Mohe Rang De Phirangi

मोहे रंग दे फिरंगी!

आमिर खान बुद्धु नहीं है। कितने आराम से अपनी पत्नी के कंधे पर रख कर बंदूक चला दी? वे कहती हैं कि देश का माहौल खराब है इसलिए क्या हमें देश छोड़ देना चाहिए? यह बात आमिर खान ने नहीं कही, कहने वाली उसकी पत्नी है। जो हिन्दू है। सवाल तो यह है कि आमिर खान ने इस निजी बात को सार्वजनिक क्यों किया? अगर किरण ने कोई ‘भयंकर बात’ कह दी तो मियां ने इसे सरेआम क्यों कह दिया? आमिर ने अपनी बीवी के विलाप का क्या जवाब दिया यह भी उसने नहीं बताया। क्या वह अपनी बीवी से सहमत हैं कि भारत जिसने उसे सुपरस्टार बनाया और पीके जैसी फिल्म भी बर्दाश्त की जिसमें हिन्दू धर्म का मजाक उड़ाया गया, अब रहने लायक नहीं रहा? मुम्बई में 1993, 2006, 2008 में आतंकी घटनाएं हुईं तब असुरक्षित महसूस नहीं किया लेकिन क्योंकि आजकल कथित असहिष्णुता पर बोलना लिबरल बनने के लिए जरूरी समझा जाता है इसलिए इस भेड़चाल में शामिल हो गए। केवल यह उलटी पड़ी। दो दिन के बाद अवश्य कहा कि ‘भारत मेरा देश है। मैं उससे प्यार करता हूं’ लेकिन इस अरबपति सुपरस्टार ने बड़े विशाल मंच पर अपने देश को बदनाम किया।
उससे मैं भी वही प्रश्न करना चाहता हूं कि जो अनुपम खेर ने भी किया है, कि वह किस देश जाना चाहते हैं? पाकिस्तान? बांग्लादेश? चीन? फ्रांस जहां मुस्लिम महिलाओं के पहरावे पर कई पाबंदियां लगाई गई हैं? वह बुर्का भी पहन नहीं सकती, मुंह नहीं ढांप सकती। या मध्यपूर्व के देशों में जाना है जहां मुसलमान मुसलमान के खून का प्यासा है? या अमेरिका जहां आपका मुस्लिम नाम पढ़ कर हवाई अड्डों पर तलाशी शुरू हो जाती है जैसा शाहरुख खान के साथ भी हो चुका है? ठीक है कि इस देश में कुछ लोग बहक जाते हैं। अब फिर असम के राज्यपाल पीबी आचार्य ने कहा है कि हिन्दोस्तान हिन्दुओं के लिए है और भारत में रह रहे मुसलमान कहीं और जा सकते हैं। राज्यपाल का यह बयान आपत्तिजनक है। पर जो आमिर खान ने कहा वह भी घोर आपत्तिजनक है। वह तो लोगों को डरा रहे हैं। इस देश से अरबों रुपए कमा कर अब वह इसकी बेइज्जती कर रहा है।
लेकिन उसे भी समझना चाहिए कि देश का मुसलमान उनसे अधिक समझदार हैं। हम असादुद्दीन ओबैसी की तीखी आलोचना करते हैं पर वह भी आमिर से अधिक देशभक्त है जिसका कहना है कि जो कुछ आमिर खान ने कहा उससे वह सहमत नहीं क्योंकि यही हमारा देश है। यही बात नसीरूद्दीन शाह ने भी कही है। दूसरी तरफ केरल के सुन्नी मौलवी अबूबकर का कहना है कि महिलाएं बस बच्चे पैदा करने के लिए होती हैं और पुरुष महिला में बराबरी इस्लाम के खिलाफ है। क्या कारण है कि ऐसी फिजूल बातों पर शाहरुख तथा आमिर जैसे मुखर लोग अपना मुंह बंद रखते हैं? उन्हें यहां असहिष्णुता नज़र नहीं आती? इस वक्त योरुप जहां मुसलमानों की संख्या बहुत नहीं हैं हजारों की संख्या में मुस्लिम युवक आईएस में शामिल हो रहे हैं जबकि भारत जहां मुसलमानों की संख्या दुनिया में तीसरी है, यहां से केवल 23 युवक ही आईएस में शामिल हुए हैं। इसका कारण क्या है?
इसका कारण है कि दादरी की घटना के बावजूद तथा कथित बुद्धिजीवियों के असहिष्णुता के खिलाफ अभियान के बावजूद, कुछ सुपरस्टारों की मक्कारी के बावजूद, भारत का मुसलमान जानता है कि आज अल्पसंख्यकों के लिए सबसे सुरक्षित जगह भारत ही है जो बात एक और सुपरस्टार खान सलमान के पिता सलीम खान ने भी कही है। भारत का मुसलमान देख रहा है कि पाकिस्तान जो उपमहाद्वीप के मुसलमानों को सुरक्षा देने के लिए बना था वहां ही मुसलमान मुसलमान को काट रहे हैं। ठीक है कुछ जगह अनुचित बातें हुई हैं। कुछ लोग बहुत गलत बोलते हैं लेकिन मुख्यधारा उग्रवाद, चाहे वह किसी भी किस्म का हो, को पसंद नहीं करती। लेकिन अफसोस है कि जो वर्ग खुद को उदारवादी प्रस्तुत करने के लिए उतावला है वह ही बहक रहा है।
आऊटलुक पत्रिका ने 16 नवम्बर के अंक में गृहमंत्री राजनाथ सिंह के मुंह से कहलवा दिया कि 800 सालों के बाद पहली बार हिन्दू शासक बना है। प्रतिवाद दो सप्ताह के बाद 2 दिसम्बर को किया जब संसद में तूफान उठा और राजनाथ सिंह ने तीखा प्रतिवाद किया। ऐसे कथित सैक्युलर लोग ऐसी शरारतें चुपचाप करते रहते हैं। ट्रिब्यून के संपादक को शिकायत है कि थल सेनाध्यक्ष जनरल दलबीर सिंह ने अमर ज्योति पर एक कार्यक्रम के दौरान अपनी कलाई पर मौली क्यों बांध रखी थी? यह कैसी फिजूल आपत्ति है? अगर कड़ा डालना या क्रॉस डालना सही है तो मौली डालना क्यों नहीं? सैक्युलरिज्म तथा इनटॉलरेंस के मामले में सारी बहस ही विकृत हो रही है। कुछ लोगों ने उसकी आलोचना करना जो हिन्दूवादी समझा जाता है ही अपना धंधा बना लिया है। सहिष्णुता पर बहस ही असहिष्णुता बढ़ा रही है। दरारें और पक्की कर रही है।
भारत के 1050 मुस्लिम धर्म गुरुओं ने अल कायदा तथा आईएस जैसे आतंकी संगठनों के खिलाफ फतवे जारी किए हैं। यह सियाने हैं जो जानते हैं कि जेहादी आतंकवाद तथा उग्रवाद उनके समुदाय को बदनाम कर रहे हैं तथा दुनिया भर के मुसलमानों के लिए समस्या पैदा कर रहे हैं। योरुप में रह रहे मुसलमान सब सहम हुए हैं पेरिस की घटना के बाद उन्हें शंका से देखा जाता है। एक आठ वर्ष की बच्ची ने ट्वीट कर पूछा है कि क्या वह अपने सहपाठियों को बता सकती है कि वह मुसलमान है? वहां का माहौल ही ऐसा है पर भारत का कानून सबके लिए बराबर है। मीडिया अल्पसंख्यकों का संरक्षण करता है। यहां ऐसा माहौल नहीं है जहां टीवी पर करोड़ों रुपए प्रति एपिसोड ले कर देशभक्ति की बातें करने वाले एक अरबपति फिल्मस्टार का परिवार खुद को असुरक्षित समझे।
थोड़ी बहुत असहिष्णुता दुनिया में हर जगह है जो बात तस्लीमा नसरीन ने भी कही है लेकिन उनका कहना है कि भारत सबसे सुरक्षित देश है। उनका यह भी कहना है कि पीके जैसी फिल्म बना कर 300 करोड़ रुपए कमाए गए तथा ‘आमिर खान, अगर यही फिल्म आपने पाकिस्तान या बांग्लादेश में बनाई होती तो आपका जनाज़ा निकल जाता।’ तस्लीमा खुद कट्टïरवादियों के हाथों बहुत असहिष्णुता भुगत चुकी हैं उनके लिए आवाज क्यों नहीं उठी? क्योंकि यह राजनीतिक एजेंडे में फिट नहीं बैठती इसलिए अपने को लिबरल बताने के लिए हीरो ने अपनी पत्नी को वैम्प बना दिया। बहरहाल अगर आमिर तथा उनका परिवार फिरंगी रंग में रंगना चाहता है तो यह उनका मामला है लेकिन मैंने फैसला किया है कि अब कभी आमिर खान की फिल्म नहीं देखूंगा। मुझे मालूम है कि अकेले मेरे निर्णय से अंतर नहीं पड़ेगा लेकिन जिस तरह आमिर जैसे लोग अपने देश के खिलाफ असहिष्णुता फैला रहे हैं उसके खिलाफ यह मेरा अहिंसक विरोध है।

