सिंहासन खाली करो कि जनता आती है!

March 12, 2014 Chander Mohan 1

सिंहासन खाली करो कि जनता आती है! आम चुनाव लोकतंत्र का जश्न है। पांच साल उनके एक दिन हमारा! इस एक दिन में जनता अपना हिसाब बराबर करती है; इसलिए जरूरी है कि इस मौके का सही इस्तेमाल किया जाए। संसद के अंदर ‘माननीय’ ने पिछले दिनों जो व्यवहार किया है वह सोचने पर मज़बूर करता है कि हम किन्हें अपना प्रतिनिधि बना रहें हैं? यह भी दिलचस्प है कि इस एक दिन से बड़े-बड़े लोग आंतकित रहते हैं। ताकतवार मंत्रियों के भी जनता के इस सशक्त अधिकार से पसीने छूटते हैं। दिग्विजय सिंह और कुमारी शैलजा जैसे राज्यसभा में पहुंच चुके हैं। शीला दीक्षित केरल की राज्यपाल बन गई है। सिहासन खाली करो कि जनता आती है! इस बार […]

वादे हैं वादों का क्या?

March 5, 2014 Chander Mohan 0

वादे हैं वादों का क्या? सोवियत यूनियन के पूर्व प्रधानमंत्री निकिता कु्रशचेव ने कहा था कि राजनीतिज्ञ वह होता है जो वहां पुल बनाने का वायदा करता है जहां कोई नदी नहीं है। आजकल पंजाब में नींव पत्थर रखने की जो सुनामी आई हुई है उसे देख कर क्रुशचेव का यह कथन याद आ जाता है। शासन विरोधी भावना जिसे ‘एंटी इकमबंसी’ कहा जाता है का सामना कर रही पंजाब की वर्तमान सरकार लोगों का ध्यान हटाने के लिए धड़ाधड़ हज़ारों करोड़ रुपए के नींव पत्थर रख रही है लेकिन सवाल तो यह है कि इनके लिए पैसा कहां है? जिस सरकार को अपने कर्मचारियों के वेतन तथा दूसरी सुविधाएं देने में भारी परेशानी हो रही है वह इन नींव […]

संदेशवाहक को मत मारो

February 28, 2014 Chander Mohan 0

संदेशवाहक को मत मारो चुनाव नजदीक है, कांग्रेस की हालत बहुत अच्छी नहीं लगती इसलिए पार्टी के बड़े नेता बहक रहे हैं। गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे जो कभी महाराष्ट्र में दरोगा रह चुके हैं ने बौखलाते हुए मीडिया को दरोगा वाली भाषा में धमकाना शुरू कर दिया है। उन्होंने एलैक्ट्रॉनिक मीडिया को कुचलने तक की धमकी दे दी। शिंदे की धमकी थी कि ‘खुफिया विभाग मेरे पास है और मैं जानता हूं कि यह सब कौन कर रहा है।’ आलोचना के बाद अवश्य शिंदे ने कुछ बदलने का प्रयास किया। अब उनका कहना है कि वे सोशल मीडिया के बारे बात कर रहे थे उनकी बात का संबंध एलैक्ट्रॉनिक मीडिया से बिल्कुल नहीं था जबकि शोलापुर में जो उन्होंने कहा […]

इंसाफ़ का लतीफ़ा बन रहा है

February 25, 2014 Chander Mohan 0

इंसाफ का लतीफा बन रहा है अब तो सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है पर तमिलनाडु सरकार का राजीव गांधी के हत्यारों की रिहाई का फैसला निंदनीय है। सुप्रीम कोर्ट ने जिस दिन दया याचिका के निपटारे में देरी को लेकर उनकी सजा को आजीवन कारावास में बदला उसी के अगले दिन जयललिता की सरकार ने उन्हें रिहा करने का फैसला कर दिया। न फाईल देखी न दस्तावेज की जांच की गई न ही केंद्र से सलाह ली गई। मुझे तो सुप्रीम कोर्ट का फैसला ही समझ नहीं आया। अदालतों में वर्षों मामले लंबित रहते हैं। क्या इन्हें भी ‘देरी’  का औचित्य बता कर खत्म कर दिया जाएगा? कुछ सामाजिक संगठन भी दलील दे रहे हैं कि क्योंकि दया […]

कैसा देश संभाला था, डॉ. साहिब, कैसा बना दिया?

February 19, 2014 Chander Mohan 1

कैसा देश संभाला था, डॉ. साहिब, कैसा बना दिया? भारत की आज़ादी का तीखा विरोध करते हुए ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री विसंटन चर्चिल ने ब्रिटिश संसद में कहा था, ‘सत्ता बदमाशों, धूर्तों तथा मुफ्तखोरों के हाथ आ जाएगी.. वे एक-दूसरे के साथ लड़ते रहेंगे और भारत राजनीतिक कलह में खो जाएगा।’ पिछले वीरवार को अलग तेलंगाना बनाने के मुद्दे को लेकर संसद में जो कुछ हुआ वह क्या चर्चिल के शब्दों को सही साबित नहीं कर रहा? एक हमला हमारी संसद पर दिसंबर 2001 में आतंकवादियों ने किया यह दूसरा हमला सांसदों ने ही संसद पर कर दिया। राज्यमंत्री राजीव शुक्ला कह रहे हैं कि यह सांसदों की हत्या का प्रयास था। क्या हमने इसलिए इन्हें वोट दिए थे कि […]

जमाना झुकता है झुकाने वाला चाहिए

February 17, 2014 Chander Mohan 0

ज़माना झुकता है झुकाने वाला चाहिए आखिर अमेरिका को नरेंद्र मोदी के प्रति अपना रवैया बदलना ही पड़ा। 2005 में गुजरात दंगों के कारण ‘धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन’ की शिकायत पर मोदी का वीज़ा रद्द कर दिया गया था। उल्लेखनीय है कि दंगे 2002 में हुए अमेरिका की अंतरात्मा को तड़पने में तीन साल क्यों लग गए? अगर इन दंगों पर उन्हें तकलीफ थी तो तत्काल प्रतिक्रिया की जाती लेकिन तीन साल के बाद अचानक अमेरिका के कथित सिद्धांत उसे तड़पाने लगे। उल्लेखनीय यह भी है कि उस देश ने कभी भी क्रूर तानाशाहों या शासकों के साथ दोस्ती करने से परहेज़ नहीं किया जब तक यह उसके हित में हो। पाकिस्तान के हर सैनिक तानाशाह जिसने लोकतंत्र का गला […]