देश के गुनहगार (Crime of Tabligi Jamat)

April 9, 2020 Chander Mohan 0

2 अप्रैल को एयर इंडिया की फ़्लाइट मुम्बई से राहत सामग्री तथा भारत में फँसे युरोपीय नागरिकों के साथ जर्मनी के शहर फ़्रैंकफ़र्ट जा रही थी। जब जहाज़ ने पाकिस्तान के आसमान में प्रवेश किया तो पायलट के लिए बहुत सुखद अनुभव हुआजब कराची के एटीसी ने उनसे कहा, “असलामुलेकम… हमें आप पर गर्व है कि आप इस आफ़त में भी जहाज़ उड़ा रहे हो। गुड लक”। इंदौर में जाँच कर रही मैडिकल टीम पर कुछ लोगों ने हमला कर दिया और उन्हें भाग कर जान बचाना पड़ी। इस ख़ौफ़नाक अनुभव के बावजूद डा. जाकिया सईद दो दिन के बाद वहाँ फिर जाँच के लिए लौट गई। उनका कहना था “हम फ़्रंट लाईन वर्कर हैँ। हम ही अगर डर गए […]

इंडिया और भारत (India and Bharat)

April 2, 2020 Chander Mohan 0

39 वर्ष के रणवीर सिंह की मौत अपने घर मध्य प्रदेश में मुरैना के बड़फड़ा गाँव पहुँचने से 80 किलोमीटर पहले हो गई। देश भर में घोषित 21 दिन के लाँक डाउन के बाद दिल्ली से यह युवक रेल या बस सेवा बंद होने के कारण पैदल ही 326 किलोमीटर दूर अपने गाँव के लिए निकल पड़ा था लेकिन आगरा के नज़दीक भूखे प्यासे रणवीर की सड़क के किनारे हार्ट अटैक से मौत हो गई। पिछले कुछ दिनों में ऐसे बहुत से दुखद क़िस्से सामने आए है। बहुत प्रवासी महिलाओं तथा बिलखते बच्चों के साथ सर पर सामान उठाए भूखे प्यासे कई सौ किलोमीटर पैदल चलने के लिए मजबूर है।जब तक सरकारों को इस विशाल मानवीय त्रासदी का अहसास हुआ लाखों लोग […]

इंसाफ़ या इंतक़ाम ( Justice or Revenge?)

March 26, 2020 Chander Mohan 0

निर्भया के क़ातिल बलात्कारियों को सात वर्ष के बाद आख़िर फाँसी पर चढ़ा दिया गया।  हमारे समाजिक इतिहास का बहुत घिनौना अध्याय बंद हुआ। जिस मज़बूती  से उसका परिवार विशेष तौर पर उसकी माता आशा रानी ने इस मामले का पीछा किया है वह क़ाबिले तारीफ़ है। अगर वह इतनी मज़बूती न दिखाते तो मामला अभी भी अदालतों में लटकता पड़ा होता। एक बार तो कई महीने कोई जज नहीं था जबकि यह हाई प्रोफ़ाइल मामला है। मुख्य न्यायाधीश एस ए बोबडे ने सही कहा है कि मृत्यु दंड के मामलों के ख़िलाफ़ अपील की सीमा होनी चाहिए और यह लड़ाई अंतहीन नहीं हो सकती। उनकी बात सही है पर यह भी एक कड़वी सच्चाई है कि देश में बलात्कार […]

अज़ दिल्ली ता पालम (Is Congress Sinking?)

March 19, 2020 Chander Mohan 0

शाह आलम द्वितीय डूब हो रहे मुगल साम्राज्य के 18वें बादशाह थे। उनकी ताकत इतनी क्षीण हो चुकी थी कि फारसी में किसी ने लिखा था, ‘सलतनत शाह आलम, अज़ दिल्ली ता पालम!’ अर्थात बादशाह शाह आलम की सलतनत केवल दिल्ली से पालम तक ही सीमित है। दिलचस्प है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया के पलायन के बाद फारसी की यह कहावत कांग्रेस के मुखर सांसद मनीष तिवारी को याद आ गई है। एक ट्वीट में उन्होंने इसके साथ दार्शनिक जार्ज संतायाना का यह कथन भी जोड़ दिया कि  ‘जो इतिहास को भूल जाते हैं उनसे यह दोहराया जाता है।’ उस वक्त जब झटके खाती कांग्रेस पार्टी को ज्योतिरादित्य सिंधिया के दलबदल से एक और करंट पहुंचा है और मध्य प्रदेश में […]

‘विश्व नमस्ते दिवस’आयोजित करने का समय (Vishwa Namaste Divas)

March 12, 2020 Chander Mohan 0

जैसे-जैसे चीन में कोरोना वायरस का प्रभाव घट रहा है यह दूसरे लगभग 100 देशों में फैल गया है। एक लाख से अधिक संक्रमित हैं। इटली में तो हाहाकार मचा है और लगभग एक चौथाई देश को सील कर दिया गया है। अमेरिका जो अपनी भुगौलिक स्थिति के कारण खुद को सुरक्षित समझता था में भी 20 के करीब लोग मारे गए हैं। न्यूयार्क तथा कैलिफोर्निया स्टेट ने आपातकालीन स्थिति घोषित की है। दुनिया भर में 30 करोड़ बच्चे स्कूल नहीं जा रहे क्योंकि स्कूल बंद कर दिए गए हैं। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार इतिहास में पहली बार ऐसा हो रहा है। इसकी अलग सामाजिक प्रतिध्वनि होगी। बिल गेटस का कहना है कि कोरोना वायरस सदी की सबसे प्रचंड महामारी […]

यह कहां आ गए हम (Where Have We Reached?)

March 5, 2020 Chander Mohan 0

दिल्ली के दंगों में मरने वालों की संख्या 50 के करीब पहुंच गई है। करोड़ों की जयदाद नष्ट हो गई है। केवल एक इलाके में 170 वाहन जला दिए गए हैं। देश की और बड़ी हानि हुई  है क्योंकि साम्प्रदायिक सौहार्द पर आंच आ गई और एक विकासशील,शांतमय, लोकतांत्रिक देश की हमारी छवि तहस-नहस हो गई है। 2014 में जब नरेन्द्र मोदी प्रधानमंत्री बने तो देश में बहुत जोश था। दो बार अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा की भारत यात्रा से इस बात की पुष्टि हो गई है कि अब भारत बड़े अंतर्राष्ट्रीय मेज़ में बैठने वाला स्थाई देश बन चुका है। देश में आत्मविश्वास था जो बालाकोट के हमले से और पक्का हो गया था। लेकिन दिल्ली चुनाव के लिए […]