मेरा हक़ है फसले बहार पर !

December 31, 2013 Chander Mohan 1

मेरा हक है फसले बहार पर! आसाराम बापू, तरुण तेजपाल तथा जस्टिस गांगुली से घायल 2013 अपने अंतिम माह में देश को रोमांचित  और आशावादी बना गया। ‘आप’ की जीत में हम राजनीति में आदर्शवाद की वापसी देख रहे हैं। गांधी जी का यह कथन याद आता है कि ‘‘नैतिकता के बिना राजनीति से दूर ही रहना चाहिए।’’ आदर्शवाद व्यावहारिक नहीं रहता क्योंकि यथार्थ बहुत कड़वा, बदसूरत और गंदा होता है लेकिन यहां इतना कड़वा, बदसूरत और गंदा है कि शुद्धि की बहुत जरूरत है। संभावना नहीं कि अरविंद केजरीवाल का परीक्षण अधिक सफल रहेगा क्योंकि निहिथ स्वार्थ सफल नहीं होने देंगे लेकिन किसी ने यह आस तो जगाई है कि ‘वो सुबह कभी तो आएगी!’ कि मूलभूत राजनैतिक

अब बस करनी चाहिए

December 27, 2013 Chander Mohan 0

अब बस करनी चाहिए अहमदाबाद की एक अदालत ने गुलबर्ग सोसायटी नरसंहार के मामले में गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को क्लीन चिट दे दी है। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित एसआईटी की उस कलोज़र रिपोर्ट पर भी अपनी मुहर लगा दी जिसमें 2002 में हुए दंगों में नरेंद्र मोदी को क्लीन चिट दी गई थी। अदालत का कहना है कि दंगों को रोकने के लिए सेना को बुलाने में गुजरात सरकार ने कोई लापरवाही या देरी नहीं की। इस बात का भी कोई प्रमाण नहीं कि दंगों के बाद गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने अफसरों से कहा था कि हिन्दुओं को अपना बदला लेने दो। इस बात का भी कोई प्रमाण नहीं कि साबरमती एक्सप्रैस में जल […]

खास और आम

December 25, 2013 Chander Mohan 0

खास और  आम  दिल्ली के चुनाव में जनता ने जो पैगाम दिया है उसे समझने का प्रयास हमारे लीडर नहीं कर रहे। मसला केवल साफ राजनीति या लोकपाल का ही नहीं है। जनता उस सरकारी संस्कृति का भी विरोध कर रही है जो हमें दो डिब्बों में बांट देती है, खास और आम। इसलिए अब जो आम है वह झाड़ू लेकर अपना विरोध प्रकट कर रहे हैं।  चुनाव के समय जो जनता के आगे हाथ जोड़ कर वोट मांगते हैं वे चुनाव जीतते ही हमारे सर पर बैठ जाते हैं। लाल बत्ती वाली कारें, प्रदूषण बढ़ाते ऊंचे ध्वनि वाले सायरन तथा गनमैन उन्हें आम आदमी से अलग कर देते हैं। जब उन्होंने गुज़रना होता है तो एम्बूलैंस तक को भी […]

कृष्ण, अर्जुन नहीं

December 24, 2013 Chander Mohan 0

कृष्ण, अर्जुन नहीं! संघ प्रमुख मोहन भागवत ने लाल कृष्ण आडवाणी को सलाह दी है कि वह खुद को भाजपा से अलग न करें नहीं तो पार्टी का अहित होगा। उन्होंने एक कहानी के द्वारा आडवाणी से आग्रह किया कि ‘आडवाणीजी राजनीति में हैं… वहीं रहना और उन्हीं लोगों में रहना ताकि गांव को आग न लगे।’ उल्लेखनीय है कि लाल कृष्ण आडवाणी को सक्रिय राजनीति से दूर करने का प्रयास भी संघ ही ने किया था। कोशिश संघ प्रमुख के सुदर्शन के समय शुरू हो गई थी जब असावधानीपूर्वक उन्होंने टीवी के कैमरे के सामने अटल बिहारी वाजपेयी तथा लाल कृष्ण आडवाणी को राजनीति से हट जाने के लिए कहा था। मोहन भागवत के दबाव में ही नरेंद्र मोदी […]

राजनीति या रियलिटी शो

December 20, 2013 Chander Mohan 0

राजनीति या रियालिटी शो? 46 वर्ष के बाद देश को लोकपाल मिलने वाला है। पहली बार प्रधानमंत्री, मंत्रीगण, सांसद बड़े अफसर अब जांच तथा निगरानी के दायरे में आ जाएंगे। आशा है कि इससे भ्रष्टाचार में कुछ कमी आएगी। अन्ना हज़ारे का भी मानना है कि इससे पचास प्रतिशत भ्रष्टाचार कम होगा। जिन्होंने पैसे बनाने हैं वे निश्चित तौर पर नए रास्ते ढूंढ निकालेंगे लेकिन अब उन पर कुछ अंकुश लगेगा। अफसरशाही भी इसके शिकंजे में आ जाएंगी जिसका अपना सकरात्मक असर होगा क्योंकि इस वक्त अफसरशाही पीछे से तारें खींचती है। अरविंद केजरीवाल इस लोकपाल से संतुष्ट नहीं। वह इसे ‘जोकपाल’ अर्थात् मज़ाक का मामला कहते हैं लेकिन निश्चित तौर पर यह बड़ा कदम है। जो कमियां रह गई […]

मोदी ही विकल्प हैं

December 18, 2013 Chander Mohan 1

मोदी ही विकल्प हैं हिंदी क्षेत्र में इन चार विधानसभाओं के परिणाम राजनीति को बदल डालेंगे। नए सहयोगी तो कहां मिलेंगे जो कांग्रेस के साथ हैं वे भी बिदक सकते हैं। मौसम के मुर्गे शरद पवार ने आने वाले तूफान का संकेत दे ही दिया। नेतृत्व के लिए यह भी बड़ा संकट है कि  पार्टी के अंदर हाहाकार मच गया है। अलग तेलंगाना का विरोध कर रहे कांग्रेस के छ: सांसदों ने ही अपनी ही सरकार के खिलाफ अविश्वास का प्रस्ताव का नोटिस दिया है। अगर मैं गलत नहीं तो देश के राजनीतिक इतिहास में ऐसा पहली बार हो रहा है। इस सबका परिणाम होगा कि सरकार के लिए काम करना और मुश्किल हो जाएगा। अंतिम समय में तो वैसे […]