भारतीय ज़िन्दगियाँ भी मायने रखती हैं , Indian Lives Matter

June 18, 2026 Chander Mohan 0

अमेरिका और ईरान के बीच समझौता हो गया लगता है पर यह कैसे लागू होता है यह समय बताएगा। ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर फिर गतिरोध हो सकता है। ईरान और इज़राइल की दुष्मनी क्या रंग लाती है, यह भी समय ही बताएगा। पर यह समझौता दुनिया के लिए और विशेष तौर पर हमारे लिए बड़ी राहत है और  बड़ा सबक़ भी है। ज़ख़्मी, आहत, लगभग तबाह, ईरान ने सुपरपावर अमेरिका को समझौता करने पर मजबूर कर दिया। जिन डानल्ड ट्रम्प ने समझा था कि एक सप्ताह में ईरान समर्पण कर जाएगा उन्हें 100 दिन से अधिक समय युद्ध को समाप्त करवाने की मशक़्क़त करनी पड़ी। अमेरिका को यह सबक़ 1973 में वियतनाम ने भी सिखाया था कि ज़रूरी […]

बदलती ग्लोबल गेम और भारत, India And The Changing Global Game

April 30, 2026 Chander Mohan 0

पाकिस्तान में अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता अभी तक बेनतीजा है। इसका एक और प्रभाव भी है जिससे दुनिया चकित हैं और भारत नाखुश है, यह पाकिस्तान को मिली भूमिका है। पाकिस्तान के नेता विशेष तौर पर फ़ील्ड मार्शल असीम मुनीर बहुत सक्रिय हैं और दोनो अमेरिका और ईरान के बीच पुल का काम कर रहें हैं। डानल्ड ट्रम्प तो मुनीर को ‘माई फ़ेवरिट फ़ील्ड मार्शल’ कह चुकें हैं’। मुनीर एकमात्र सैनिक अधिकारी हैं जिसे व्हाइट हाउस में लंच के लिए आमंत्रित किया गया है। पर ईरान का नेतृत्व भी पाकिस्तान के कूटनीतिक प्रयास के बारे कृतज्ञता प्रकट कर चुका है। ईरानियन रैवलयूशनरी गार्ड के साथ मुनीर के घनिष्ठ सम्बंध है। पाक सेना के प्रमुख का महत्व बहुत बढ़ […]

एक बेमतलब,बेमक़सद युद्ध में विराम, Cease Fire In Aimless Pointless War

April 9, 2026 Chander Mohan 0

ईरान युद्ध में दो सप्ताह का विराम हो गया है। हमले रूक रहें हैं और होर्मुज का जलमार्ग खुल जाएगा। यह शुभ समाचार है। मार्च के पहले सप्ताह में मैंने इस युद्ध को ‘बेमतलब, बेमक़सद’ कहा था। बात वही है। इतनी तबाही से मिला क्या? ट्रम्प ने ‘रिजीम चेंज’ और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रद्द करने का लक्ष्य बताया था। 40 दिन की बमबारी के बाद वहाँ वही शासन है और ईरान का एनरिच्ड यूरेनियम उन्हीं के पास है। अब फोक्स हार्मुज पर है। युद्ध से पहले यह जलमार्ग खुला था। इस युद्ध ने इसका नियंत्रण ईरान को दे दिया। ईरान के पास वह हथियार आगया जो परमाणु अस्त्रों से भी अधिक घातक है। जैसे अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ फरीद ज़कारिया […]

यह युद्ध का युग नही है, This Not Era of War

March 19, 2026 Chander Mohan 0

डवाइट डी.आइज़नहॉवर जो द्वितीय विश्वयुद्ध में योरूप में सुप्रीम कमांडर थे और बाद में अमेरिका के 34वें राष्ट्रपति बने ने कहा था, “मैं युद्ध से नफ़रत करता हूँ क्योंकि मैंने उसका अनुभव किया है। मैंने उसकी क्रूरता, निरर्थकता और मूर्खता देखी है”। आज जबकि एक और अमेरिकी राष्ट्रपति ने मध्यपूर्व में एक और युद्ध शुरू कर दिया है, आइज़नहॉवर के इन शब्दों की सार्थकता समझ आती है। ट्रम्प की मूर्खता की बात करने से पहले यह याद रखना चाहिए कि दुनिया में एक और युद्ध भी चल रहा है। चार साल पहले रूस ने युक्रेन पर हमला किया था। अनुमान है कि दोनों तरफ़ से मारे गए की संख्या 500000-600000 के क़रीब है। घायल लाखों में है। युक्रेन छोटा है […]

बेमतलब, बेमक़सद युद्ध, Point Less, Aimless War

March 4, 2026 Chander Mohan 0

हर युद्ध का कोई मतलब होता है, कोई लक्ष्य होता है। हाल में रूस ने युक्रेन पर जो युद्ध शुरू किया है उसका मक़सद उस क्षेत्र पर क़ब्ज़ा करना है जिस में रूसी बोलने वाले लोग रहतें हैं और जो रूसी साम्राज्य का हिस्सा रहा है। अमेरिका ने भी जब जब विभिन्न देशों पर हमले किए तो इसका औचित्य समझाने की कोशिश की थी। वियतनाम पर हमला कम्युनिस्टों को ख़त्म करने के लिए किया। इराक़ पर हमला इसलिए किया गया क्योंकि, अमेरिका के अनुसार, सद्दाम हुसैन के पास सामूहिक विनाश के हथियार थे। सद्दाम मारा गया पर यह कथित हथियार नहीं मिले क्योंकि यह थे ही नही। अफ़ग़ानिस्तान पर हमला ‘आतंक को ख़त्म करने के लिए’ किया गया। हाल ही […]

ममदानी की जीत और उषा की हार, Victory Of Mamdani And Setback For Usha

November 13, 2025 Chander Mohan 0

न्यूयार्क एक अद्भुत शहर है। दुनिया के करोड़ों लोगों के लिए यह सपनों का शहर है,जहां सपने पूरे भी होतें है। जनसंख्या 90 लाख के क़रीब है। प्रति परिवार वार्षिक आमदनी 75000डालर है। केवल आठ देश, अमेरिका,चीन,जर्मनी,जापान,भारत, फ़्रांस,यूके और इटली हैं जिनकी जीडीपी न्यूयार्क की 2.37 डालर की जीडीपी से अधिक है। न्यूयार्क का बजट 116 बिलियन डॉलर है। इसके मुक़ाबले हमारे सबसे बड़े शहर मुम्बई का बजट 8.9 बिलियन डॉलर (74.427 करोड़ रूपए) है। यहाँ 350000 करोड़पति हैं जिनमें सबसे प्रसिद्ध (या अप्रसिद्ध) डानल्ड ट्रम्प हैं ! न्यूयार्क में 32 लाख लोग ऐसे रहतें हैं जिनका जन्म अमेरिका से बाहर हुआ है। शहर की आबादी का केवल 31% व्हाइट है। बाक़ी अश्वेत, अफ्रीकी, एशियन या दक्षिण अमेरिका के हिसपैनिक […]