संस्थानों का कमज़ोर पड़ जाना, The Troubling Decline Of Institutions

October 15, 2026 Chander Mohan 0

हमारा चुनाव आयोग एक समय दुनिया के लिए मिसाल था कि चुनाव कैसे करवाए जातें हैं और लोगों के वोट के अधिकार को कैसे सुरक्षित रखा जाता है। अंतराष्ट्रीय मंचों पर चुनाव करवाने में इसे एक प्रकार का गोल्ड स्टैंडर्ड समझा जाता था कि भारत जैसे विशाल और जटिल लोकतंत्र में भी किस तरह निष्पक्ष, आज़ाद और ज़बरदस्त चुनाव करवाए जाते है। कई देशों से हमारे चुनाव आयोग को अपने चुनाव की देखरेख करने के लिए बुलाया जाता था। हमारे कई चुनाव आयुक्तों को तो रोल मॉडल समझा जाता रहा। विशेष तौर पर टी एन शेषन की बहुत इज़्ज़त रही है, यहाँ तक कि पाकिस्तान में भी उनके प्रशंसक थे कि किस तरह वह निष्पक्ष चुनाव करवाने में किसी की […]

क्या उचित, क्या अनुचित, What Is ‘Uchit’, What Is Not

February 12, 2026 Chander Mohan 0

पूर्व थल सेनाध्यक्ष जनरल मनोज मुकंद नरवणे की अप्रकाशित किताब फ़ोर स्टारज़ ऑफ डेसटिनी को लेकर  संसद में खूब हंगामा हो रहा है। राहुल गांधी विशेष तौर पर बहुत उत्तेजित हैं। वह किताब पर चर्चा की ज़िद्द कर रहे हैं जबकि सत्तापक्ष भी अड़ गया है कि क्योंकि किताब अभी प्रकाशित नहीं हुई, इसलिए उस पर बहस नहीं हो सकती। राहुल गांधी ने संसद के बाहर ‘किताब’ की कापी पत्रकारों को दिखा भी दी पर यह बाज़ार में नहीं आई क्योंकि रक्षा मंत्रालय ने इसकी अनुमति नहीं दी। लेकिन इसके कुछ अंश एक पत्रिका में छप चुकें हैं और इसका पीडीएफ़ उपलब्ध बताया जाता है। जनरल नरवणे ने इस बात का प्रतिवाद नहीं किया कि उन्होंने यह किताब लिखी है। […]

गणतंत्र: उपलब्धि और चुनौती, Republic: Achievements And Challenges

January 23, 2025 Chander Mohan 0

गणतंत्र की स्थापना के 75 वर्ष पूर्ण हो रहे हैं।  यह एक महत्वपूर्ण मील पत्थर है क्योंकि आज़ादी के समय चर्चिल समेंत बहुत लोगों ने भविष्य वाणी की थी कि कुछ ही समय में हमारा अस्तित्व समाप्त हो जाएगा और ‘लड़ाई झगड़ें में लुप्त हो जाएगा’। हमने न केवल हमारे अशुभ की कामना करने वालों को ग़लत साबित कर दिया बल्कि अस्थिरता के समुद्र में स्थिरता और प्रगति की मिसाल क़ायम कर दी। भारत लोकतांत्रिक देश है जबकि हमारे चारों तरफ़ देश या तानाशाही बन चुकें हैं या सैनिक शासन क़ायम है या भारी उथल-पुथल से गुजर रहें हैं। यहाँ हर चुनाव ने लोकतंत्र की जड़ों को मज़बूत किया है। दोनों शासक और शासित समझतें हैं कि यह देश केवल […]

लीक होता इंफ़्रास्ट्रक्चर, Leaking Infrastructure

August 8, 2024 Chander Mohan 0

यह वीडियो देखना बहुत कष्टदायक था। हमारी नई ख़ूबसूरत संसद की छत से पानी टपक रहा था। पानी गिर कर संसद के मकर द्वार तक पहुँच गया था। टपकते पानी के नीचे नीली बाल्टी रखी गई थी पर पानी बाल्टी भरने के बाद फ़र्श पर फैल गया था। पानी के नीचे बाल्टी रखना भारतीय घरों में सामान्य बात है। हमारी छतें बरसात में टपकती है। पर यह तो हमारी नई संसद है, आजाद भारत की आकांक्षाओं की प्रतीक है। इसकी भी छत टपकने लगी। लोकसभा के सचिवालय ने सफ़ाई दी कि भारी बारिश के कारण संसद की लॉबी के उपर लगे शीशे के गुंबद को फ़िक्स करने वाले एडहेसिव (चिपकाने वाले पदार्थ) के हट जाने से लॉबी में ‘पानी का […]

राहुल गांधी : ज़िम्मेवारी और अपेक्षा, Rahul Gandhi: Responsibility And Expectation

July 3, 2024 Chander Mohan 0

नई सरकार स्थापित हो गई। प्रधानमंत्री मोदी बता रहें हैं कि वह पुराने गियर में लौट आऐं है। गठबंधन सरकार होने के बावजूद सारे प्रमुख मंत्रालय भाजपा के पास हैं। सहयोगियों को झुनझुना दे कर संतुष्ट कर लिया गया है। स्पीकर भी ओम बिरला को बना कर संदेश है कि कुछ नहीं बदला। लेकिन नरेन्द्र मोदी को भी अहसास होगा कि चुनाव परिणाम ने बहुत कुछ बदल दिया है। विपक्ष का रूख तीखा है और देश का मूड बदल चुका है। लोग महंगाई और बेरोज़गारी पर केन्द्रित हैं और बता रहें हैं कि जो अब तक चलता रहा है उसे पसंद नहीं किया गया। इस सरकार का दुर्भाग्य है कि शुरू में ही गम्भीर शिकायतों के विस्फोट हो रहें हैं। […]

आशंका और आशा के बीच 2024, Anxiety and Hopes for 2024

January 4, 2024 Chander Mohan 0

दुनिया को किसी नास्त्रेदमस या ज्योतिषी के बताने की ज़रूरत नहीं कि 2024 तनावपूर्ण साल रहेगा। युक्रेन और रूस के बीच युद्ध चल रहा था कि हमास ने इज़राइल पर हमला कर दिया। इज़राइल का जवाब इतना खूनी है कि दुनिया स्तब्ध रह गई है। उन्हें रोकने की जगह बाइडेन का अमेरिका उन्हें लगातार और हथियार सप्लाई करता जा रहा है। दोनों बड़ी शक्तियाँ अमेरिका और रूस, दुनिया की लोकराय के कटघरे में खड़ी है। तीसरी महाशक्ति चीन अपने पड़ोसियों, भारत समेत,को दबाने की कोशिश कर रही है। इन तीनों देशों के नेतृत्व की नीतियों का बुरा प्रभाव पड़ेगा और दुनिया तनावग्रस्त और विभाजित रहेगी। हमें नए रोल मॉडल चाहिए जो इस दलदल से निकाल सकें पर बाइडेन, पुतिन या शी जिंपिंग में हमेंबौने नेता मिलें हैं। अगर हम देखें कि सबसे ताकतवार देश अमेरिका में चुनाव […]