अमेरिका की दिशा और संकल्प पर सवाल, Doubts About America

September 30, 2021 Chander Mohan 0

अमेरिका की उपराष्ट्रपति कमला हैरिस के साथ मुलाक़ात के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का कहना था कि ‘भारत और अमेरिका स्वभाविक सांझेदार हैं’। सबसे पहले प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने ‘नैचूरल पार्टनर’ की बात कही थी। इसके पीछे भावना यह है कि क्योंकि दोनों देश लोकतान्त्रिक है इसलिए बहुत कुछ साँझा  हैं पर इसके बावजूद अमेरिका पाकिस्तान की मदद करता रहा है और भारत का झुकाव रूस की तरफ रहा है। अब अवश्य दोनों के सम्बन्ध गहरें हो रहें हैं। नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद यह और मज़बूत हुए हैं। अभी प्रधानमंत्री मोदी वाशिंगटन में राष्ट्रपति जो बाइडेन से मुलाक़ात कर और चार क्वाड देशों के नेताओं की पहली इन-पर्सन बैठक से लौटें हैं। यह मुलाक़ातें अमेरिका द्वारा […]

गलवान के बाद भारत -चीन, India and China after Galwan

June 24, 2021 Chander Mohan 0

यह एक जानबूझकर सोची समझी उकसाहट थी। एक साल पहले पूर्वी लद्दाख में गश्त कर रही 16 बिहार रैजीमैंट की टुकड़ी जिसका नेतृत्व कर्नल संतोष बाबू कर रहे थे, पर चीनी सैनिकों ने हिंसक हमला कर दिया था। कर्नल बाबू और हमारे 19 सैनिक शहीद हुए थे। हमारे जवानों ने ज़बरदस्त मुक़ाबला किया और कई महीने  चीन ने नही बताया कि उसके कितने हताहत हुए थे। बाद में चार मारे गए स्वीकार किए जबकि अमेरिकी और रूसी ख़ुफ़िया सूत्र 35-45 हताहत बता रहें हैं। चीन के साथ टकराव चलता रहता है पर चार दशक के बाद पहली बार था कि चीनी सैनिक हमारा  ख़ून बहाने की तैयारी कर आए थे। भारत और चीन के रिश्तों में गलवान एक निर्णायक मोड़ […]

दोस्ती और दूरियाँ : भारत और रूस, India -Russia : Distant Friends

April 22, 2021 Chander Mohan 0

एक समय भारत और सोवियत यूनियन के रिश्ते इतने घनिष्ठ थे कि उनके पूर्व प्रधानमंत्री निकिता क्रूश्चेवने हमे कहा था, ‘आप हिमालय से आवाज़ लगाओ हम तुरंत चले आएँगे’। यह उन्होंने चीन से हमे मिल रहे खतरे के संदर्भ में कहा था। तब उस देश की नीति इतनी स्पष्ट भारत पक्षीय थी कि पाकिस्तान की उन्होंने कोई परवाह नही की। अब संबंध इतने बदल चुकें हैं कि रूस के विदेश मंत्री सर्गोइ लावरोव अपनी भारत यात्रा के बाद सीधा इस्लामाबाद पहुँचे जहाँ हवाई अड्डे पर उनका स्वागत पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह मुहम्मद क़ुरैशी ने किया। क़ुरैशी साहिब उस बिल्ली की तरह प्रसन्न नजर आ रहे थे जिसने दूध का कटोरा चाट लिया हो! लावरोव ने इमरान खान और जनरल […]

क्वैड: जाना कहाँ तक है? Quad: Past Present and Future

March 25, 2021 Chander Mohan 0

एशिया में ग्रेट गेम शुरू हो चुकी है। अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन, भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, जापान के प्रधानमंत्री योशिहीदे सुगा तथा आस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन के बीच पहली वर्चुअल शिखिर वार्ता दुनिया और विशेष तौर पर एशिया में सामरिक संतुलन बदलने की क्षमता रखती है। ‘क्वाड’ अर्थात चतुष्कोण की बैठक में फ़ैसला लिया गया कि भारत वैक्सीन निर्यात का बड़ा केन्द्र बनेगा। इसके अलावा जलवायु परिवर्तन तथा हिन्द-प्रशांत महासागर में जहाज़ों के निर्बाध आवागमन पर चारों देशों के बीच ज़बरदस्त सहमति बनी है। लेकिन असली सहमति उस देश की ब्लैकमेल को रोकने पर बनी है जिस का संयुक्त बयान मे नाम नही लिया गया, चीन। चीन के आक्रामक रवैया और हठधर्मिता से सब परेशान हैं यही […]

खिड़की खुली है थोड़ी, थोड़ी देर के लिए, Indo-Pak : Hope And Apprehension

March 11, 2021 Chander Mohan 0

भारत और पाकिस्तान के रिश्तों मे एक बार फिर ताज़ाहवा बहने लगी है।  740 किलोमीटर लम्बी नियंत्रण रेखा पर संघर्ष विराम की घोषणा कर दी गई है। 24-25 फ़रवरी की रात से दोनों तरफ़ से तोपें शांत हो गईं हैं। दोनों देशों के बीच दो दशक पुराना संघर्ष विराम समझौता 2007-2008 से ही उधड़ना शुरू हो गया था पर पिछले पाँच वर्षों से तो दोनो तरफ़ से ख़ूब गोलाबारी हो रही थी। अब तोपों पर कवर चढ़ा दिए गए हैं। क्या रिश्तों में सुखद मोड़ आएगा या पहले कई प्रयासों की तरह यह भी नक़ली सूर्योदय होगा? इसे समझने के लिए देखना होगा, 1. क्या हुआ ? 2. क्यों हुआ? 3. क्या हो सकता है आगे? क्या हुआ? 2019 मे […]

भारत-अमेरिका, 2+2 का गणित Arithmetic of 2+2

November 5, 2020 Chander Mohan 0

अपनी किताब ‘चॉयसेज़’ में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रहे शिवशंकर मेनन मार्च 2006 में भारत और अमेरिका के बीच हुए नागरिक परमाणु समझौते के औचित्य के बारे लिखतें हैं, “यह पहल इस धारणा पर आधारित थी कि भारत और अमेरिका के बीच सामरिक सांझेधारी बदली हुई परिस्थिति में हमारे हित में होगी। चाहे दोनों देश इसे खुलेआम स्वीकार नही करते कि उनकी यह सांझेधारी चीन का संतुलन क़ायम करने के लिए है, यह स्पष्ट है कि चीन का उत्थान इसकी प्रमुख प्रेरणा है”। शिवशंकर ने यह भी लिखा है कि भारत के विकास के लिए हमें अमरीकी टेक्नोलॉजी और बाज़ार की ज़रूरत है पर उनका ज़ोर उस बात पर अधिक है कि चीन का उत्थान यह जरूरी […]