निहायत ही बेवक़ूफ़ आदमी है, Incredibly Stupid Man

रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने अपने सैनिक कमांडरों को परमाणु सिस्टम को तैयार रखने को कहा है। यूक्रेन में युद्ध अभी तक रूस के मुताबिक़ नही चल रहा। रूसी सेना किसी भी बड़े शहर पर क़ब्ज़ा नही कर सकी और यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की, जिन्होंने जान बचाने के लिए देश छोड़ने से इंकार कर दिया है, के नेतृत्व में यूक्रेन की सेना और लोग बराबर मुक़ाबला कर रहे हैं। दूसरी तरफ पश्चिम के देश लगातार प्रतिबंध बढ़ाते जा रहे हैं। रूस की अर्थव्यवस्था को भारी धक्का पहुँचा है। भारत सरकार की तटस्थ नीति सही है। हमें किसी का पक्ष नही लेना चाहिए और अपने लोगो, विशेष तौर पर स्टूडेंट्स को वहां से निकालने को प्राथमिकता देनी चाहिए। यूक्रेन मे भारतीय छात्र नवीन शेखरप्पा की दर्दनाक मौत से पूरा देश शोक में हैं।  इस मामले में हम फँसे हुए हैं। योरूप हमारा वोट तो चाहता है पर हमारे बच्चों के साथ नस्ली व्यवहार की शिकायतें मिल रही हैं। शुरू मे सरकार भी कमजोर रही है। एयर इंडिया ने भी टिकट कई गुना बढ़ा दिए थे। इसकी इजाज़त क्यों दी गई? पहले उन्हे निकालने की वह गम्भीरता दिखाई जाती जो अब दिखाई जा रही है, तो यह बच्चे इतनी यातना सहने से बच जाते।  इसी के साथ यह सार्थक सवाल भी उठता है कि हमारे हज़ारों छात्र हर साल विदेश पढ़ने क्यों जाते है? इस तरह अरबों रूपया बाहर जा रहा है। यूक्रेन में डाक्टरी कर रहे छात्र बताते हैं कि वहां  यहाँ से एक तिहाई कम ख़र्चा है। पंजाब और हरियाणा से कम जनसंख्या वाले यूक्रेन के पास 15 मैडिकल यूनिवर्सटी हैं। भारत सरकार को उच्च शिक्षा की हालत की तरफ ध्यान देना चाहिए। ब्रेन ड्रेन और डालर ड्रेन दोनो बंद होने चाहिए।

लेकिन यह अलग विस्तृत विषय है। मैं आज अपने एक बेअकल पड़ोसी के बारे लिख रहा हूँ। जब दुनिया यूक्रेन के घटनाक्रम से परेशान थी पाकिस्तान के वजीरे आज़म इमरान खान साहिब मास्को पहुँच गए। जब वह पीएम बने थे तो घोषणा की थी कि ‘मैं भीख का कटोरा लेकर कहीं नही जाऊंगा’। लेकिन अब हालत किसी इंटरनैशनल फ़क़ीर से कम नही है। पहले पाकिस्तान के नेता वाशिंगटन जाते थे पर अब क्योंकि उनके साथ अनबन है इसलिए अधिकतर बीजिंग की ही परिक्रमा करते है। इस बार साउदी अरब से 3 अरब डालर मिलें है। शायद वह काफ़ी नही इसलिए पहली बार कटोरा लेकर इमरान खान जंग के बीच रूस पहुँच गए। मास्को के हवाईअड्डे पर उन्हे मुस्कुराते हुए साथ वाले से कहते सुना गया है कि, मैं कैसे समय यहाँ आया हूँ So much excitement  है, अर्थात यहाँ तो बहुत मज़ा है। हैरानी है जिस वक़्त सारी दुनिया साँस रोक कर घटनाक्रम को देख रही थी  पाकिस्तान के पीएम को युद्ध में भी excitement नजर आरही थी।  अब उनके लोग कह रहें है कि तब पता नही था कि पुतिन हमला करने वाले हैं। क्या आप सोए हुए थे? टीवी भी नही देखते?

