• Author with Sh. Atal Bihari Vajpayee

अब लड़ाई सीधी : मोदी बनाम राहुल? (The Big Fight: Modi Vs. Rahul)

July 26, 2018 0

पहले विश्वासमत पर बहस के दौरान और फिर कार्यकारिणी की बैठक के बाद कांग्रेस ने स्पष्ट कर दिया कि वह चुनावी लड़ाई नरेन्द्र मोदी बनाम राहुल गांधी बनाना चाहते हैं। वर्तमान तथा भावी साथियों सब को संदेश दिया गया कि जहां पार्टी प्रादेशिक स्तर पर गठबंधनों के लिए तैयार है वहां सरकार बनाने की स्थिति में केवल राहुल गांधी ही प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार होंगे। अर्थात ममता बैनर्जी, मायावती, शरद पवार या चंद्रबाबू नायडू जैसे नेताओं को बड़ी कुर्सी पर बैठाने की महत्वकांक्षा नहीं पालनी चाहिए। अगर नरेन्द्र मोदी हटेंगे तो राहुल गांधी ही वहां बैठने के लिए उपयुक्त नेता हैं, ऐसा कांग्रेस का संदेश है। कांग्रेस देश की सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी है। लगभग पूरे देश में वह फैली […]

United States of India

April 5, 2018 0

 विपक्ष का सर्कस शुरू हो गया है। नेता जगह-जगह इकट्ठे हो रहे हैं। ममता बैनर्जी विशेष तौर पर रिंग मास्टर बनना चाहतीं है। कई नेताओं जिनमें सोनिया गांधी भी शामिल है, से वह मिल चुकी हैं। सर्कस की तरह ट्रपीज़ पर चंद्र बाबू नायडू जैसे इधर से उधर झूल रहे हैं। कई और झूलने की तैयारी में है। जब से भाजपा गोरखपुर तथा फूलपुर में बुरी तरह से पिटी है तब से यह प्रभाव फैल गया कि इसे हराया जा सकता है। वह अजेय नहीं रही। तर्क गलत भी नहीं। पिछले चुनाव में भाजपा को मात्र 31 प्रतिशत वोट पर ही बहुमत मिल गया था क्योंकि बाकी 69 प्रतिशत बिखरा हुआ था। 2014 में भारी कांग्रेस विरोधी तथा मोदी पक्षीय […]

निराले देश में बेतुकी बहस (Irrelevant Discussion in Wonderful Country)

December 7, 2017 0

अटल बिहारी वाजपेयी ने एक बार कहा था कि  ‘यह अद्भूत निराला देश है। आप यहां एक पत्थर को भी तिलक लगा कर उसे पूज सकते हैं।‘ यह हमारी ताकत है। यहां एक निर्धारित धार्मिक व्यवहार नहीं है हमारा धर्म यह आजादी देता है। पर सार्वजनिक क्षेत्र से धर्म को अलग रखा गया है। सरकारी कामकाज और चुनावों में धर्म के इस्तेमाल पर प्रतिबंध है। लेकिन ऐसा ही आजकल हो रहा है। मामला गुजरात के चुनाव से संबंधित है और मुद्दा राहुल गांधी का धर्म है। जबसे सोमनाथ मंदिर में किसी ने राहुल गांधी का नाम गैर-हिन्दुओं के लिए रखे गए एंट्री रजिस्टर में दर्ज करवा दिया तब से उनके धर्म तथा आस्था को लेकर सवाल किए जा रहे हैं। […]

पप्पू ‘पप्पू’ न रहा (Pappu No Longer Pappu)

November 23, 2017 0

चुनाव आयोग ने गुजरात में भाजपा के राहुल गांधी को मज़ाक में ‘पप्पू’ कहने वाले टीवी विज्ञापन को मंजूरी नहीं दी। यह चुनाव आयोग की सोच है पर मेरा मानना है कि ‘पप्पू’ शब्द के इस्तेमाल पर कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए। अफसोस है कि हमारी राजनीति हास्य रहित नीरस बनती जा रही है। एक टीवी चैनल ने श्याम रंगीला का कॉमिक एक्ट हटा दिया था क्योंकि उसमें नरेन्द्र मोदी तथा राहुल गांधी की नकल उतारी गई थी। चाहिए तो यह था कि यह दोनों उस लड़के को उसकी प्रतिभा के लिए शाबाशी देते पर उलटा हो गया। गांधी जी को किसी ने उनका चित्र बना कर दिखाया तो हंसने लगे कि “मुझे नहीं मालूम था कि मैं इतना बदसूरत […]

द आइडिया ऑफ कांग्रेस (The Idea of Congress)

June 29, 2017 0

ऐसा आभास मिलता है कि कांग्रेस का संदूक खाली है। जो कुछ है वह पुराना और बेकार है। कोई नई विचारधारा नहीं, नई सोच नहीं, नई प्रतिभा नहीं और नए लोग नहीं। वही चले हुए कारतूसों के बल पर राजनीति की जा रही है। अगर कोई नई सोच होती तो राष्ट्रपति के पद के लिए मीरा कुमार को आगे न किया जाता। मीरा कुमार उस व्यवस्था की उपज है जिसने अपने विशेषाधिकारों के बल पर देश का खूब दोहन किया है। बाबू जगजीवन राम की बेटी कोई ‘दलित’ नहीं चाहे अब वह दलितों के संघर्ष की बात कह रहीं हैं। वह पीढ़ियों से वंचितों का प्रतिनिधित्व नहीं करती, उलटा उस वशिष्ठ वर्ग से संबंधित है जिसने अपनी स्थिति का फायदा […]

अखिलेश की सर्जिकल स्ट्राइक (Akhilesh’s Surgical Strike)

January 25, 2017 0

समाजवादी पार्टी में बाप और बेटे के दंगल में बेटे की निर्णायक विजय हुई है। अखिलेश अब बाप की जगह सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बन गए हैं। निश्चित तौर पर मुलायम सिंह ने अपने पुत्र की महत्वकांक्षा तथा क्षमता का सही आंकलन नहीं किया। अखिलेश ने बहुत पहले से अपनी रणनीति बनाई लगती थी और वह पार्टी के विभाजन के लिए पूरी तरह से तैयार थे जबकि मुलायम सिंह यादव अपने बदनाम सलाहकारों के बीच फंसे रहे। वह समझ बैठे थे कि ‘नेताजी’ के बिना समाजवादी पार्टी का कोई अस्तित्व नहीं। पर वह लाख समझें कि मैंने पार्टी बनाई और खड़ी की, जनता और पार्टी अब उनके साथ नहीं हैं। मानना पड़ेगा कि अखिलेश बहुत चुस्त निकले हैं। उन्हें अपने […]

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