भारत और बांग्लादेश: बिगड़ता खेल, This Is No Cricket Mustafizur

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री बेगम ख़ालिदा जिया के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए विदेश मंत्री एस जयशंकर विशेष तौर पर ढाका गए जहां उन्होंने बीएनपी के नेता और खालिदा जिया के बेटे तारीक रहमान को प्रधानमंत्री मोदी का शोक पत्र भी दिया। जिस समय भारत और बांग्लादेश के रिश्ते बहुत तनाव पूर्ण है जयशंकर की ढाका यात्रा को रिश्तों को पटरी पर लाने का प्रयास समझा गया। अपने दो पड़ोसियों, चीन और पाकिस्तान, के साथ पहले ही हमारे तनावपूर्ण सम्बंध हैं। हम बांग्लादेश को भी उस तरफ़ खिसकने से रोकना चाहतें है।जयशंकर का कूटनीतिक प्रयास अच्छा था पर कुछ ही दिनों में उस पर पानी फेर दिया गया। मामला क्रिकेट से जुड़ा है। बांग्लादेश के खिलाड़ी मुस्ताफिज़ुर रहमान को शाहरुख़ खान की  केकेआर आईपीएल टीम ने 9.2 करोड़ रूपए में ख़रीद लिया था। कोई टीम उसी खिलाड़ी को ख़रीद सकती है जिसे बीसीसीआई ने पूल में रखा हो। स्पष्ट है कि केकेआर ने कोई ग़लत कार्यवाही नहीं की थी। पर यह चयन बांग्लादेश में हिन्दुओं पर हो रहे लगातार अत्याचार के बीच किया गया। पिछले 48 घंटों में दो हिन्दू, राणा प्रताप और मोनी चक्रवर्ती को वहाँ मार दिया गया है।

 भारत में लोकराय वहाँ के घटनाक्रम से उद्वेलित है इसीलिए मुस्ताफिज़ुर रहमान का मामला तूल पकड़ गया। विशेष तौर इसलिए भी क्योंकि टीम के मालिक शाहरुख़ खान है। सह-मालिक जूही चावला और उनके पति जय मेहता भी है, पर तथाकथित हिन्दूवादी संगठनों के निशाने पर एसएआरके हैं। एक भाजपा नेता ने तो उन्हें  ‘ग़द्दार’ तक कहा गया। और भारत सरकार तथा बीसीसीआई दबाव में आ गए। जयशंकर तो सम्बंध मुरम्मत करने वहाँ गए थे पर अप्रत्याशित कदम उठाते हुए बीसीसीआई ने केकेआर को आदेश दे दिया कि मुस्ताफिज़ुर रहमान को टीम से हटा दिया जाए। खेल में फिर राजनीति घुस गई। बांग्लादेश की मुहम्मद युनस सरकार को भारत विरोधी भावना भड़काने का एक और सुनहरा मौक़ा मिल गया। आईपीएल से अपने खिलाड़ियों को निकालने के साथ ही उन्होंने यह फ़ैसला भी ले लिया गया कि उनकी टीम टी-20 वर्ल्ड कप के लिए भारत खेलने नहीं जाएगी। आईसीसी जिसके अध्यक्ष जय शाह है, से अनुरोध किया गया है कि बांग्लादेश के मैच श्रीलंका में रखें जाएँ क्योंकि भारत में उनके खिलाड़ी असुरक्षित है। दोनों देशों के बीच क्रिकेट सम्बंध भी रूक गए हैं। बांग्लादेश में आईपीएल प्रसारण पर भी रोक लगा दी गई है।

भारत की विदेश नीति पर कथित हिन्दूवादी संगठनों का दबाव  हावी रहा। शशि थरूर ने इस कदम को ‘बेतुका और शर्मनाक’ कहा है। सचमुच कई बार भारत सरकार की विदेश नीति समझ से बाहर हो जाती है। पाकिस्तान के साथ अपने एशिया कप 2025 मैच में भारत के कप्तान सूर्य कुमार यादव ने पाकिस्तान के क्रिकेट कप्तान से हाथ मिलाने से इंकार कर दिया था। भारत की टीम ने पाकिस्तानी अधिकारी मोहसिन नकवी के हाथ से ट्राफ़ी लेने से भी इंकार कर दिया। इसे पहलगाम में आतंकी घटना के विरोध में किया बताया गया। कप्तान को आदेश भी उपर से मिला था। पर हाल की अपनी ढाका यात्रा के दौरान विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पाकिस्तान के स्पीकर सरदार अयाज़ सादिक़ से आगे बढ़ कर हाथ मिलाया। समाचारों के अनुसार हमारे विदेश मंत्री ने पाकिस्तान के स्पीकर को अपना परिचय दिया और अच्छी तरह बातचीत की। सवाल तो यह है कि कौनसा कदम सही था? सूर्य कुमार यादव का हाथ न मिलाना या जय शंकर का हाथ मिलाना? इसी प्रकार यह सवाल भी उठता है कि क्या सही था, जयशंकर का ढाका जाना या मुस्ताफिज़ुर रहमान को आईपीएल से निकालना?

