कोरोना काल में सरकार और विपक्ष , Government and Opposition in Covid Times

May 20, 2021 Chander Mohan 0

आजाद भारत में इस महामारी से पहले बड़ा राष्ट्रीय संकट 1962 की सर्दियों में आया था जब चीन के हाथों हमें मार पड़ी थी। यह शिकस्त हमें बड़े सबक़ सिखा गई पर तब के घटनाक्रम में लोकतन्त्र के लिए भी सबक़ छिपा है। देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने निश्चित किया कि संसद में घटनाक्रम पर पूरी बहस हो। बहस के दौरान वह पूरा समय सदन में मौजूद रहे यह जानते हुए भी कि उनसे कड़वे और असुखद सवाल पूछे जाएँगे। वह महसूस करते थे कि वह देश के नेता हैं इसलिए जो कुछ हुआ सबसे अधिक उनकी जवाबदेही बनती है। विपक्ष ने सरकार और विशेष तौर पर नेहरू पर ज़बरदस्त हमला किया। उन्होने ख़ूब बेइज़्ज़ती सही। अगर […]

तिब्बत और ‘इतिहास की हिचकिचाहट’ Tibet And Hesitations of History

January 7, 2021 Chander Mohan 0

एक महत्वपूर्ण  क़दम उठाते हुए अमेरिका के राष्ट्रपति डानल्ड ट्रंप ने उस क़ानून पर हस्ताक्षर कर दिए हैं जो तिब्बतियों के महामहिम दलाई लामा के उत्तराधिकारी के चुनने के अधिकार  की पुष्टि करता है,और  बीच में चीन के किसी प्रकार के दखल का विरोध करता है। बीजिंग ने अमेरिका के इस क़ानून का कड़ा विरोध किया है और उसे अपने ‘आंतरिक मामले’ में दखल क़रार दिया है। तिब्बती परम्परा के अनुसार दलाई लामा अवतार लेतें हैं, पर यह कौन होगा इसकी तलाश बौद्ध परम्परा के अनुसार की जाती है। सितम्बर 2011में दलाई लामा ने अगले दलाई लामा के चयन के बारे स्पष्ट दिशा निर्देश दे दिए थे ताकि किसी प्रकार की शंका या धोखा न हो। चीन यह मानने के […]

भारत-चीन और अमेरिका-रूस India-China and America-Russia

July 2, 2020 Chander Mohan 0

लद्दाख में भारत और चीन के बीच गम्भीर  टकराव को लेकर दुनिया में चिन्ता है। कहा जा रहा है कि यह दूसरे शीत युद्ध की शुरूआत हो सकती है। पर न्यूयार्क टाईम्स ने एक विश्लेषण में लिखा है कि चाहे चीन भारत और जापान जैसे पड़ोसी देशों के साथ तनाव भड़का रहा है पर असली निशाना अमेरिका है। यह अख़बार अमेरिका के साथ ‘घातक टकराव’ की चेतावनी दे रहा है। लंडन का अख़बार फ़ाइनेंशियल टाईम्स कुछ और लिखता है, “सीमा पर टकराव के बाद भारत और चीन के बीच अलगाव अब अवश्यभावी नज़र आता है…भारत के नीति निर्माताओं में यह सहमति है कि क्योंकि चीन एक वैरी ताक़त है इसलिए भारत की एकमात्र जायज़ प्रतिक्रिया अमेरिका तथा एशिया के लोकतान्त्रिक […]

इन्हें बख्श दो (Why Divide Freedom Fighters)

October 24, 2019 Chander Mohan 0

  महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव बहुत असुखद विवाद छोड़ गया है। भाजपा ने अपने संकल्प पत्र में विनायक दामोदर सावरकर जिन्हें वीर सावरकर के नाम से भी जाना जाता है, को भारत रत्न देने की मांग की है। चुनाव प्रचार में भाजपा के नेताओं ने कांग्रेस से स्पष्टीकरण मांगा कि उनकी सरकारों ने सावरकर को भारत रत्न क्यों नहीं दिया? वह भूल गए कि अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार तथा नरेन्द्र मोदी की पहली सरकार ने भी सावरकर को भारत रत्न नहीं दिया था लेकिन अब महाराष्ट्र के चुनाव की मजबूरी थी इसलिए मामला गर्म किया गया। इसके विपरीत बहुत से लोग है जो सावरकर को भारत रत्न देने का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि सावरकर ने पांच […]

विभाजन और भव्य त्रिमूर्ति (Partition: The Grand Triumvirate)

November 15, 2018 Chander Mohan 0

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और वह लोग जो जवाहर लाल नेहरू को आजादी के बाद प्रधानमंत्री बनाए जाने की आलोचना करते हैं यह भूलते हैं कि यह फैसला महात्मा गांधी का था जिसे सरदार पटेल ने सहर्ष स्वीकार किया था। गांधी जी ने जवाहर लाल नेहरू के बारे लिखा था, “यह मेरी भाषा बोलेगा।” गांधी जी की इस इच्छा को पटेल ने खुशी से स्वीकार कर लिया था और उन्होंने नेहरू को कहा था, “उस लक्ष्य के लिए जिसके लिए भारत में किसी ने उतनी कुर्बानी नहीं दी जितनी आपने दी है मेरी बेहिचिक वफादारी और निष्ठा आपके साथ है। हमारी जोड़ी बेजोड़ है।“ जो लोग नेहरू की आलोचना करते हैं उन्हें पटेल के इन शब्दों का ध्यान रखना चाहिए जिनमें […]

क्योंकि तब सरदार पटेल थे (Because Sardar Patel was There)

November 8, 2018 Chander Mohan 0

सरदार वल्लभभाई पटेल के बारे मई 1933 में महात्मा गांधी लिखते हैं,“क्या मुझे इस बात का अहसास नहीं कि भगवान की मुझ पर कितनी अनुकंपा रही है कि मुझे वल्लभभाई जैसे असाधारण व्यक्ति का साथ मिला है। ” उन्होंने पटेल से यह भी कहा था, “तुम्हारा दिल शेर जैसा हैं”। लेकिन सरदार पटेल के योगदान के बारे सटीक टिप्पणी राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने मई 1959 में की थी कि, “आज एक भारत है जिसके बारे हम सोच सकते हैं और बात कर सकते हैं तो यह बहुत कुछ सरदार पटेल की शासन कला तथा मजबूत प्रशासन का परिणाम है।“ भारत की प्राचीन सभ्यता है लेकिन हम सदा बिखरे रहें हैं। यही कारण है कि 1947 से लगभग एक हजार […]