निहायत ही बेवक़ूफ़ आदमी है, Incredibly Stupid Man

March 3, 2022 Chander Mohan 0

रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने अपने सैनिक कमांडरों को परमाणु सिस्टम को तैयार रखने को कहा है। यूक्रेन में युद्ध अभी तक रूस के मुताबिक़ नही चल रहा। रूसी सेना किसी भी बड़े शहर पर क़ब्ज़ा नही कर सकी और यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की, जिन्होंने जान बचाने के लिए देश छोड़ने से इंकार कर दिया है, के नेतृत्व में यूक्रेन की सेना और लोग बराबर मुक़ाबला कर रहे हैं। दूसरी तरफ पश्चिम के देश लगातार प्रतिबंध बढ़ाते जा रहे हैं। रूस की अर्थव्यवस्था को भारी धक्का पहुँचा है। भारत सरकार की तटस्थ नीति सही है। हमें किसी का पक्ष नही लेना चाहिए और अपने लोगो, विशेष तौर पर स्टूडेंट्स को वहां से निकालने को प्राथमिकता देनी चाहिए। यूक्रेन मे भारतीय […]

हमारी समस्या यूक्रेन नही,चीन है Our Concern is China not Ukraine

February 24, 2022 Chander Mohan 0

यूक्रेन के संकट को लेकर दुनिया परेशान है। रूस कह तो रहा है कि उसका हमले का कोई इरादा नही पर यूक्रेन की सीमा पर उसके लगभग दो लाख सैनिक तैनात हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन लगातार कह रहे हैं कि रूस किसी भी समय हमला कर सकता है। यह टकराव दोनो बड़े नेता बाइडेन और पुतिन की प्रतिष्ठा का भी सवाल बन गया है। पुतिन बिना कुछ हासिल किए वापिस नही जा सकते और जो बाइडेन यह निश्चित करना चाहतें हैं कि रूस यहाँ से कुछ हासिल न कर सके। तीसरे बड़े नेता शी जिनपिंग की भी नजर इस टकराव पर है कि वह इस में से क्या फायदा उठा सकतें हैं? यहाँ पुतिन फँस गए लगतें है। […]

भारत-रूस, ढीली दोस्ती, India -Russia Weak Friendship

December 16, 2021 Chander Mohan 0

     एक समय था जब सोवियत यूनियन के नेता निकिता क्रुश्चेव ने भारत से कहा था ‘आप हिमालय से हमें आवाज़ लगाओ हम दौड़े चले आऐंगे’। इससे पहले सितम्बर 1959 में बीजिंग में एक तल्ख़ मुलाक़ात के दौरान क्रुश्चेव ने माओ जीडोंग पर आरोप लगाया था कि भारत के साथ झड़प और तिब्बत की स्थिति जिसके कारण दलाई लामा को तिब्बत छोड़ना पड़ा, के लिए पूरे तौर पर चीन ज़िम्मेवार है। क्रुश्चेव इतने नाराज़ हो गए कि अपनी सरकारी यात्रा बीच छोड़ बीजिंग से  लौट आए।  1962 के युद्ध के दौरान सोवियत यूनियन का झुकाव हमारी तरफ था। तब से लेकर अब तक स्थिति बहुत बदल चुकी है। शीतयुदध में पश्चिम के हाथो पराजित होने का बाद सोवियत यूनियन ही […]

क्या सुरंग के अंत में कोई रोशनी है? Is There Light At End of Tunnel?

September 10, 2020 Chander Mohan 0

चीन में उत्पन्न कोरोना वायरस से यहाँ भयावह स्थिति बन रही है। मरीज़ों का संख्या 45 लाख के नज़दीक पहुँच गई है। दैनिक मरीज़ों की संख्या 90000 के आसपास  है और शीघ्र हम लखपति बनने वाले हैं।दुनिया में हर तीसरा नया मरीज़ भारतीय है।  हम ब्राज़ील से आगे निकल चुकें हैं और अब केवल अमेरिका आगे रह गया है पर बड़ी जल्दी भारत महान उसे भी पछाड़ संक्रमण के शिखिर पर होगा। यह शिखिर क्या होगा और कब होगा कोई नही कह सकता। चाहे सरकार प्रतिवाद करती है पर नज़र आता है कि यहाँ कम्यूनिटी स्परैड है  अर्थात यह लोगों में फैल रहा है क्योंकि यह अब हर जगह से निकल रहा है। बचाव यह है कि शायद हमारी रोग […]

मास्को में 50 साल बाद (In Moscow after 50 years)

October 5, 2017 Chander Mohan 0

मैं पहली बार मई 1967 में मास्को गया था। मेरी उम्र तब 21 साल की थी। मैं नई दिल्ली में यूएनआई में ट्रेनिंग ले रहा था कि उस वक्त के जनरल मैनेजर और प्रतिष्ठित पत्रकार कुलदीप नैय्यर ने मुझे और प्रशिक्षण प्राप्त करने के लिए चैकोस्लोवाकिया की राजधानी प्राग भेजा था। पूर्वी जर्मनी (उस वक्त)तथा सोवियत यूनियन की यात्रा हमारे प्रशिक्षण का हिस्सा था। इसलिए इस जुलाई में जब वहां जाने का मौका मिला तो देखना चाहता था कि इन 50 वर्षों में क्या कुछ बदल गया? बहुत कुछ बदल गया। शीत युद्ध समाप्त हो गया, चैकोस्लोवाकिया के दो हिस्से हो चुके हैं और सोवियत यूनियन का पतन हो गया। 25 दिसम्बर, 1991 को वहां कम्युनिस्ट शासन समाप्त हो गया […]