‘चिट्टा’: पंजाब की काली हकीकत, Chitta: The Black Reality of Punjab

October 22, 2026 Chander Mohan 0

यह एक घटना सारे पंजाब को सन्न छोड़ गई। यह तो सब जानते हैं कि नशा जिसे पंजाब में ‘चिट्टा’ कहा जाता है, पंजाब का यथार्थ है, हकीकत है। थोड़ा बहुत नशा तो हर समाज में प्राचीन काल से है, पर पंजाब में इसके लिए दरवाज़े 2007 में खोल दिए गए जब लाल बत्ती वाली कारों में भी नशा लाया जाता रहा। यह आरोप मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भी लगाया है। उस समय पंजाब में अकाली-भाजपा गठबंधन सरकार थी। जब अमरेन्द्र सिंह की कांग्रेस सरकार बनी तो उन्होंने चार सप्ताह में नशा ख़त्म करने की शपथ ली थी पर किया कुछ नही। आप की सरकार ने भी नशा ख़त्म करने का वादा किया था। पंजाब में युद्ध नशेयां विरुद्ध’ चलाया […]

संस्थानों का कमज़ोर पड़ जाना, The Troubling Decline Of Institutions

October 15, 2026 Chander Mohan 0

हमारा चुनाव आयोग एक समय दुनिया के लिए मिसाल था कि चुनाव कैसे करवाए जातें हैं और लोगों के वोट के अधिकार को कैसे सुरक्षित रखा जाता है। अंतराष्ट्रीय मंचों पर चुनाव करवाने में इसे एक प्रकार का गोल्ड स्टैंडर्ड समझा जाता था कि भारत जैसे विशाल और जटिल लोकतंत्र में भी किस तरह निष्पक्ष, आज़ाद और ज़बरदस्त चुनाव करवाए जाते है। कई देशों से हमारे चुनाव आयोग को अपने चुनाव की देखरेख करने के लिए बुलाया जाता था। हमारे कई चुनाव आयुक्तों को तो रोल मॉडल समझा जाता रहा। विशेष तौर पर टी एन शेषन की बहुत इज़्ज़त रही है, यहाँ तक कि पाकिस्तान में भी उनके प्रशंसक थे कि किस तरह वह निष्पक्ष चुनाव करवाने में किसी की […]

राहुल गांधी नहीं तो और कौन, The Importance Of Rahul Gandhi

October 8, 2026 Chander Mohan 0

कांग्रेस कार्यकारिणी की हालिया बैठक में राहुल गांधी ने बहुत दिलचस्प टिप्पणी की है। उनका कहना था कि पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेता उन पर भरोसा नहीं करते और उनका पूरा साथ नहीं देते। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के साथ एक बैठक के दौरान उन्होंने महसूस किया कि दोनों समझतें हैं कि अगर भाजपा सत्ता से बाहर होती है तो जगह कांग्रेस ही लेगी। तब राहुल गांधी ने अपने ही नेताओं से सवाल किया, “जब देश के शीर्ष नेतृत्व को यह यकीन है कि कांग्रेस सत्ता में वापिसी करेगी तो पार्टी के अंदर कुछ नेताओं को ‘वोट चोरी’ या चुनावी सूची से जुड़े अभियान पर अब तक भरोसा क्यों नहीं था”? राहुल गांधी की […]

चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता का सवाल है, ECI Has Huge Credibility Problem

October 1, 2026 Chander Mohan 0

चुनाव आयोग के आंतरिक कामकाज पर इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्टर रीतिका चोपड़ाकी विस्फोटक रिपोर्ट के तीन दिन के बाद चुनाव आयोग ने बैठक कर प्रेस रिलीज़ द्वारा कुछ स्पष्टीकरण देने का प्रयास किया है जिससे नए सवाल उठ खड़े हुए हैं। बेहतर होता कि आयोग के तीनों सदस्य संयुक्त तौर पर पत्रकार सम्मेलन कर सभी शंकाओं को दूर करने का प्रयास करते पर ऐसा नहीं किया गया। उलट यह प्रभाव जा रहा है कि आयोग रक्षात्मक है। लोकतंत्र चुनाव प्रक्रिया की स्वतन्त्रता और चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर आधारित है। पार्टियां जीतती रहेंगी, हारती रहेंगी पर अगर वह उच्च संस्था जो चुनाव करवाती है, अपनी विश्वसनीयता खो बैठती है तो सारी चुनाव प्रक्रिया शंका के घेरे में आजाएगी। चुनाव आयोग […]

दिल्ली बेदिल क्यों है? Why Dilli has no Dil ?

September 24, 2026 Chander Mohan 0

रिसर्चर बताते हैं कि दिल्ली में कम से कम 18 साम्राज्य रहें हैं जिनके अवशेष दिल्ली में बिखरे पड़े हैं। शायद यही कारण है कि आज तक इसकी कोई एक पहचान नहीं है जैसे कोलकाता या मुम्बई की है। इस महानगर ने वह क्रूरता देखी है जो दूसरे शहरों ने नहीं देखी। बार बार यह गिराई गई और दोबारा से खड़ी हुई। दिल्ली ने कभी किसी की परवाह नहीं की। न बादशाह की, न वायसराय की, न राजनेता की। शायर ने सही कहा है, पगड़ी सम्भालियेगा, यह कोई और बस्ती नहीं दिल्ली है। ग़रीबों और आम आदमी के हित को कुछ नहीं समझा। भयानक दंगे यहां होते रहते है। प्रवासियों को जरूर जगह दी गई पर उनके कल्याण की चिन्ता […]

ब्रिक्स और बेहाल दुनिया, BRICS And Troubled World

September 17, 2026 Chander Mohan 0

नई दिल्ली के भव्य भारत मंडपम में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में सर्वसम्मति से घोषणा पत्र अपनाया गया। लगता है कि जो लज़ीज़ शाकाहारी भोजन परोसा गया वह काम कर गया! रूस-यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया में भीषण टकराव, भारत और चीन के बीच मतभेद, यूएई और ईरान के बीच ड्रोन और मिसाइल हमले, और व्हाइट हाउस में बैठे डानल्ड ट्रंप की चिढ़ के बीच आम सहमति बनाना भारतीय कूटनीति की बड़ी सफलता है। वैसे हैरान भी नहीं होना चाहिए क्योंकि हमारा सदियों का कूटनीतिक अनुभव है। बड़ा संदेश अमेरिका के लिए है कि मनमाने टैरिफ़ और प्रतिबंध का विरोध हो रहा है। विश्व व्यवस्था में पश्चिम का विकल्प भी खड़ा हो सकता है। 140 पैराग्राफ़ वाले साँझे बयान में पिछले साल […]