झटके खाती हमारी कूटनीति (The Failure of Diplomacy)

October 4, 2018 Chander Mohan 0

हमने प्रयास किया। बार-बार ईमानदार प्रयास किया। अटल जी बस में लाहौर गए तो कारगिल मिला। नरेन्द्र मोदी नवाज शरीफ के पारिवारिक समारोह में शामिल होने के लिए पहुंचे तो तत्काल पठानकोट और उरी हो गया। जब उधर से हमारे प्रयास का जवाब आतंकी हमले से मिलता है तो हम नाराज़ हो जाते हैं। दुनिया के मंचों से उन्हें लताडऩे लगते हैं जैसे अब न्यूयार्क में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने किया। सुषमा जी का संयुक्त राष्ट्र में दिया भाषण अच्छा था। अटल जी के बाद वह हिन्दी में सबसे अच्छी सार्वजनिक वक्ता हैं लेकिन यह भाषण किस मकसद से है? उन्होंने पाकिस्तान को आतंकियों का पनाहगार कहा। कहा कि इस माहौल में जब वह आतंकियों का महिमामंडन कर रहे […]

कूटनीति के विकल्प और चुनौतियां (Choices and Challenges of Diplomacy)

September 13, 2018 Chander Mohan 0

भारत की विदेश नीति पर अपनी किताब ‘चौयसेस’ अर्थात  ‘विकल्प’ में मनमोहन सिंह सरकार के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शिव शंकर मेनन भारत-अमेरिका रिश्ते पर तब ली गई पहल के बारे लिखते हैं, “यह पहल इस धारणा पर आधारित थी कि बदली परिस्थिति में यह हमारे हित में है। चाहे दोनों देश यह कहने में शर्माते हैं कि उनकी सांझेदारी चीन से संतुलन बनाने के लिए है पर यह स्पष्ट है कि चीन का उत्थान इसकी प्रमुख प्रेरणा है… भारत अपने को बदलने, अपने विकास के लिए तथा स्थिर तथा शांतमय वातावरण के लिए अमेरिकी टैकनालिजी, बाजार तथा समर्थन चाहता है।“ इस सब पर कोई विवाद नहीं हो सकता है। जवाहर लाल नेहरू से लेकर सभी प्रधानमंत्रियों ने अमेरिका के साथ […]

इतिहास की लहर (On the Wave of History)

June 28, 2016 Chander Mohan 0

एनएसजी के मामले में सियोल में हमें सफलता नहीं मिली है। अब बताया जा रहा है कि दिसम्बर में एक और बैठक होगी जिसमें भारत जैसे उन देशों के दावे पर विचार होगा जिन्होंने एनपीटी पर हस्ताक्षर नहीं किए। लेकिन सियोल की असफलता बताती है कि अमेरिका के विश्वास पर बहुत विश्वास नहीं किया जा सकता। अगर आज के अमेरिका में सचमुच दम होता तो यह नतीजा नहीं निकलता कि अमेरिका समर्थक कई देशों ने भी साथ नहीं दिया। और स्पष्ट है कि व्यक्तिगत कूटनीति की गुंजाइश अवश्य है पर इसकी सीमा है। देश अपने हित को लेकर कदम उठाते हैं। 2008 में अमेरिका ने इसी एनएसजी से हमारे लिए अपवाद करवाया था जिसके कारण हम सामान्य परमाणु गतिविधियां कर […]