जिन्हें नाज़ है हिन्द पर वो कहाँ है !, Where Are They Who Are Guardians Of India

January 12, 2023 Chander Mohan 0

10 साल बीत गए पर न स्थिति में परिवर्तन आया, न व्यवस्था ही सुधरी और न ही मानवीय संवेदना ही जागी। 16 दिसम्बर 2012 को राजधानी दिल्ली में चलती बस में निर्भया के साथ हैवानियत और बाद में उसकी मौत, से देश की आत्मा तड़प उठी थी। सख़्त क़ानून बनाया गया और समझा गया कि अब समाज में बदलाव आएगा। पर दस साल के बाद 31 दिसम्बर और 1 जनवरी की रात दिल्ली में ही जिस तरह ब्लैरो कार के नीचे 14-15 किलोमीटर  घसीट कर अंजलि सिंह मारी गई, से पता चलता है कि कुछ नहीं बदला। दिल्ली की सड़कें पहले की तरह असुरक्षित हैं, और शासक पहले की तरह बेदर्द और बेसुध हैं। न व्यवस्था बदली, न ही मानवीय […]

शी जीनपिंग और अनिच्छुक मछली, Covid Trouble For Xi Zinping

January 5, 2023 Chander Mohan 0

 वर्ष के अंत में एक अत्यंत महत्वपूर्ण घटना में चीन के राष्ट्रपति शी जीनपिंग जो खुद को एक प्रकार का आधुनिक सम्राट समझने लगे थे, के मज़बूत लगने वाले क़िले की कुछ ईंटें गिरनी तो कुछ खिसकनी शुरू हुई हैं। यह प्रक्रिया रूक जाती है या जारी रहती है, पर वैश्विक राजनीति का भविष्य टिका है। चीन एक सुपरपावर है जो शांत और भद्र नहीं है। वह आक्रामक और विध्वंसक महाशक्ति है। उसे यह छवि देने में शी जीनपिंग की बड़ी भूमिका रही है। वह माओ त्सी तुंग की तरह एकमात्र और सर्वोच्च नेता बनना चाहते है पर भूल गए कि दुनिया बदल गई है और चीन के लोग भी आज़ादी की हवा से अछूते नहीं है। हर ताकतवर नेता […]

मेरा हक़ है फ़सल-ए-बहार पर, 2023: Can We Hope For A Better Year

December 29, 2022 Chander Mohan 0

एक साल और गुजर गया। बाढ़, सूखा, महंगाई, असंतोष, बेरोज़गारी जो हर साल होती है उससे गुजरना पड़ा। युक्रेन में दस महीने से युद्ध चल रहा जिसका कोई अंत नज़र नहीं आता।   साल के अंत में चीन ने एक बार फिर दुनिया को आतंकित कर दिया है।  वहाँ शी जीनपिंग की बेवक़ूफ़ी के कारण कोविड तबाही मचाने जा रहा है। शमशानों के आगे लाइनें लगी हैं।  पहली बार  सरकार के खिलाफ सार्वजनिक प्रदर्शन हो रहें हैं। कोविड की पिछली लहरों और युक्रेन के युद्ध से परेशान दुनिया कुछ सम्भल रही थी कि चीन के नेतृत्व की नालायकी के कारण वह देश फिर मुसीबत का निर्यात करने जा रहा है। अगर वहाँ व्यापक स्तर पर तबाही होती है तो शी जीनपिंग […]

‘द शो मस्ट गो ऑन’, रंग कैसा भी हो, The Show Must Go On Whatever It’s ‘Rang’

December 22, 2022 Chander Mohan 0

मुम्बई फ़िल्म उद्योग जिसे बॉलीवुड भी कहा जाता है जनकल्याण में लगा कोई समाज सेवी संगठन नही है। यह ‘उद्योग’ है जिसे नफ़ा नुक़सान की चिन्ता है। समय समय पर वह समाज की भावना को ज़रूर व्यक्त करते रहें हैं। ‘यह दुनिया अगर मिल भी जाए तो क्या है’, जैसे गाने इंसान की परिस्थिति के सामने बेबसी को व्यक्त करते हैं। साहिर लुधियानवी की नज़्म ‘वो सुब्ह कभी तो आएगी’ बेहतर कल की उम्मीद जगाती है। अमिताभ बच्चन के ‘एंगरी यंग मैन’ व्यक्तित्व ने भी उस समय की भ्रष्ट व्यवस्था के खिलाफ आवाज़ बुलंद की थी। पर बीच बीच में बॉलीवुड भटकता भी रहा। माफिया के पैसे की संलिप्तता से लेकर ‘कास्टिंग कोच’ की शिकायतें मिलती रहीं।  लोगों की कमजोर […]

मोदी का मुक़ाबला नहीं, भाजपा का है , Modi is Invincible: Not So BJP

December 15, 2022 Chander Mohan 0

दिल्ली एमसीडी, गुजरात और हिमाचल प्रदेश के चुनाव परिणाम बतातें हैं कि 1. मोदी का मुक़ाबला नहीं पर भाजपा का है। मोदी ब्रांड सबसे बढ़िया अपने गृह प्रदेश में चलता है बाक़ी जगह चुनौती मिल सकती है। 2. आप राष्ट्रीय पार्टी बन सकती है पर राष्ट्रीय विकल्प अभी नही है। 3. अभी भी कांग्रेस ही विकल्प लगती है पर हिमाचल प्रदेश की जीत स्थानीय नेताओं के बल पर है। उन्होंने चुनाव स्थानीय मुद्दों पर केन्द्रित रखा। चाहे प्रियंका गांधी को ज़बरदस्ती श्रेय देने की कोशिश हो रही है पर हिमाचल कांग्रेस  का संदेश है कि वह गांधी परिवार के बिना भी जीत सकती है। जिस  दिल्ली में शीला दीक्षित ने 15 साल बढ़िया शासन दिया था वहां से कांग्रेस का […]

मैं निकला ओ गड्डी लेके !, Travelogue : of Dhabas, trucks and Nitin Gadkari

December 8, 2022 Chander Mohan 0

कोविड  के कारण दो साल बंद रहने के बाद अब देश में ट्रैवल की बाढ़ आ गई है। मैं भी अपवाद नहीं हूँ। जब मौक़ा मिलता है निकल जाता हूँ। इस बार जालन्धर से गुरुग्राम गाड़ी से जाने का फ़ैसला किया। पहले जालंधर से दिल्ली या गुरुग्राम जाना बहुत तकलीफ़देह था क्योंकि लुधियाना या अम्बाला या पानीपत जैसे शहरों को पार करना ही चुनौती होती थी। लेकिन अब यह इतना आसान हो गया है कि 2001 की मशहूर फ़िल्म, ग़दर -एक प्रेम कथा, के उदित नारायण द्वारा गाए  गाने को थोड़ा मोड़ते हुए कहा जा सकता है कि ‘ रब जाने कब गुजरा लुधियाना ओ कब जाने पानीपत आया!’ हाँ, मुटियार तो कोई नहीं मिली पर एक बंदा बहुत याद […]