भव्य त्रिमूर्ति, गांधी, नेहरू और पटेल, The Fabulous Three

November 6, 2025 Chander Mohan 0

कृतज्ञ राष्ट्र ने  सरदार बल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती एकता दिवस के तौर पर मनाई है। इस महान नेता ने 562 बड़ी-छोटी रियासतों, जिनका विभाजन से पहले के भारत के 40 प्रतिशत हिस्से पर शासन था, को भारत संघ के साथ मिलाया था। कई रियासत तो बहुत छोटी थीं पर समृद्ध हैदराबाद भी थी जो योरूप के अधिकतर देशों से बढ़ी थी और जिसका तब बजट बेल्जियम के बराबार था। ऐसा करते वकत उन्होंने साम दाम दंड भेद सब का इस्तेमाल किया था। जॉन ज़ुब्रज़ीकी जिन्होंने रियासतों के भारत में विलय पर किताब लिखी है, ने इसके लिए “पटेल के शक्तिशाली व्यक्तित्व, क्रोध के साथ सौम्यता और मिन्नत के साथ ज़बरदस्ती के मिश्रण” को ज़िम्मेवार ठहराया है। नेहरू और पटेल […]

जितनी आबादी उतना हक़ ? , Rights According To Population?

June 12, 2025 Chander Mohan 0

केन्द्रीय सरकार ने दो चरणों में जनगणना जिसमें जाति जनगणना भी शामिल होंगी, की घोषणा की है। उम्मीद है कि पूरी प्रकिया तीन साल में पूरी हो जाएगी। क्या परिणाम 2029 के चुनाव से पहले सामने आजाएगा,यह आने वाले समय का सबसे बड़ा प्रश्न होगा। जनगणना क्यों ज़रूरी है यह तो स्पष्ट ही है क्योंकि विकास आँकड़ों पर आधारित किया जाता है और मूलभूत आँकड़ा जनसंख्या और उसका स्वरूप है। इस बार आर्थिक स्थिति से जुड़ी जानकारी के अलावा धर्म और जाति के बारे भी जानकारी एकत्रित की जाएगी। यह जनगणना छ: साल की देरी से हो रही है। सरकार का बहाना था कि कोविड है पर कोविड 2023 के मध्य तक समाप्त हो चुका था। सरकार मामला लटकाती गई […]

विभाजन के लिए कौन ज़िम्मेवार था?, Who Was Responsible For Partition ?

November 24, 2022 Chander Mohan 0

आजकल गढ़े मुर्दे ढूँढने और उखाड़ने का मौसम है। जो 75 वर्ष से पहले घटा उसे लेकर गर्मागर्म बहस हो रही है। देश के विभाजन को लेकर भी बहुत कुछ उछाला जा रहा है। भाजपा द्वारा जारी एक वीडियो में विभाजन के लिए पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और कम्यूनिस्टों को ज़िम्मेवार ठहराया गया है। नेहरू पर आरोप है कि वह मुस्लिम लीग की पाकिस्तान बनाने की माँग के आगे झुक गए। संघ के नेता इन्द्रेश कुमार का कहना है कि अगर महात्मा गांधी ने नेहरू की जगह सरदार पटेल या सुभाष बोस को अपना सहायक चुना होता तो देश का बँटवारा टाला जा सकता था। यह कथन तथ्यों से खिलवाड़ है। एक, विभाजन के समय पटेल गांधीजी के बराबर  सहायक […]

कोरोना काल में सरकार और विपक्ष , Government and Opposition in Covid Times

May 20, 2021 Chander Mohan 0

आजाद भारत में इस महामारी से पहले बड़ा राष्ट्रीय संकट 1962 की सर्दियों में आया था जब चीन के हाथों हमें मार पड़ी थी। यह शिकस्त हमें बड़े सबक़ सिखा गई पर तब के घटनाक्रम में लोकतन्त्र के लिए भी सबक़ छिपा है। देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने निश्चित किया कि संसद में घटनाक्रम पर पूरी बहस हो। बहस के दौरान वह पूरा समय सदन में मौजूद रहे यह जानते हुए भी कि उनसे कड़वे और असुखद सवाल पूछे जाएँगे। वह महसूस करते थे कि वह देश के नेता हैं इसलिए जो कुछ हुआ सबसे अधिक उनकी जवाबदेही बनती है। विपक्ष ने सरकार और विशेष तौर पर नेहरू पर ज़बरदस्त हमला किया। उन्होने ख़ूब बेइज़्ज़ती सही। अगर […]

तिब्बत और ‘इतिहास की हिचकिचाहट’ Tibet And Hesitations of History

January 7, 2021 Chander Mohan 0

एक महत्वपूर्ण  क़दम उठाते हुए अमेरिका के राष्ट्रपति डानल्ड ट्रंप ने उस क़ानून पर हस्ताक्षर कर दिए हैं जो तिब्बतियों के महामहिम दलाई लामा के उत्तराधिकारी के चुनने के अधिकार  की पुष्टि करता है,और  बीच में चीन के किसी प्रकार के दखल का विरोध करता है। बीजिंग ने अमेरिका के इस क़ानून का कड़ा विरोध किया है और उसे अपने ‘आंतरिक मामले’ में दखल क़रार दिया है। तिब्बती परम्परा के अनुसार दलाई लामा अवतार लेतें हैं, पर यह कौन होगा इसकी तलाश बौद्ध परम्परा के अनुसार की जाती है। सितम्बर 2011में दलाई लामा ने अगले दलाई लामा के चयन के बारे स्पष्ट दिशा निर्देश दे दिए थे ताकि किसी प्रकार की शंका या धोखा न हो। चीन यह मानने के […]

भारत-चीन और अमेरिका-रूस India-China and America-Russia

July 2, 2020 Chander Mohan 0

लद्दाख में भारत और चीन के बीच गम्भीर  टकराव को लेकर दुनिया में चिन्ता है। कहा जा रहा है कि यह दूसरे शीत युद्ध की शुरूआत हो सकती है। पर न्यूयार्क टाईम्स ने एक विश्लेषण में लिखा है कि चाहे चीन भारत और जापान जैसे पड़ोसी देशों के साथ तनाव भड़का रहा है पर असली निशाना अमेरिका है। यह अख़बार अमेरिका के साथ ‘घातक टकराव’ की चेतावनी दे रहा है। लंडन का अख़बार फ़ाइनेंशियल टाईम्स कुछ और लिखता है, “सीमा पर टकराव के बाद भारत और चीन के बीच अलगाव अब अवश्यभावी नज़र आता है…भारत के नीति निर्माताओं में यह सहमति है कि क्योंकि चीन एक वैरी ताक़त है इसलिए भारत की एकमात्र जायज़ प्रतिक्रिया अमेरिका तथा एशिया के लोकतान्त्रिक […]