इमरान खान अपने देश की नीति को कैसे अनाड़ी की तरह चला रहे हैं वह भारत के प्रति उनके रवैये से पता चलता है। पाकिस्तान जानता है कि भारत के साथ रिश्ते बेहतर किए बिना उनकी गति नही है पर इमरान खान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनकी पार्टी भाजपा के प्रति अपनी नफरत प्रकट करने का कोई मौक़ा नही जाने देते। वह नरेन्द्र मोदी को psychopath अर्थात मनोरोगी कह चुके हैं जिनकी Hitler mindset अर्थात हिटलर वाली मानसिकता है। मोदी सरकार को वह Fascist अर्थात फासीवादी भी कह चुकें है। सब गालियाँ निकालने के बाद उनकी शिकायत है कि ‘भारत में जो विचारधारा प्रचलित है उसके कारण वार्ता के सारे रास्ते बंद हो चुकें हैं’। लगभग रोज़ाना इमरान खान भारत पर बरसते हैं। तकलीफ है कि मोदी उतेजित हो कर जवाब नही देते।  हाल ही में पाकिस्तान ने पाँच साल के लिए नई सुरक्षा नीति जारी की है जिसे बनाने में सात साल लग गए हैं। इसमें ज़रूर कहा गया है कि आर्थिकता पर अधिक ध्यान देना होगा। भारत से रिश्ते सुधारने की बात भी कही गई है कि ‘अगले 100 साल भारत के साथ टकराव नही चाहते’। पर  उनके राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार मोइद युसफ ने साथ यह भी जोड़ दिया कि ‘अगर रिश्ते न सुधरे तो भारत का अधिक नुक़सान होगा’। यार, हमारी चिन्ता छोड़ो। आप से तो बांग्लादेश भी आगे निकल गया है।

इमरान खान को तकलीफ है कि नरेन्द्र मोदी उनकी मिस्ड कॉल का भी जवाब नही देते इसलिए मास्को जाने से पहले उन्होने नया प्रस्ताव रखा है। वह नरेन्द्र मोदी के साथ TV Debate चाहते हैं। अर्थात वह चाहते है कि भारत और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री टीवी पर आ तू तू मैं मैं करें! उनका ज़रूर यह कहना है कि ‘ बहुत अच्छी बात होगी अगर मतभेद बातचीत से सुलझा लिए जाऐं’। यह बात तो ठीक है लेकिन मतभेद सुलझाने के प्रयास में भारत के हर प्रधानमंत्री ने अपने हाथ झुलसा लिए हैं। और डिबेट ? जैसे उनके अपने अख़बार डॉन के एक पाठक ने भी लिखा है, ‘ यह तो इमरान खान की हाई स्कूल मानसिकता है’।  ऐसी बहस तो स्कूली बच्चे करतें हैं। आज तक किसी देश के नेता को किसी दूसरे देश के नेता के साथ टीवी डिबेट में उलझते नही देखा।  मालूम नही कि पाकिस्तान के वजीरे आज़म किस दुनिया में रहतें है। वह तो ‘जर्मनी और जापान की सीमा पर लगे संयुक्त उद्योग’ की भी चर्चा कर चुके हैं।

भारत और पाकिस्तान के बीच मसले हल होने चाहिए पर यह न गाली निकाल कर न फ़िज़ूल बातें कर हल होंगे। उनके अपने देश में नवाज़ शरीफ़ की पार्टी उनके साथ टीवी डिबेट की माँग कर चुकी है जो मानने को इमरान खान तैयार नही। उन्हे यह भी समझ लेना चाहिए कि भारत का कोई भी प्रधानमंत्री जम्मू कश्मीर पर एक इंच भी हिलने को तैयार नही होगा, वह चाहे कितना भी दैनिक विलाप करते रहें। वह  कश्मीर पर केन्द्रित हैं जबकि भारत बहुत आगे बढ़ चुका है। इमरान खान का कहना है कि, “भारत की सरकार को अपने लोगो को ग़रीबी से निकालने पर ध्यान देना चाहिए न कि प्रधानता की दौड़ पर… भारत जो कभी एक धर्म निरपेक्ष देश के तौर पर जाना जाता था पर अब वहां पागल और नस्लवादी विचारधारा का क़ब्ज़ा हो गया है”। यह उस देश का नेता कह  रहा है जो ख़ुद ख़ैरात पर ज़िन्दा है और जो ख़ुद बार बार उग्रवादियों के आगे समर्पण कर चुका है। उनके रक्षा सलाहकार कह चुके है कि पाकिस्तान के पास आर्थिक आज़ादी नही है जिसका असर विदेश नीति पर पड़ता है पर इमरान खान हमें नसीहत देने से बाज़ नही आते।

