‘जय बांग्ला’ या ‘सोनार बांग्ला’ ?, The Bengal Elections

March 4, 2021 Chander Mohan 0

चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी के चुनाव की घोषणा कर दी है पर जहाँ सब चुनाव अपना अपना महत्व रखतें हैं पश्चिम बंगाल का चुनाव विशेष महत्व और चिन्ता देता है। इसके चार बड़े कारण हैं। एक, ममता बैनर्जी का अपना विशेष जुझारू व्यक्तित्व है। वह स्ट्रीट फाइटर हैं और उन्हें सुर्ख़ियों में बने रहना आता है। दूसरा, भाजपा के नेतृत्व ने इस चुनाव को प्रतिष्ठा का प्रश्न बनाया हुआ है और भाजपा की तीनों प्रमुख तोपें, प्रधानमंत्री मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, और पार्टी अध्यक्ष जे पी नड्डा वहाँ लगातार गर्ज रहीं हैं। तीसरा, राज्य का हिंसक राजनीतिक इतिहास है। और चौथा, यह चुनाव देश की भावी राजनीति को तय करेगा। पश्चिम बंगाल के 2016 […]

असुरक्षा की यह भावना क्यों है? Why This Insecurity?

February 25, 2021 Chander Mohan 0

वैसे तो यह तय माना जाता है कि जिसकी सरकार हो स्थानीय निकाय पर उसी का क़ब्ज़ा होता है पर फिर भी पंजाब के स्थानीय चुनाव में कांग्रेस के पक्ष में जिस तरह एकतरफ़ा परिणाम आया है और भाजपा को होलसेल रद्द कर दिया गया है, वह हैरान करने वाला है। हम एक प्रकार से भाजपा मुक्त पंजाब देख रहें हैं जहाँ कांग्रेस को लगभग 70 प्रतिशत सीटें मिली हैऔर भाजपा 2 प्रतिशत वार्ड में ही जीत सकी है। मुक्तसर, जहाँ अधिकतर भाजपा उम्मीदवारों को 20 से भी कम वोट मिलें हैं, की मिसाल हालत बयान करती है। 22 में से 10 जिंलों में भाजपा शून्य नही तोड़ सकी। इसका असर अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में देखने को […]

टीकाकरण : इंतज़ार किस का है? , Vaccination: Waiting for what?

February 18, 2021 Chander Mohan 0

पिछले सप्ताह मैंने कोविड-19 की वैक्सीन कोवीशील्ड का पहला टीका लगवा लिया है।यह टीका जालन्धर के सिविल अस्पताल में लगाया गया। 28 दिन के बाद टीके की दूसरी डोज़ लगेगी। यह सारी कहानी इसलिए बता रहा हूं क्योंकि आज भी बहुत लोग टीका लगवाने से घबरा रहें हैं। एक दूसरे कि तरफ़ देखा जा रहा है कि इसका कोई साइड इफैक्ट अर्थात बुरा असर तो नही है? मुझे भी सावधान किया गया था। कईयों का कहना था कि भारत में बनी वैक्सीन से फाइज़र या स्पुटनिक अधिक प्रभावी हैं इसलिए इनकी इंतज़ार करनी चाहिए। लेकिन मेरा अपनी स्वास्थ्य व्यवस्था पर भरोसा है इसलिए मैंने कोवीशील्ड का टीका लगवाया है। अगर डा. हर्ष वर्धन या डा. रणदीप गुलेरिया जैसे लोग कह […]

लंगर का वरदान, The Blessings of Langar

February 11, 2021 Chander Mohan 0

सन् 1569 की बात है। दिल्ली से लाहौर जाते समय बादशाह अकबर गोईंदवाल साहिब तीसरे सिख गुरू अमर दास जी से मिलने पहुँचे। उन्होंने गुरूजी की बहुत ख्याति सुनी थी इसलिए उन्हें मिलने के लिए गोईंदवाल साहिब रूक गए। अकबर को दूसरे धर्मों के बारे बहुत दिलचस्पी थी इसलिए गुरू अमर दास के साथ वह वार्तालाप चाहते थे। उनके साथ राजा हरिपुर भी थे। लेकिन वार्तालाप से पहले गुरूजी ने बादशाह और राजा को लंगर में पंगत में  बैठा दिया जहाँ सबको जाति, धर्म, स्तर या वर्ग की भिन्नता के बिना एक साथ सादा भोजन करवाया जाता था। बादशाह भी तैयार हो गए और शायद पहली बार उन्होंने आम लोगों के साथ बैठ कर भोजन किया था। अकबर लंगर की […]

न सरकार का सर झुके, न किसान की पगड़ी, Farmers Protest: Both Need To Step Back

February 4, 2021 Chander Mohan 0

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का कहना है कि किसान नेताओं के साथ 22 जनवरी को हुई अंतिम वार्ता में सरकार ने डेढ़ वर्ष तीन कृषि क़ानूनों को न लागू करने की जो पेशकश की थी, उस पर सरकार आज भी क़ायम है। सरकार ने तब यह प्रस्ताव भी रखा था कि किसानों की बाक़ी माँगें, विशेष तौर पर एम एस पी, पर विचार करने के लिए कमेटी बनाई जाएगी। सरकार की यह पेशकश काफ़ी उदार थी और इन क़ानूनों को ठंडे बस्ते में डालने के बराबार थी। ज़्यादा से ज़्यादा किसान संगठन डेढ़ वर्ष की अवधि को दो या तीन वर्ष तक बढ़ाने का सुझाव दे सकते थे, तब तक अगले चुनाव आ जाते और मामला लटक जाता। 26 जनवरी और […]

नियंत्रण से बाहर होता किसान आन्दोलन, Kisan Agitation Goes Out of Control

January 28, 2021 Chander Mohan 0

गणतन्त्र दिवस पर दिलली की घटनाएँ बहुत विचलित करने वाली हैं। जो किसान आन्दोलन अपनी शान्ति और व्यवस्था के लिए दुनिया के लिए मिसाल था, अचानक नियंत्रण से बाहर हो गया। न केवल बैरिकेड तोड़े गए बल्कि अनुशासन  में रहने के वादे भी तोड़ दिए गए। जिन मार्ग पर जाने का वादा किया था उन्हें छोड़ते हुए दिलली में घुस गए। आन्दोलन पर किसी का नियंत्रण नही रहा। संयुक्त किसान मोर्चे के नेता जो रोज़ टीवी पर नज़र आते थे, ग़ायब हो गए क्योंकि  कोई उनकी सुन नही रहा था। लेकिन ज़िम्मेवारी तो उनकी बनती है। जब ट्रैक्टर मार्च के लिए हज़ारों किसानों को राजधानी में इकट्ठा किया  गया तो यह सम्भावना तो सदैव थी कि कुछ नियंत्रण से बाहर […]