कसूर भाजपा नेताओं का ही है। उन्होंने ही चार कुर्सियों के लिए अपने लोगों का हित कुर्बान कर दिया और अब वे शिकायत करने योग्य भी नहीं रहे। इसलिए उन्हें कैफी आज़मी की पुरानी नज़्म की पंक्तियां याद करवाना चाहता हूं;

कैसे बाज़ार का दस्तूर तुम्हे समझाऊं,

बिक गया जो वो खरीददार नहीं हो सकता!

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Chander Mohan is the grandson of the legendary editor of Pratap, Mahashya Krishan. He is the son of the famous freedom fighter and editor, Virendra. He is the Chief Editor of ‘Vir Pratap’ which is the oldest hindi newspaper of north west india. His editorial inputs on national, international, regional and local issues are widely read.

2 Comments

  1. पंजाब में भाजपा ” पार्टी विथ ए डिफरेंस” साबित नहीं हो पायी है……..सामन्य कार्यकता कि अवहेलना कर के , नेता सिर्फ कुर्सी और सता के पीछे पड़े है…..
    विचारधारा और आदर्श कहीं खो से गए लगते हैं…..व्य़क्ति निष्टा और स्वार्थ ने इनका स्थान ले लिया है………..
    सता कि लालसा और स्वाद चखने के लिए जैसे शहद के ऊपर मखियाँ भिनभिनाती हैं उसकी प्रकार ……स्वार्थ में आंधे कुछ लोग संगठन से जुड़ कर….. शीर्ष स्थान पर आसीन हो गए हैं….

    केवल मोदी जाप के सहारे भाजपा पंजाब में अपनी साख नहीं बचा सकती……कार्यकर्ताओं कि बढ़ती चिंता और निराशा को दूर कर….. उन्हें साथ जोड़ना होगा……लोक सात नहीं लोक सेवा कि भावना अगर उत्पन हो तो ….कुछ रौशनी दिखती है………

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  2. The state government has imposed property tax, heavy penalty on regularisation of illegal colonies and hiked stamp duty and power tariff which are higher than all other states. The solution to improve the economy of punjab is not by imposing heavy taxes on people but by bringing realistic administrative reforms and eradicate corruption from the government. Even the e-trip system would further weaken the economy of Punjab because Punjab is the only state in the north India to impose it and would create obstacles in trade with other states. SAD is heading for its doom by stabbing BJP in state

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