खिड़की खुली है थोड़ी, थोड़ी देर के लिए, Indo-Pak : Hope And Apprehension

March 11, 2021 Chander Mohan 0

भारत और पाकिस्तान के रिश्तों मे एक बार फिर ताज़ाहवा बहने लगी है।  740 किलोमीटर लम्बी नियंत्रण रेखा पर संघर्ष विराम की घोषणा कर दी गई है। 24-25 फ़रवरी की रात से दोनों तरफ़ से तोपें शांत हो गईं हैं। दोनों देशों के बीच दो दशक पुराना संघर्ष विराम समझौता 2007-2008 से ही उधड़ना शुरू हो गया था पर पिछले पाँच वर्षों से तो दोनो तरफ़ से ख़ूब गोलाबारी हो रही थी। अब तोपों पर कवर चढ़ा दिए गए हैं। क्या रिश्तों में सुखद मोड़ आएगा या पहले कई प्रयासों की तरह यह भी नक़ली सूर्योदय होगा? इसे समझने के लिए देखना होगा, 1. क्या हुआ ? 2. क्यों हुआ? 3. क्या हो सकता है आगे? क्या हुआ? 2019 मे […]

बाक़ी चार साल (Remaining Four Fours)

June 4, 2020 Chander Mohan 0

हमारी पीढ़ी ने बहुत कुछ देखा है। विभाजन की त्रासदी का असर हम पर पड़ा  था। गांधीजी की हत्या, 1962 की लड़ाई, एमरजैंसी, पाकिस्तान का दो फाड़ होना, इंदिरा गांधी की हत्या, दंगे सब के बीच में से हम गुज़र कर हटें हैं। हम करोड़ों लोगों को ग़रीबी से निकालने में सफल रहे। कहा जाने लगा कि चीन के साथ भारत विश्व की भावी दिशा तय करेगा। दशकों के बाद नरेन्द्र मोदी की सरकार आई जिसे पूर्ण बहुमत प्राप्त था। अर्थ व्यवस्था में कुछ गिरावट के बावजूद आशा थी कि भारत अपनी चुनौतियों पर विजय पा लेगा। जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटा दिया गया। तीन तलाक़ की वाहियात प्रथा ख़त्म कर दी गई। अयोध्या में भव्य राम मंदिर के […]

नरेन्द्र मोदी की अग्नि परीक्षा (Agni-Pariksha of Narendra Modi)

April 23, 2020 Chander Mohan 0

देश और विदेश में उन लोगों को घोर निराशा हुई होगी जो हमारा फ़ातिहा तैयार कर इंतज़ार में थें। भारत इस चीनी वायरस से तमाम होने नही जा रहा। अभी तक यहाँ क़रीब 20000 संक्रमित हुए हैं और 600 की मौत हुई है। यह आँकड़े बढ़ रहें है पर अमेरिका में संक्रमित संख्या 800000 है और मरने वालों की संख्या 45000 है। योरूप के कई प्रमुख देश बुरी तरह फँसे हुए हैं लेकिन भारत ने स्थिति पर नियंत्रण रखा हुआ है। इसका बड़ा कारण है कि अपनी परिस्थिति को समझते हुए सरकार ने जल्द और तेज़ क़दम उठाए चाहे वह अप्रिय हैं। वह नीतिगत घपला नज़र नही आया जो आजकल अमेरिका में देखने को मिल रहा है। इसलिए जो सज्जन बहुत उत्सुकता […]

तल्ख थे, तल्ख रहेंगे (India-China, Tense Relationship)

October 10, 2019 Chander Mohan 0

अमेरिका के पूर्व विदेशमंत्री हैनरी किसिंजर ने चीन के नेतृत्व के बारे अपनी किताब  ‘ऑन चायना’ में लिखा था,  “वह सौदेबाजी या वार्ता को विशेष महत्व नहीं देते… वह नहीं समझते कि व्यक्तिगत संबंध का फैसलों पर विशेष असर पड़ता है चाहे वह व्यक्तिगत संबंधों के द्वारा अपने प्रयासों को बढ़ाने की कोशिश कर सकते हैं।” अब जबकि चेन्नई के पास प्राचीन मंदिरों के शहर मामल्लापुरम में भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तथा चीन के राष्ट्रपति जी जिनपिंग एक बार फिर मिल रहे हैं, आशा है कि हमारे प्रधानमंत्री किसिंजर की इस समझदार राय को याद रखेंगे। प्रधानमंत्री मोदी पहले शी जिनपिंग का अहमदाबाद में सागरमती के किनारे स्वागत कर चुके हैं। पिछले साल दोनों चीन के खूबसूरत शहर वुहान […]

अबकी बार ट्रम्प से प्यार (Ab Ki baar Trump se Pyar)

September 26, 2019 Chander Mohan 0

यह मानना पड़ेगा कि अमेरिकी राष्ट्रपतियों को साधने की कला में नरेन्द्र मोदी का कोई मुकाबला नहीं। जवाहर लाल नेहरू की अगवानी के लिए खुद राष्ट्रपति कैनेडी हवाई अडड्डे पर गए थे लेकिन रिश्ता आगे बढ़ नहीं सका क्योंकि तब तक नेहरू वृद्ध हो गए थे और युवा अमेरिकी राष्ट्रपति से संबंध कायम नहीं कर सके। सबसे कड़वे रिश्ते इंदिरा गांधी तथा अमेरिका के राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन के रहे हैं। बांग्लादेश के संकट के समय निक्सन ने हमारी बात सुनने से ही इंकार कर दिया था। जब दूसरे दिन मुलाकात का समय आया तो निक्सन ने इंदिरा गांधी को अपने दफ्तर के बाहर 45 मिनट इंतजार करवाया था। इंदिरा गांधी को भी आभास था कि वह एक प्राचीन सभ्यता की […]

हाउ इज़ द जोश! (Hows The Josh)

May 30, 2019 Chander Mohan 0

ऐसी लहर मैंने पहली बार तब देखी थी जब 1977 में एमरजैंसी हटाए जाने के बाद लोगों ने ‘गाय और बछड़ा’ और बछड़ा जो उस समय कांग्रेस का चुनाव चिन्ह था और जिसका मतलब लोगों ने इंदिरा गांधी तथा संजय गांधी से लिया था, को पराजित किया था। यह दूसरी ऐसी लहर मैंने देखी है लेकिन इन दोनों लहरों में अंतर है। 1977 की लहर इंदिरा गांधी की ज्यादतियों के खिलाफ थी जबकि 2019 में यह जोश से भरी आशावादी लहर नरेन्द्र मोदी तथा भाजपा के पक्ष में है। लोगों ने पांच वर्ष नरेन्द्र मोदी का काम देखा है। कुछ कमजोरियां रही लेकिन आम राय है कि बंदा खरा है, ईमानदार है, मेहनती है और इरादा सही है। यह भी […]