भव्य त्रिमूर्ति, गांधी, नेहरू और पटेल, The Fabulous Three

November 6, 2025 Chander Mohan 0

कृतज्ञ राष्ट्र ने  सरदार बल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती एकता दिवस के तौर पर मनाई है। इस महान नेता ने 562 बड़ी-छोटी रियासतों, जिनका विभाजन से पहले के भारत के 40 प्रतिशत हिस्से पर शासन था, को भारत संघ के साथ मिलाया था। कई रियासत तो बहुत छोटी थीं पर समृद्ध हैदराबाद भी थी जो योरूप के अधिकतर देशों से बढ़ी थी और जिसका तब बजट बेल्जियम के बराबार था। ऐसा करते वकत उन्होंने साम दाम दंड भेद सब का इस्तेमाल किया था। जॉन ज़ुब्रज़ीकी जिन्होंने रियासतों के भारत में विलय पर किताब लिखी है, ने इसके लिए “पटेल के शक्तिशाली व्यक्तित्व, क्रोध के साथ सौम्यता और मिन्नत के साथ ज़बरदस्ती के मिश्रण” को ज़िम्मेवार ठहराया है। नेहरू और पटेल […]

इनके साथ, इनके बिना, इनके बावजूद, We Have To Walk Alone

May 29, 2025 Chander Mohan 0

आपरेशन सिंदूर से हमने पाकिस्तान को बड़ा सबक़ सिखाया है कि आतंकवाद की क़ीमत चुकानी पड़ेगी। रहीम यार ख़ान एयरबेस, सरगोधा तथा नूर खान एयरबेस पर बमबारी के बाद पाकिस्तान को समझ आगई कि मामला गम्भीर है। पर इन चार दिन का संक्षिप्त युद्ध हमें भी कई सबक़ सिखा गया है। एक, कि पाकिस्तान बाज़ नहीं आएगा, ऐसा टकराव फिर हो सकता है। इसीलिए आपरेशन सिंदूर भी स्थगित किया गया है, रोका नहीं गया। दूसरा, संकट की इस घड़ी में कोई बड़ा -छोटा देश, इज़राइल को छोड़ कर, हमारे साथ खड़ा नहीं था। एक भी नहीं। यह नई कूटनीतिक स्थिति है। हमें संयम का लेक्चर दिया गया और किसी ने भी पाकिस्तान प्रेरित आतंकवाद की स्पष्ट निंदा नहीं की। दुनिया […]

विपक्ष का भटकता कारवाँ और राहुल गांधी, Confused Opposition And Rahul Gandhi

March 13, 2025 Chander Mohan 0

मंज़िल जुदा जुदा है, मक़सद जुदा जुदा है,                भीड़ तो जमा है,यह कारवां नही 2024 के लोकसभा चुनाव, जहां इंडिया गठबंधन ने मिल कर भाजपा को बहुमत से नीचे रखा था, के परिणाम के बाद यह आशा जगी थी कि इंडिया गठबंधन अब नरेन्द्र मोदी की सरकार को ज़बरदस्त चुनौती देगा। पर जैसे जैसे समय बीत रहा है यह प्रभाव है कि सामंजस्य की कमी और गम्भीर मतभेदों के कारण यह गठबंधन भटक गया है और अप्रासंगिकता के कगार पर है। कई पर्यवेक्षक तो असामयिक मौत की बात कर रहें हैं। पहले हरियाणा और महाराष्ट्र के चुनाव परिणाम और फिर दिल्ली के चुनाव परिणाम के बाद यह नज़र आने लगा है कि न केवल यह गठबंधन बिखरने के कगार […]

भारत, बांग्लादेश और 15 अगस्त, India, Bangladesh And 15th August

August 15, 2024 Chander Mohan 0

वह भी एक 15 अगस्त था, 49 साल पहले। 1975 में स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी जब लालक़िले की सीढ़ियां चढ़ रहीं थी तो उन्हें एक चिट पकड़ाई गई, ढाका में बांग्लादेश के संस्थापक शेख़ मुजीबुर्रहमान, उनकी पत्नी,तीन बेटे और दो बहुओं की हत्या कर दी गई। हत्यारे बांग्लादेश के सैनिक थे जिन्हें बाद में फाँसी पर चढा दिया गया। शेख़ हसीना और उनकी छोटी बहन रेहाना योरूप में थी इसलिए बच गईँ। बाद में उन्हें नई दिल्ली में शरण दी गई और पंडारा रोड में एक मकान दे दिया गया। इंदिरा गांधी ने प्रणव मुखर्जी की ज़िम्मेवारी लगाई कि वह इन बहनों का ध्यान रखें। जब तक प्रणव मुखर्जी रहे यह रिश्ता चलता रहा। 5अगस्त को शेख़ हसीना […]

नीतीश-मुक्त बिहार चाहिए, Bihar Needs To Be Nitish-Mukt

February 8, 2024 Chander Mohan 0

कसमें खाने के बाद कि “मर जाना क़बूल है, उनके साथ जाना क़बूल नही”, नीतीश कुमार फिर ‘उनमे’ (एनडीए)  शामिल हो गए हैं। यह उनका पाँचवा पलटा है। 2013 में भाजपा द्वारा नरेन्द्र मोदी को पीएम का चेहरा घोषित करने का बाद वह एनडीए को छोड़ गए थे। 2015 का चुनाव उन्होंने राजद-कांग्रेस और वामपंथी दलों के साथ मिल कर लड़ा था। 2017 में लोकसभा चुनाव से पहले वह एनडीए में लौट आए थे। पाँच साल के बाद यह भाँपते हुए कि भाजपा उनकी जेडीयू का विभाजन करने की कोशिश कर रही है उन्होंने एनडीए को छोड़ कर राजद के साथ सरकार बना ली। और अब 2024 में लोकसभा के चुनाव से पहले राजद-कांग्रेस और वाम को एक तरफ़ फेंक […]

क्या संदेश? कौन संदेशवाहक? ,What Message? Who Messenger ?

September 7, 2023 Chander Mohan 0

  भारतीय जनता पार्टी और एनडीए दोनों इस मामले में स्पष्ट हैं कि उनका संदेश भी नरेन्द्र मोदी हैं और उनके संदेशवाहक भी नरेन्द्र मोदी ही हैं। किसी क़िस्म का कोई कंफ्यूजन नही है। सब कुछ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के व्यक्तित्व के इर्द-गिर्द ही है। और कोई नहीं। भाजपा की सारी उर्जा, कारगुज़ारी, नीति सबका नाम भी नरेन्द्र मोदी हैं। लगभग दो अवधि पूरी करने के नज़दीक नरेन्द्र मोदी की स्थिति बाक़ी वैश्विक नेताओं से अलग है। शासन विरोधी भावना जिसका सामना दूसरों को करना पड़ता है उनकी लोकप्रियता को कोई क्षति नहीं पहुँचा रही। हाल ही में इंडिया टुडे-सीवोटर ‘मूड ऑफ द नेशन’ सर्वेक्षण के अनुसार 52 प्रतिशत लोग महसूस करते हैं कि वह प्रधानमंत्री पद के लिए सबसे […]