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About Chander Mohan
Chander Mohan is the grandson of the legendary editor of Pratap, Mahashya Krishan. He is the son of the famous freedom fighter and editor, Virendra. He is the Chief Editor of ‘Vir Pratap’ which is the oldest hindi newspaper of north west india. His editorial inputs on national, international, regional and local issues are widely read.

Where Everyone Is an Apostate

January 24, 2019 0

Pak PM Imran Khan does not leave any occasion to rile India. Recently the controversy about actor Naseeruddin Shah’s expressed fear regarding the safety of his children in India has given IK another excuse to criticise India saying minorities are not given equal treatment here. But what about his own country? Jinnah might have said that that all will be treated equally in his new country but fact remains that at the time of partition there was  23 percent minority in Pakistan now it’s down to 3 percent. Imran Khan sahib what happened to them ? The answer is that they either fled, or were killed or converted.Many minority women have been killed.  A Pakistani politician has acknowledged that converting […]

“मैं भी काफिर, तूं भी काफिर” (We are all Kafirs)

January 24, 2019 0

इमरान खान साहिब आजकल हमसे कुछ अधिक चिढ़े हुए हैं। भारत को चुभाने का वह कोई भी मौका जाने नहीं देते। वह एक दिवालिया सरकार के मुखिया हैं और धीरे-धीरे समझ आ रही है कि अगर पाकिस्तान ने डूबने से बचना है तो भारत के साथ व्यापार शुरू करना होगा जिसके लिए बेहतर संबंधों की जरूरत है। इसीलिए कभी कहते हैं कि  ‘अगर भारत एक कदम आगे आएगा तो हम दो कदम आगे आएंगे’, ‘भारत के साथ संबंधों को लेकर मैं और सेना एक ही पेज पर हैं,’ आदि। लेकिन भारत की तरफ से सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं हो रही इसीलिए बहुत चिढ़चिढ़े हो गए हैं। भारत पर फिर ज़हर उगलने का मौका उन्हें अभिनेता नसीरुद्दीन शाह की उस टिप्पणी से […]

Will Pakistan Behave?

January 17, 2019 0

These days we are hearing some positive voices from  inside Pakistan regarding India. Imran Khan has also said that dealing with Mumbai attack of 26/11 is in their interest. His interesting comment is that “we should do something about it “. It remains to be seen whether he can do this ‘something’.  Many sane media voices there are also saying that burying the hatchet is in Pakistan’s interest. There is also speculation in Pakistan about revival of Manmohan Singh -Musharraf formula. Bloomberg has written that among those who are in favour of better relations with India is Gen. Bajwa. Should we catch these positive signals from Pakistan? Conceding that better relations are in the interest of both countries much will […]

क्या पाकिस्तान बंदा बनेगा?

January 17, 2019 0

पाकिस्तान के अंदर से आजकल भारत के प्रति कुछ सकारात्मक आवाज़ें निकल रही हैं। वज़ीर-ए-आज़म इमरान खान ने भी कहा है कि मुंबई पर 26/11/2008 के हमले के मामले से निपटना पाकिस्तान के हित में है। उनका कहना था कि  “हम भी चाहते हैं कि मुंबई पर बमबारी करने वालों के बारे कुछ किया जाए।“  इमरान खान साहिब यह “कुछ” कर सकेंगे या नहीं यह तो समय ही बताएगा, पर यह पहली बार है कि पाकिस्तान के शिखर पर किसी ने मुंबई के हमले में संलिप्तता स्वीकार की है और उसे आतंकी घटना बताया है। पाकिस्तान के पत्रकार हमीद मीर को आशा है कि नए साल में आतंक का अंत होगा और “दिल्ली से पेशावर, पेशावर से काबुल और काबुल […]

अबकी बार किस की सरकार? (Whose Government This Time?)

January 10, 2019 0

‘चोर’ – ‘चोर’ ,  ‘झूठा’ – ‘झूठा’ ,  ‘इस्तीफा दो’ – ‘इस्तीफा दो ‘। हम भारत के लोकतंत्र का जलूस निकलता देख रहें हैं। संसद में कागज़ के विमान चल चुके हैं गनीमत है कि अभी तक मामला धक्का-मुक्की या मार-पिटाई तक नहीं पहुंचा। पहले लोकसभा अध्यक्षों की ही तरह वर्तमान अध्यक्षा भी अराजक तत्वों के सामने बेबस नज़र आतीं हैं। बहुत पहले गद्दर पार्टी के नायक लाला हरदयाल ने ठीक ही कहा था कि  ‘पगड़ी अपनी संभालिएगा मीर, और बस्ती नहीं यह दिल्ली है!’   दिल्ली किसी की सगी नहीं। लेकिन दिल्ली में क्या होता है इसकी कहानी 555 किलोमीटर दूर लखनऊ में भी लिखी जा रही है जहां बुआ-भतीजे का गठबंधन हो रहा है। उत्तर प्रदेश देश को 80 […]

आकस्मिक और लाचार प्रधानमंत्री (Accidental and Ineffective PM)

January 3, 2019 0

वैसे तो देश में कई  ‘एक्सिडैंटल’  अर्थात आकस्मिक प्रधानमंत्री रहें हैं। सबसे प्रमुख नाम इंदिरा गांधी का है। अगर शास्त्रीजी का ताशकंद में देहांत न होता तो देश का राजनीतिक इतिहास ही कुछ और होता। न तब इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री बनती और न ही दशकों एक परिवार का शासन रहता। सोनिया गांधी खुद प्रधानमंत्री क्यों नहीं बनी यह भी रहस्य की बात है क्योंकि वह पहले 1999 में प्रधानमंत्री बनने की महत्वकांक्षा प्रदर्शित कर चुकी थीं पर मुलायम सिंह यादव ने अडिंग़ा दे दिया। शायद इसी अनुभव को याद रखते हुए उन्होंने महत्वकांक्षाविहीन डॉ. मनमोहन सिंह को 2004 में प्रधानमंत्री घोषित कर दिया था। तब सोनिया गांधी की ‘कुर्बानी’ का बहुत प्रचार किया गया लेकिन बाद में स्पष्ट हो गया […]

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