धार्मिक पर्यटन पर नियंत्रण चाहिए

July 10, 2013 Chander Mohan 2

धार्मिक पर्यटन पर नियंत्रण चाहिए क्या उत्तराखंड की तबाही रुक सकती थी? हम बादल फटने को रोक नहीं सकते, मूसलाधार लगातार बारिश को रोक नहीं सकते, भूस्खलन को रोक नहीं सकते पर निश्चित तौर पर  तबाही को कम कर सकते हैं। हमने अपने पहाड़ों के साथ पाप किया है जिसका खामियाजा हम भुगत रहे हैं। रोजगार तथा राजस्व के लिए विकास चाहिए लेकिन यहां अनियंत्रित विकास हो रहा है। जब सड़कें निकलती हैं, डैम बनाए जाते हैं, पहाड़ों से सुरंगे निकलती हैं, वन काटे जाते हैं, निर्माण होता है तो इसकी कीमत तो एक दिन चुकानी पड़ती है। उस क्षेत्र में 1978 में बाढ़ आई थी। फिर 27 वर्ष के बाद 2005 में बाढ़ आई। उसके बाद से तीन बड़ी […]

विनाश की राजनीति

July 5, 2013 Chander Mohan 3

विनाश की राजनीति गौरीकुंड के नजदीक हेलीकाप्टर दुर्घटना में वायुसेना, आईटीबीपी तथा एनडीआरएफ के 20 अफसर और जवान मारे गए। तंग वादियों और बादलों से घिरे ऊंचे पहाड़ों से लोगों को हेलीकाप्टरों से निकालने के लिए हमारे अफसर तथा जवान दिन-रात लगे रहे। एयर चीफ मार्शल एनएके बाऊन ने फंसे हुए लोगों से वायदा किया था कि वह एक-एक को वहां से निकालेंगे। यह वायदा लगभग पूरा हो गया है। हजारों निकाले गए। अभियान खत्म होने वाला था कि यह दर्दनाक हादसा हो गया। एयर चीफ मार्शल का फिर कहना है कि अभियान चलेगा जब तक हर व्यक्ति बाहर नहीं निकाला जाता। अपने सुरक्षा बलों के इस जज्बे को देश का सलाम! उनकी जवानी, उनकी बहादुरी, उनके संकल्प, उनकी देशभक्ति, […]

हिन्दी-जापानी भाई-भाई!!

July 4, 2013 Chander Mohan 9

हिन्दी-जापानी भाई-भाई!! प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की सफल जापान यात्रा से चीन असामान्य तौर पर उत्तेजित और अप्रसन्न हैं। हमें तो बताया गया कि चीनी प्रधानमंत्री ली कुचियांग की भारत यात्रा एक चमत्कार थी और ऐसे और चमत्कार भविष्य में भी होंगे पर जापान के नेताओं को ‘मामूली सेंधमार’ कहा जा रहा है जो भारत-चीन संबंधों में खलल डाल रहे हैं। चीन के प्रधानमंत्री की यात्रा से पहले लद्दाख में दोनों देशों की सेना के आमने-सामने आने पर चाइना डेली का कहना है कि अंतर्राष्ट्रीय मीडिया ने इसे बहुत बढ़ा-चढ़ा कर पेश किया पर दोनों देशों ने बहुत कम समय में इसका समाधान ढूंढ लिया। लेकिन यह ही तो मुद्दा है। ली ने अपनी पहली विदेश यात्रा के लिए भारत को […]

दिल बहलाने को ख्याल अच्छा है!

July 4, 2013 Chander Mohan 1

दिल बहलाने को ख्याल अच्छा है! नीतीश कुमार एनडीए छोड़ गए हैं। अपने ‘नरेंद्रभाई’ से अब उन्हें अलर्जी है। जब 2002 में गुजरात के दंगे हुए थे तो नीतीश कुमार एनडीए के रेलमंत्री थे। उस वक्त उन्होंने इस्तीफा नहीं दिया। बाद में भाजपा के साथ गठबंधन कर वे मुख्यमंत्री बन गए। कोई तकलीफ नहीं हुई। 2003 में उन्हें मोदी से गुजरात से बाहर निकलने का आग्रह किया पर अब अचानक इन्हीं मोदी को वे बर्दाश्त नहीं कर रहे। ऐसी पाखंडी हमारी राजनीति है। पूर्व के प्रांतो की शिकायत है कि वे पिछड़े हैं। पर अगर ‘बीमारू’ मध्यप्रदेश 2012-13 में देश में सर्वश्रेष्ठ विकास की दर 10.02 प्राप्त सकता है तो पूर्व के प्रदेश क्यों नहीं कर सकते? इसका कारण है […]

जमाना बेताब है करवट बदलने को!

July 4, 2013 Chander Mohan 0

जमाना बेताब है करवट बदलने को! भाजपा के भीष्म पितामह ने अपना अंतिम बाण चला दिया। उन्होंने इस्तीफ दे दिया। लेकिन वे भी देख रहे होंगे कि यह बाण कहीं लगा नहीं। मीडिया में हलचल के बावजूद पार्टी अब अपनी दिशा बदलने के लिए तैयार नहीं। संसदीय बोर्ड ने भी उन्हें मार्गदर्शन तथा सलाह देने का आग्रह किया है किसी ने यह नहीं कहा कि पितामह! बाणशैय्या से उठिए और 2014 के युद्ध में हमारा नेतृत्व कीजिए! भाजपा ने अपना भविष्य तय कर लिया है, और आडवाणी उसका हिस्सा नहीं हैं। इस जगह तक पार्टी को पहुंचाने में आडवाणीजी की बड़ी भूमिका है। भाजपा के जितने नेता हैं, नरेंद्र मोदी समेत, उन सबको एक प्रकार से उन्होंने उंगली पकड़ कर […]

आडवाणी : समाधान या समस्या?

July 4, 2013 Chander Mohan 11

आडवाणी : समाधान या समस्या? हाल ही में देश में जो राजनीतिक सर्वेक्षण हुए हैं वे तीन बातें स्पष्ट करते हैं। एक, कांग्रेस निरंतर गिर रही है। वोट प्रतिशत 10 प्रतिशत या अधिक गिर रहा है। दूसरा, भाजपा को उतना फायदा नहीं हो रहा है जितना कांग्रेस के पतन से होना चाहिए और तीसरा, भाजपा तब ही सरकार बनाने के नजदीक पहुंचेगी अगर नरेन्द्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया जाएगा। प्रधानमंत्री पद के भाजपा के जो दिल्ली वाले दावेदार हैं वे कितने ही अनुभवी तथा प्रभावशाली हों वे लोगों को उत्साहित नहीं करते। भाजपा के लिए यह खुशी और संतोष की बात होनी चाहिए कि निचले स्तर से शुरू हुए नरेन्द्र मोदी इतना ऊंचा पहुंचने की क्षमता […]