पाकिस्तान की अपनी हालत क्या है? अनेक आँकड़े बता रहे हैं कि इससे फटेहाल नही हो सकते। पतन इतना तेज़ है कि जब से  अगस्त 2018 में इमरान खान पीएम बने, डालर के मुक़ाबले में पाकिस्तान का रूपया अपनी एक चौथाई कीमत खो बैठा है। जब बांग्लादेश आजाद हुआ तो पाकिस्तान उनसे 70 प्रतिशत अधिक अमीर था पर भाई लोगो ने इतना बुरा शासन दिया कि आज बांग्लादेश उनसे 45 प्रतिशत अमीर है। एक पाकिस्तानी अर्थशास्त्री ने तो कहा है कि यह सम्भव है कि 2030 में उन्हे बांग्लादेश से क़र्ज़ा लेने की नौबत आजाए। पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था 264 अरब डालर है जबकि बांग्लादेश की 324 अरब डालर है। भारत की दस गुना है। बांग्लादेश की वार्षिक प्रति व्यक्ति आय भारत के लगभग बराबर 2000 डालर है जबकि पाकिस्तान की 1200 डालर है। बांग्लादेश के पास विदेशी मुद्रा का 32 अरब डालर का भंडार है जबकि पाकिस्तान के पास सिर्फ़ 8 अरब डालर का भंडार है। भारत के पास 640 अरब डालर का भंडार है। पाकिस्तान पर विदेशी क़र्ज़ा पिछले तीन सालों में तीन गुना बढ कर 85 अरब डालर हो चुका है।

चाहे इमरान खान लगातार लोगो का ध्यान भारत की तरफ मोड़ने की कोशिश करते रहते है पर उनके लिए और उनके देश के लिए चुनौती बढ़ती जा रही है। वह कट्टरवादियों और सेना के जरनैलों  के आगे समर्पण कर चुकें है। कट्टरवादी जमात तहरीक-ए-लब्बैक ने अपनी माँगो को लेकर इस्लामाबाद, लाहौर और पेशावर को जाने वाली सभी सड़के बंद कर दी थी और आख़िर में सरकार को झुकना पड़ा। पत्रकार मरिआमा बाबर शिकायत कर रही है कि ‘इस धार्मिक संगठन ने पूरे देश को उन्माद की चपेट में ले लिया है’। लेकिन सरकार बेबस है क्योंकि इमरान खान आईएसआई के पूर्व प्रमुख लें. जनरल फ़ैज़ हमीद को लेकर सेना प्रमुख जनरल बाजवा से टकराव हार चुकें हैं। इस साल पाकिस्तान में अधिक राजनीतिक अस्थिरता की आशंका है। जैसे सामरिक विशेषज्ञ सी राजा मोहन ने लिखा है, “चाहे इमरान खान 2023 तक पद पर बने रह सकते है वह 2022 में ही मुश्किल से बचे रहेंगे क्योंकि पाकिस्तान के आगे बड़े संकट है और सरकार लगातार अलोकप्रिय हो रही है”। इमरान खान अपने लोगो से कहते रहते है कि आपने घबराना नही ,पर उन्हे ख़ुद घबराना चाहिए क्योंकि  अर्थव्यवस्था के कुप्रबंध, ख़ाली ख़ज़ाना, ठप्प हो रही चीन की परियोजनाऐं, ऊँची  महंगाई, कमजोर विकास, उर्जा की कमी, बढ़ती बेरोज़गारी और पेट्रोल की आकाश को छूती क़ीमतों ने लोगो की मुसीबतें बहुत बढ़ा दी है। जेल के क़ैदियों के लिए राशन नही है। और सेना एक तरफ बैठी इमरान खान का तमाशा देख रही है।

पाकिस्तान  इस जाल से तब तक बाहर नही आ सकता जब तक वह भारत के प्रति अपनी नकारात्मक चाल नही बदलता पर इसकी सम्भावना दूर दूर तक नजर नही आ रही। पर इमरान खान  को भारत की चिन्ता है और उनका कहना है कि I would love to debate with Narendra Modi on TV. किसी भी देश के नेता का लिए ऐसे शब्दों का इस्तेमाल तो नही होना चाहिए पर पाकिस्तान के माननीय वजीरे आज़म की हरकतों को देखते हुए कहने को दिल चाहता है कि, यह निहायत ही बेवक़ूफ़ आदमी है।

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Chander Mohan is the grandson of the legendary editor of Pratap, Mahashya Krishan. He is the son of the famous freedom fighter and editor, Virendra. He is the Chief Editor of ‘Vir Pratap’ which is the oldest hindi newspaper of north west india. His editorial inputs on national, international, regional and local issues are widely read.