मोहन भागवत : विरासत,चुनौती और दायित्व, Mohan Bhagwat: Legacy, Challenge And Responsibility
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष की विजयदशमी रैली में संघ प्रमुख मोहन भागवत ने अपने संदेश में बहुत सामंजस्यपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति सब तरह की विभिन्नताओं का सम्मान करती है। उनका कहना था कि अगर कोई हिन्दू कहलाने में असहज महसूस करता है तो वह ख़ुशी से खुद को ‘भारतीय’ कह सकता है। उनका यह भी संदेश था कि हिन्दू समाज को ‘हम’ और ‘वह’ की मानसिकता से खुद को अलग रखना है और समुदायों के बीच उत्तेजना फैलाना अस्वीकार होना चाहिए। मोहन भागवत प्रधानमंत्री मोदी के बाद देश के दूसरे सबसे शक्तिशाली नहीं तो सबसे प्रभावशाली व्यक्ति हैं। संघ का प्रभाव तो पहले से ही था पर जिस तरह भागवत उसे नई दिशा दे […]