मनमोहन सिंह: इतिहास क्या कहेगा?, How Will History Judge ManMohan Singh?

April 11, 2024 Chander Mohan 0

33 वर्ष सांसद रहने के बाद 91 वर्षीय डा.मनमोहन सिंह सक्रिय राजनीति से रिटायर हो गए है। शायद ही कोई और राजनेता होगा जिसका उनके जैसा अनुभव और देश के प्रति उनके जैसा योगदान होगा। वह मुख्य आर्थिक सलाहकार रहे, रिसर्व बैंक के गवर्नर रहे,भारत सरकार के वित्त सचिव रहे,यूजीसी के अध्यक्ष रहे,योजना आयोग के उपाध्यक्ष रहे,1991 में वित्त मंत्री बने और 2004 मे देश के प्रधानमंत्री बन गए। इतनी बड़ी प्रशासनिक और राजनीतिक यात्रा के बाद भी वह उसी तरह बेदाग़ हैं जैसे वह यह यात्रा शुरू करने के समय थे। उनके शासन काल के साथ कुछ विवाद भी जुड़े हैं जिन पर आगे चल कर चर्चा करूँगा, यहाँ यह कहना चाहूँगा कि आजकल ऐसे लोग नहीं मिलते। वह […]

यह राजनीति है, धर्म नीति नहीं, Its Politics, Not Religion

April 4, 2024 Chander Mohan 0

पुरानी बात है। इंदिरा गांधी की एमरजैंसी का सारा वक़्त समर्थन करने के बाद 1977 में वरिष्ठ मंत्री बाबू जगजीवन राम कांग्रेस को छोड़ कर जनता पार्टी में शामिल हो गए। वह जालंधर में जनता पार्टी की सभा को सम्बोधित करने के लिए आए तो मैंने उनसे मुलाक़ात की थी। उनके द्वारा पार्टी छोड़ने पर जब मैंने सवाल किया तो उनका जवाब आज तक मुझे याद है, “यह राजनीति है धर्म नीति नहीं, बेटा”। बाबू जगजीवन राम के पास तो फिर औचित्य था कि वह इंदिरा गांधी की तानाशाही का विरोध करने के लिए जनता पार्टी में शामिल हुए है। उस समय तो बहुत कम लोग दलबदल करते थे पर आजकल की हमारी राजनीति तो भारत की आज़ादी से पहले […]

समाज में बढ़ती ख़तरनाक असमानता, Increasing Dangerous Inequality

March 28, 2024 Chander Mohan 0

हमारे संविधान की उद्देशिका में लिखा है कि “भारत एक सम्पूर्ण प्रभुत्व सम्पन्न, समाजवादी, पंथ- निरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक गणराज्य” है। मूल प्रस्तावना में ‘समाजवादी’ और ‘पंथ- निरपेक्ष’ नही थे, इन्हें 1976 में एमरजैंसी के दौरान इंदिरा गांधी सरकार ने शामिल करवाया था। 1976 से लेकर आज तक दुनिया बहुत बदल चुकी है। समाजवाद के मक्का, रूस और चीन, में ही इसे दफ़ना दिया गया है। चीन के पूर्व नेता डेंग जियाओपिंग ने एक बार कहा था ‘अमीर होना भव्य है’। चीन की तरह रूस भी पूंजीवाद के रास्ते पर चल रहा है। चीन और रूस तानाशाही है जहां लोगों की भावना को आराम से कुचला जा सकता है पर भारत तो लोकतंत्र है जहां लोगों की तकलीफ़ों की अनदेखी नहीं होनी […]

No Image

जवाहरलाल नेहरू के बाद नरेन्द्र मोदी?After Nehru, Modi?

March 21, 2024 Chander Mohan 0

हमारे अद्भुत चुनाव शुरू हो रहें हैं। 96 करोड़ लोग मतदान करेंगे जो अपने 543 प्रतिनिधि चुनेंगे। 10.5 लाख मतदान केन्द्र होंगे, 1.5 करोड़ मतदान स्टाफ़ होगा। 55 लाख ईवीएम होंगे। 7 चरण में उतर में हिमालय से लेकर दक्षिण में हिन्द महासागर, पश्चिम के रेगिस्तान से लेकर पूर्व के जंगलों तक हमारे लोग जोश से मतदान करेंगे, और दुनिया आश्चर्य से देखेगी कि किस तरह से सब कुछ सही हो गया। पाँच में से एक वोटर 30 वर्ष की आयु से कम है। 12 प्रदेशों में महिला वोटर पुरूषों से अधिक हैं। युवा और महिला वोटर परिवर्तन के इंजन बनेंगे। महिलाओं के लिए हर दल योजनाओं की घोषणा कर रहें हैं। युवा नौकरी और मौके की माँग कर रहे […]

भारत-पाक: दो संदेशों से संदेश, India -Pakistan: Message From Two Messages

March 14, 2024 Chander Mohan 0

शाहबाज़ शरीफ़ एक बार फिर लड़खड़ाती पाकिस्तान की सरकार के वज़ीर-ए-आज़म बन गए है। इससे पहले वह अप्रैल 2022 में पीएम बने थे। तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें जो बधाई का संदेश भेजा था और जो अब भेजा है उसकी भावना और शब्दावली में जो अंतर है, वह ही स्पष्ट करता है कि हमारी सरकार उस देश से बेहतर रिश्तों के बारे कितनी नाउम्मीद है। अप्रैल 2022 को भेजे अपने संदेश में नरेन्द्र मोदी ने कहा था, “ पाकिस्तान के प्रधानमंत्री चुने जाने पर ‘हिज़ एकसिलैंसी’(महामहिम) मियाँ मुहम्मद शाहबाज़ शरीफ़ को बधाई। भारत ऑतंकवाद से मुक्त इस क्षेत्र में शान्ति और स्थिरता चाहता है ताकि हम विकास की अपनी चुनौतियों से जूझ सकें और अपने लोगोँ के कल्याण और […]

‘हार्स ट्रेडिंग’ से लोकतंत्र खोखला हो जाएगा, Horse Trading Will Destroy Democracy

March 7, 2024 Chander Mohan 0

चौधरी देवीलाल ने एक बार कहा था कि लोकतंत्र लोकलाज से चलता है। यह अलग बात है कि खुद ताऊ ने अपने बेटों को सब कुछ सम्भालते वक़्त लोकलाज की अधिक परवाह नहीं की, पर बात तो उन्होंने पते की कही थी। लोकतंत्र लोकलाज से चलना चाहिए पर हमारे कई जन प्रतिनिधियों ने लोकलाज को फ़िज़ूल चीज़ समझ कर कूड़ेदान में फेंक दिया है। पार्टी या विचारधारा के प्रति वफ़ादारी अब मायने नहीं रखती, सब कुछ कुर्सी है। नीतीश कुमार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कहा है कि, “मैं प्रधानमंत्री को भरोसा दिलाता हूँ अब…इधर उधर नहीं जाऊँगा”। यह वहीं नीतीश कुमार है जिन्होंने कहा था कि ‘मरना पसंद है उधर जाना पसंद नहीं’। पर अब ‘उधर’ को भरोसा दिला […]