वह बेबस नहीं आप बेबस न हों

December 10, 2014 Chander Mohan 0

वह बेबस नहीं, आप बेबस न हों कश्मीर में चार जगह आतंकी हमलों, जिनमें सेना के एक कैम्प पर फिदायीन हमला भी था, के बाद गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने जो बयान दिया है वह समझ नहीं आया। उनका जरूर कहना था कि हमले का मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा पर साथ में यह भी कहा है कि ‘अगर पाकिस्तान आतंकियों को रोकने में बेबस है तो हमें बताए, हम उनकी मदद करेंगे।’ पाकिस्तान ‘बेबस’ है? क्या गृहमंत्री वास्तव में समझते हैं कि भारत पर पाकिस्तान की जमीन से जितने भी हमले हुए हैं उनके बारे पाकिस्तान बेबस है, वह उन्हें रोकना चाहता था लेकिन रोक नहीं सका? हैरानी है कि भोले बादशाह भारत के गृहमंत्री एक प्रकार से पाकिस्तान को दोषमुक्त […]

कार्य संस्कृति कैसे बेहतर हो ?

December 5, 2014 Chander Mohan 0

कार्य संस्कृति कैसे बेहतर हो? चंडीगढ़ के पुलिस मुख्यालय पर छापे के दौरान उपमुख्यमंत्री सुखबीर बादल ने पाया कि तीन दर्जन अफसर वहां गैर मौजूद थे जिनमें 14 वरिष्ठ अधिकारी हैं। उपमुख्यमंत्री ने गैर हाजिर रहे पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश जरूर दिए लेकिन इस आदेश का बनेगा कुछ नहीं क्योंकि अतीत में भी ऐसे छापे मारे गए लेकिन गैर हाजिर अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। समय पर कार्यालय आना अनुशासन का पहला पाठ है। अगर इसके बारे ही लापरवाही की जाए तो पता चलता है कि हमारे सरकारी कार्यालयों का क्या हाल है? और यह केवल पंजाब में ही नहीं है। सारे देश में यह स्थिति है यहां तक कि केन्द्रीय सरकार में भी […]

इंडिया इज़ बैक !

December 2, 2014 Chander Mohan 0

इंडिया इज़ बैक! इतिहासकार रामचंद्र गुहा को नरेन्द्र मोदी में जवाहरलाल नेहरू की झलक नज़र आती है। वह लिखते हैं, ‘‘वह नेहरू जैकेट पहनते हैं, अपने कार्यालय में नेहरू की तस्वीर लगाते हैं और विदेश नीति पर नेहरू की तरह ही प्रत्यक्ष नियंत्रण रखते हैं।’’ यह तीनों बातें सही हैं। जवाहरलाल नेहरू की ही तरह नरेन्द्र मोदी अपने विदेश मंत्री भी हैं। लेकिन मोदी नेहरू नहीं हैं। नेहरू सिद्धांतों से जुड़े थे, मोदी व्यवहारिक हैं। मोदी नेहरू हो ही नहीं सकते क्योंकि दोनों की परिस्थिति भी अलग है। जवाहरलाल नेहरू के समय दुनिया दो हिस्सों में बंटी हुई थी इसलिए इस पचड़े में पडऩे की जगह नेहरू ने गुटनिरपेक्षता को अपना सिद्धांत बना लिया था। 1962 में चीन के आक्रमण […]