यह हमारे ही बच्चे हैं, अपना ही यूथ है, They Our Kids, Our Youth

July 23, 2026 Chander Mohan 0

 महात्मा गांधी जिन्होंने अनशन को प्रसिद्ध किया था,ने इसके बारे बताया था कि यह कोई सामान्य राजनीतिक प्रक्रिया नहीं है, यह आध्यात्मिक और नैतिक अहिंसक हथियार है। उनका प्रयास अन्याय को पराजित करने के लिए विरोधी की अंतरात्मा को जगाना है। आज़ादी की लड़ाई के दौरान महात्मा जी ने 17-18 बड़े उपवास रखे थे और कई कम अवधि के उपवास थे। उनका सबसे प्रसिद्ध अनशन आज़ादी के बाद कोलकाता में था। हिन्दू -मुसलमान दंगों को रोकने के लिए उन्होंने 1सितम्बर 1947 को वहाँ अपना अनशन शुरू कर दिया था। अगले ही दिन से दोनों तरफ़ के दंगाईयों ने उनके पैरों पर अपने अपने हथियार रखने शुरू कर दिए। तीसरे दिन महात्माजी ने अपना अनशन समाप्त कर दिया था। इस पर […]

यह पार्ट-टाईम सियासत का टाईम नहीं है, No Time For Part Time Politics

November 20, 2025 Chander Mohan 0

बिहार में एनडीए की महा जीत और महागठबंधन की महा हार ने देश की राजनीति को बदल दिया है। पिछले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के बेहतर प्रदर्शन के बाद राहुल गांधी विपक्षी नेता बनने में सफल रहे थे। उसके बाद समझा गया कि विपक्ष के इंडिया गठबंधन में जान पड़ जाएगी। पर पहले महाराष्ट्र, फिर हरियाणा, फिर दिल्ली के बाद अब बिहार के चुनाव बता गए हैं कि भाजपा और एनडीए अपनी स्थिति मज़बूत करने में सफल रहें हैं जबकि कांग्रेस ऐसी जगह पहंच गई है कि उसकी प्रासंगिकता पर ही सवाल उठने लगे हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने तो भविष्यवाणी भी कर दी है कि आगे चल कर कांग्रेस का एक और विभाजन हो सकता है। बिहार में एनडीए को […]

वोट की आज़ादी, Independence Of Vote

August 14, 2025 Chander Mohan 0

आज़ाद भारत ने अपने लोगों को सबसे बेशक़ीमती चीज़ क्या दी है? किसी से भी पूछा जाए तो जवाब होगा, वोट। हम अधिकतर भारतीयों को आज़ादी के 78 साल बाद भी न काम का रोज़गार दे सके, न मकान दे सके, न ही बच्चों के लिए सही शिक्षा ही दे सके। कइयों को तो रोटी,कपड़ा और मकान की भी समस्या रहती है। ले दे कर उनके पास उनका वोट है जो उन्हें  हैसियत देता है, पहचान देता है, महत्व देता है और जो उन्हें पाँच साल के बाद बदला लेने की ताक़त देता है। इसी ताक़त का इस्तेमाल करते हुए उनहोने इंदिरा गांधी से एमरजैंसी का बदला लिया पर जनता पार्टी की सरकार की नालायकी को देखते हुए इंदिरा गांधी […]

जितनी आबादी उतना हक़ ? , Rights According To Population?

June 12, 2025 Chander Mohan 0

केन्द्रीय सरकार ने दो चरणों में जनगणना जिसमें जाति जनगणना भी शामिल होंगी, की घोषणा की है। उम्मीद है कि पूरी प्रकिया तीन साल में पूरी हो जाएगी। क्या परिणाम 2029 के चुनाव से पहले सामने आजाएगा,यह आने वाले समय का सबसे बड़ा प्रश्न होगा। जनगणना क्यों ज़रूरी है यह तो स्पष्ट ही है क्योंकि विकास आँकड़ों पर आधारित किया जाता है और मूलभूत आँकड़ा जनसंख्या और उसका स्वरूप है। इस बार आर्थिक स्थिति से जुड़ी जानकारी के अलावा धर्म और जाति के बारे भी जानकारी एकत्रित की जाएगी। यह जनगणना छ: साल की देरी से हो रही है। सरकार का बहाना था कि कोविड है पर कोविड 2023 के मध्य तक समाप्त हो चुका था। सरकार मामला लटकाती गई […]

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शशि थरूर: इधर या उधर, Whither Shashi Tharoor

June 5, 2025 Chander Mohan 0

आपरेशन सिंदूर अभी निलम्बित किया गया है पर उसे लेकर एक साइड स्टोरी शुरू हो गई है। अपना पक्ष रखने  के लिए जो प्रतिनिधि मंडल विदेश भेजे गए हैं उनको लेकर राजनीतिक तू तू मैं मैं शुरू हो गई है। विशेष तौर पर कांग्रेस के नेता शशि थरूर को एक महत्वपूर्ण डैलिगेशन का लीडर बनाए जाने पर कांग्रेस पार्टी सरकार और थरूर दोनों से खूब नाराज़ है। 1994 में पी. वी.नरसिम्हा राव ने जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र के मनावाधिकार सम्मेलन में भारत का पक्ष रखने के लिए विपक्ष के नेता अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल भेजा था ताकि यह संदेश जा सके कि सारा देश एकजुट है। इस बार वह समन्वय नहीं है। पर यह बहुत ज़रूरी है […]

विपक्ष का भटकता कारवाँ और राहुल गांधी, Confused Opposition And Rahul Gandhi

March 13, 2025 Chander Mohan 0

मंज़िल जुदा जुदा है, मक़सद जुदा जुदा है,                भीड़ तो जमा है,यह कारवां नही 2024 के लोकसभा चुनाव, जहां इंडिया गठबंधन ने मिल कर भाजपा को बहुमत से नीचे रखा था, के परिणाम के बाद यह आशा जगी थी कि इंडिया गठबंधन अब नरेन्द्र मोदी की सरकार को ज़बरदस्त चुनौती देगा। पर जैसे जैसे समय बीत रहा है यह प्रभाव है कि सामंजस्य की कमी और गम्भीर मतभेदों के कारण यह गठबंधन भटक गया है और अप्रासंगिकता के कगार पर है। कई पर्यवेक्षक तो असामयिक मौत की बात कर रहें हैं। पहले हरियाणा और महाराष्ट्र के चुनाव परिणाम और फिर दिल्ली के चुनाव परिणाम के बाद यह नज़र आने लगा है कि न केवल यह गठबंधन बिखरने के कगार […]