भव्य त्रिमूर्ति, गांधी, नेहरू और पटेल, The Fabulous Three

November 6, 2025 Chander Mohan 0

कृतज्ञ राष्ट्र ने  सरदार बल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती एकता दिवस के तौर पर मनाई है। इस महान नेता ने 562 बड़ी-छोटी रियासतों, जिनका विभाजन से पहले के भारत के 40 प्रतिशत हिस्से पर शासन था, को भारत संघ के साथ मिलाया था। कई रियासत तो बहुत छोटी थीं पर समृद्ध हैदराबाद भी थी जो योरूप के अधिकतर देशों से बढ़ी थी और जिसका तब बजट बेल्जियम के बराबार था। ऐसा करते वकत उन्होंने साम दाम दंड भेद सब का इस्तेमाल किया था। जॉन ज़ुब्रज़ीकी जिन्होंने रियासतों के भारत में विलय पर किताब लिखी है, ने इसके लिए “पटेल के शक्तिशाली व्यक्तित्व, क्रोध के साथ सौम्यता और मिन्नत के साथ ज़बरदस्ती के मिश्रण” को ज़िम्मेवार ठहराया है। नेहरू और पटेल […]

मोहन भागवत : विरासत,चुनौती और दायित्व, Mohan Bhagwat: Legacy, Challenge And Responsibility

October 9, 2025 Chander Mohan 0

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष की विजयदशमी रैली में संघ प्रमुख मोहन भागवत ने अपने संदेश में बहुत सामंजस्यपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति सब तरह की विभिन्नताओं का सम्मान करती है। उनका कहना था कि अगर कोई हिन्दू कहलाने में असहज महसूस करता है तो वह ख़ुशी से खुद को ‘भारतीय’ कह सकता है। उनका यह भी संदेश था कि हिन्दू समाज को ‘हम’ और ‘वह’ की मानसिकता से खुद को अलग रखना है और समुदायों के बीच उत्तेजना फैलाना अस्वीकार होना चाहिए। मोहन भागवत प्रधानमंत्री मोदी के बाद देश के दूसरे सबसे शक्तिशाली नहीं तो सबसे प्रभावशाली व्यक्ति हैं। संघ का प्रभाव तो पहले से ही था पर जिस तरह भागवत उसे नई दिशा दे […]

संविधान से छेड़खानी नहीं होनी चाहिए, No Need To Meddle With The Constitution.

July 3, 2025 Chander Mohan 0

राष्ट्रीय सवंय सेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रय होसबाले ने कहा है कि संविधान की प्रस्तावना में जोड़े गए ‘समाजवादी’ और ‘पंथ निरपेक्ष’ शब्दों की समीक्षा होनी चाहिए। उनका कहना है कि यह शब्द संविधान की मूल प्रस्तावना का हिस्सा नहीं थे और बाद में इदिरा गांधी की एमरजैंसी के दौरान 1976 में  42वें संशोधन से इन्हें जोड़ा गया। इन्हें तब जोड़ा गया जब मूल अधिकार छीन लिए गए थे,संसद ठप्प थी और न्यायपालिका पंगु हो चुकी थी। कांग्रेस ने उनके बयान की आलोचना करते हुए कहा है कि आरएसएस का नक़ाब फिर उतर गया और इन्हें अम्बेडकर का संविधान नहीं मनुस्मृति चाहिए। लेकिन क्या वाक़ई संविधान में परिवर्तन करने की कोशिश हो रही है? जो होसबाले ने कहा वह ट्रायल […]

No Image

शशि थरूर: इधर या उधर, Whither Shashi Tharoor

June 5, 2025 Chander Mohan 0

आपरेशन सिंदूर अभी निलम्बित किया गया है पर उसे लेकर एक साइड स्टोरी शुरू हो गई है। अपना पक्ष रखने  के लिए जो प्रतिनिधि मंडल विदेश भेजे गए हैं उनको लेकर राजनीतिक तू तू मैं मैं शुरू हो गई है। विशेष तौर पर कांग्रेस के नेता शशि थरूर को एक महत्वपूर्ण डैलिगेशन का लीडर बनाए जाने पर कांग्रेस पार्टी सरकार और थरूर दोनों से खूब नाराज़ है। 1994 में पी. वी.नरसिम्हा राव ने जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र के मनावाधिकार सम्मेलन में भारत का पक्ष रखने के लिए विपक्ष के नेता अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल भेजा था ताकि यह संदेश जा सके कि सारा देश एकजुट है। इस बार वह समन्वय नहीं है। पर यह बहुत ज़रूरी है […]

मोहन भागवत की सही पहल, Mohan Bhagwat’s Positive Initiative

September 29, 2022 Chander Mohan 0

देश के चिन्ताजनक, कई तो इसे अंधकारमय कहतें हैं, माहौल में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत की पहल एक आशा की किरण नज़र आती हैं। उन्होंने दिल्ली की एक प्रमुख मस्जिद और मदरसे का दौरा किया जहां उन्होंने बड़े  इमाम डा. उमेर अहमद इलियासी से लम्बी वार्ता की और मदरसे के  300 छात्रों से सीधा संवाद किया।  यह पहली बार है जब किसी सरसंघचालक ने मस्जिद या मदरसे में कदम रखा हो। इससे एक दिन पहले उन्होंने  पाँच प्रमुख मुस्लिम बुद्धिजीवियों से भी आपसी मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की थी। भागवत के साथ प्रमुख संघ के प्रमुख पदाधिकारी, कृष्ण गोपाल और  इन्द्रेश भी बातचीत में शामिल हुए जिससे पता चलता है कि संघ ने इस संवाद की प्रक्रिया […]

संघ: निरंतरता और परिवर्तन ( RSS: Continuity and Change)

November 1, 2018 Chander Mohan 0

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत की तीन दिन की व्याख्यान श्रृंखला के प्रति देश में असामान्य दिलचस्पी है। इससे पहले वह पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को मुख्य अतिथि के तौर पर बुला चुके हैं। क्या बदलते समय को देखते हुए संघ भी बदल रहा है? आखिर आज की जीन्स डाले और हाथ में मोबाईल पकडऩे वाली पीढ़ी की जरूरत को देखते हुए संघ ने निक्कर की जगह पैंट शुरू कर ही दी है। पर क्या अब वैचारिक बदलाव के भी संकेत मिल रहें है? क्या आज के भारत की जरूरत को देखते हुए संघ अधिक उदार तथा दूसरों को साथ लेकर चलने वाली संस्था बन रही है? राम माधव का मानना है कि वास्तव में संघ बदल […]