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About Chander Mohan 565 Articles
Chander Mohan is the grandson of the legendary editor of Pratap, Mahashya Krishan. He is the son of the famous freedom fighter and editor, Virendra. He is the Chief Editor of ‘Vir Pratap’ which is the oldest hindi newspaper of north west india. His editorial inputs on national, international, regional and local issues are widely read.

2 Comments

  1. नहीं, आपका निर्णय महत्वपूर्ण – और संभावित प्रभावी भी है। आरंभ एक ही से होता है। इसलिए, न केवल आमिर और शाहरुख जैसे हिन्दू-विरोधी राजनीति से ग्रस्त एक्टर, बल्कि The Hindu, Frontline, Times of India, NDTV, जैसे मीडिया के प्रति भी सही अवसर, और सही उदाहरण के साथ, खुला अभियान चलाया जाना चाहिए – कि हिन्दू उन्हें न खरीदें, न देखें। न हिन्दू व्यापारी, उद्योगपति उन्हें विज्ञापन दें। इस सत्य को जनता के सामने रखा जाना चाहिए कि हिन्दू जनता से धन, पद, प्रतिष्ठा ले कर उसी की धर्म, परंपरा, ज्ञान, शिक्षा पर कालिख पोतना एक धूर्त राजनीति है। मगर हिन्दू परंपरा, हिन्दू जनता और भारत देश के लिए भयंकर। इस पर ऊँगली रखना और सत्य-निष्ठ अभियान चलाना जरूरी है। साधुवाद! आपकी, भावना को देश में फैलाना चाहिए। वही पोस्टकार्ड से पोस्टकार्ड भेजने वाली पुरानी विनती जैसी….

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  2. I also pledge not to see any movie of Amir Khan

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