टीकाकरण : उपलब्धि और शंकाएँ, Vaccine : Achievement And Doubts

January 21, 2021 Chander Mohan 0

16 जनवरी 2021 का दिन एतिहासिक रहेगा। ‘सर्वे भवन्तु सुखिन:, सर्वे सन्तु निरामया:’ के श्लोक के साथ भारत में कोरोना के सबसे बड़े टीकाकरण अभियान का आग़ाज़ किया गया। इसे हम अंत की शुरूआत भी कह सकतें हैं।कुछ कमज़ोरियाँ रह जाऐंगी, कुछ ग़लतियाँ होंगी, यहां कुछ घपलों की सम्भावना से भी इंकार नही किया जा सकता, पर यह अभियान हमारे वैज्ञानिकों, डाक्टरों और विशेषज्ञों की प्रतिभा, उनकी मेहनत और संकल्प  की महान उपलब्धि है। फ़्रंट लाइन वर्करस को भी सलाम ! कितने और देश हैं जो यह दावा कर सकतें हैं कि उन्होंने अपने लिए यह टीका बनाया है? चीन ने बनाया है पर उसकी क्षमता पर सवाल उठाए जा रहें हैं। पाकिस्तान हसरत से यहाँ बने टीके की तरफ़ […]

अमेरिका में अराजकता, दुनिया के लिए सबक़, Lesson From America

January 14, 2021 Chander Mohan 0

‘अमेरिका कभी भी बाहर से नष्ट नही होगा। अगर हम लड़खड़ाने लगे और अपनी आज़ादी खो बैठे तो इसका कारण यह होगा कि हमने ख़ुद को नष्ट कर लिया’ –अब्राहम लिंकन अमेरिका के 16वें  राष्ट्रपति की यह भविष्यवाणी 160 सालों के बाद 6 जनवरी को लगभग सही साबित हो गई जब अमेरिका के 45वें राष्ट्रपति डानल्ड ट्रंप के उकसाने पर एक भड़की हुई भीड़ ने अमेरिकी लोकतन्त्र की सबसे पावन संस्था, उनकी संसद, पर ही हमला बोल दिया। बेक़ाबू भीड़ से बचाने के लिए सांसदों, उपराष्ट्रपति समेत, को सुरक्षित स्थान पर ले जाना पड़ा। कुछ दंगाईयों ने कॉनफैडरेसी के झंडे उठाए हुए थे जिसने दास प्रथा समाप्त करने के विरोध में 1865 में युद्ध किया था, और अब्राहम लिंकन के […]

तिब्बत और ‘इतिहास की हिचकिचाहट’ Tibet And Hesitations of History

January 7, 2021 Chander Mohan 0

एक महत्वपूर्ण  क़दम उठाते हुए अमेरिका के राष्ट्रपति डानल्ड ट्रंप ने उस क़ानून पर हस्ताक्षर कर दिए हैं जो तिब्बतियों के महामहिम दलाई लामा के उत्तराधिकारी के चुनने के अधिकार  की पुष्टि करता है,और  बीच में चीन के किसी प्रकार के दखल का विरोध करता है। बीजिंग ने अमेरिका के इस क़ानून का कड़ा विरोध किया है और उसे अपने ‘आंतरिक मामले’ में दखल क़रार दिया है। तिब्बती परम्परा के अनुसार दलाई लामा अवतार लेतें हैं, पर यह कौन होगा इसकी तलाश बौद्ध परम्परा के अनुसार की जाती है। सितम्बर 2011में दलाई लामा ने अगले दलाई लामा के चयन के बारे स्पष्ट दिशा निर्देश दे दिए थे ताकि किसी प्रकार की शंका या धोखा न हो। चीन यह मानने के […]

2020 बहुत बर्बाद कर गया, पर बहुत कुछ समझा भी गया 2020 Shadow on 2021

December 31, 2020 Chander Mohan 0

जब बीते साल की तरफ़ मुड़ कर देखता हूँ तो गाने की यह पंक्ति याद आजाती है, ‘जग सूना सूना लागे, जग सूना सूना लागे’। 2020 वह साल था जिसकी कोई आत्मा नहीं थी। कोई उपलब्धि नही थी, अगर थी तो यह कि हम बच गए! यह साल ज़िन्दगी की नाजुकता समझा गया। यह सबसे अशांत और विघटनकारी वर्ष था जिसमें बचे रहना ही मक़सद था। याद ही नही रहा कि कब किससे हाथ मिलाया था, या कब किसे गले लगाया था। सब कुछ वॉटसअप हो गया! ज़िन्दगी की छोटी छोटी ख़ुशियाँ दुर्लभ हो गईं। अलगाववाद न्यू नार्मल बन गया। नया अछूतीकरण शुरू हो गया। ज़िन्दगी के पुराने तौर तरीक़े टूटे फटे नज़र आ रहें हैं। क्योंकि एक दूसरे का […]

कोरोना: जा रहा है, या आ रहा है ? Corona: Is it Going or Coming?

December 24, 2020 Chander Mohan 0

हम करोड़पति हो गए ! कोरोना के हमारे केस एक करोड़ को पार कर गए। हमारा नम्बर अमेरिका के बाद दूसरा है। लगभग डेढ़ लाख लोगों की मौत हो चुकी है, औसतन 400 मौतें रोज़ाना। लगभग 135 करोड़ की जनसंख्या (अमेरिका की 33 करोड़ ) को देखा जाए तो हमारा प्रदर्शन बुरा नही है। यहाँ  मौत की 1.45 प्रतिशत की दर दुनिया में कम दरों में गिनी जाएगी।अगर हम अमेरिका तथा योरूप से तुलना करें तो बड़े देशों में हमारी कोरोना यात्रा सब से अच्छी रही है। अनिश्चितता, कमज़ोर नेतृत्व, और  निजी आज़ादी पर ज़रूरत से अधिक ज़ोर देने  के कारण पश्चिम के देश जो मानव जाति का पाँचवा हिस्सा है, ने लगभग आधे केस पैदा किए हैं। अब तो […]

विनाश काले विपरीत बुद्धि Madness in Bengal

December 17, 2020 Chander Mohan 0

यूनानी नाटककार युरीपाइडिस जो ट्रैजिडी लिखते थे ने लिखा है, ‘जिन्हें देवता नष्ट करना चाहें उन्हें वह पहले पागल बना देते हैं’। अपनी देसी भाषा में हम इसे ‘विनाश काले विपरीत बुद्धि’ भी कह सकतें हैं। जिस तरह उनके पश्चिम बंगाल के दौरे के दौरान भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा के क़ाफ़िले पर हमला किया गया,उसे करवाने वालों की मति भ्रष्ट होने के सिवाय और क्या कहा जाएगा? पत्थरों और ईंटों से उनके क़ाफ़िले पर हमला किया गया और पुलिस मूक दर्शक बनी रही। मुख्यमंत्री ममता बैनर्जी की प्रतिक्रिया कि यह सब नौटंकी है, बताती है कि राजनीतिक हिंसा को वह कितना हल्का लेती हैं। यह बहुत कड़वा और दुर्भाग्य पूर्ण सत्य है कि राजनीतिक हिंसा बंगाल की राजनीति का हिस्सा […]