कूटनीति लचीली होनी चाहिए पर अस्पष्ट नही। जहां तक बांग्लादेश का सवाल है, यह मानना पड़ेगा कि मुहम्मद युनस की सरकार का रवैया भारत विरोधी है। वह खुद निर्वाचित भी नहीं है पर किसी तरह से सत्ता पर क़ाबिज़ हैं। अपने इतिहास को नकारते हुए वह पाकिस्तान के साथ सम्बंध घनिष्ठ बनाने में लगे हैं। पाकिस्तान के साथ सैन्य गठबंधन की बात चल रही है। पाकिस्तान के सैनिक और आईएसआई के अधिकारी बार बार ढाका का दौरा कर रहें है। चीन-पाकिस्तान-बांग्लादेश का भारत विरोधी गुट उभर रहा है। जब तक शेख़ हसीना वहाँ सत्ता में थीं, भारत विरोधी तत्वों को उन्होंने नियंत्रण में रखा था। युनस उन्हें बेलगाम कर रहें हैं। हमारी भी गलती रही कि हम शेख़ हसीना के भरोसे रहें और बांग्लादेश के बाक़ी राजनीतिक ताक़तों से सम्पर्क कम रहा। एक ही टोकरी में सारे अंडे डाल दिए। अब जरूर बीएनपी से रिश्ते बेहतर करने के लिए जयशंकर ढाका गए है। कट्टरपंथी जमाते इस्लामी के अमीर ने भी बताया है कि भारत के राजदूत उनसे मिले थे।

अगले महीने बांग्लादेश के चुनाव हैं। हैरानी है कि वह राजनीतिक दल जिसने उनकी आज़ादी की लड़ाई लड़ी थी, शेख़ हसीना की अवामी लीग, पर पाबंदी लगा दी गई है। हसीना बहुत लोकतांत्रिक शासक नहीं थीं। उन्होंने भी अपने विरोधियों को कुचल दिया था पर उनके समय बांग्लादेश ने प्रगति बहुत की थी। भारत के साथ 2009 और 2024 के बीच व्यापार में 600% की वृद्धि हुई थी। 2023 में उस देश ने 6.1 % की दर से तरक़्क़ी की थी जो पाकिस्तान से दोगुनी है। पिछले साल यह गिर कर 3% के लगभग रह गई थी। जुलाई और दिसम्बर 2024 के बीच बांग्लादेश में 21 लाख रोज़गार कम हुए थे। सड़क पर असंतोष को समभालने में असफल युनस सरकार उसका मुँह भारत की तरफ़ मोड़ने की कोशिश कर रही है। जब से स्टूडेंट लीडर ओसमान हाडी की हत्या हुए हैं भारत विरोध और भड़क गया है। वहाँ की सरकार कह रही है कि हत्यारे भारत भाग गए है।

वहाँ का भारत विरोध हमें समझ नहीं आता। आख़िर उनकी आज़ादी की लड़ाई में हमने भी खून बहाया है। उनकी तरक़्क़ी में हमारा बड़ा योगदान है। पूर्व विदेश सचिव निरुपमा मेनन राव ने लिखा है, “वह राष्ट्र जो नरसंहार के खिलाफ संघर्ष में पैदा हुआ था अब सड़क हिंसा को सामान्य बना रहा है और अल्पसंख्यकों पर हो रही हिंसा पर ख़ामोश है…सड़कों पर अस्थिरता,भय और खून है”। अनुमान है कि शेख़ हसीना के निर्वासन के बाद हिन्दुओं पर दो हज़ार से अधिक हमले हो चुकें हैं। देश के विभाजन के समय हिन्दुओं की वहाँ जनसंख्या 28% के आसपास थी जो कम हो कर 2022 की जनगणना के अनुसार, 7.95% रह गई थी। अब तो यह और भी कम रह गई होगी। वहाँ भी हम पाकिस्तान की तरह नस्ली सफ़ाई देख रहें है। और भारत बेबस है।

विलियम वॉन शेंडल ने बांग्लादेश के इतिहास पर लिखी किताब में लिखा है, “भारत में यह आम धारणा है कि बांग्लादेश ने स्वतंत्रता संग्राम में भारत के योगदान के प्रति पर्याप्त कृतज्ञता नहीं दिखाई वहीं बांग्लादेश में यह धारणा है कि भारत ने केवल रणनीतिक हितों के लिए दखल दिया”। परिणाम है कि दोनों तरफ़ अविश्वास चरम पर है। ढाका के अखबार डेली स्टार ने लिखा है, “अब आपसी अविश्वास का शून्य पैदा हो गया है। बांग्लादेश समझता है कि नई दिल्ली साज़िश करने वाले भगौडों को पनाह दे रहा है जबकि भारत समझता है कि वह बहुसंख्यकों की अराजकता की तरफ़ फिसल रहा है”। यह सही है कि वह देश अराजकता की तरफ़ फिसल रहा है। डेली स्टार का अपना दफ़्तर दंगाईयों ने जला दिया था। जैसे जैसे चुनाव नज़दीक आएंगे अराजक तत्व और दुःसाहसी बन जाएगे। बांग्लादेश दोराहे पर खड़ा है। इस बात की सम्भावना बहुत कम नज़र आती है कि चुनाव के बाद बांग्लादेश एक शांत लोकतांत्रिक देश की तरह उभरेगा। उल्टा नफ़रत, हिंसा और क्रोध से भरे इस देश को सम्भालना बहुत मुश्किल होगा। विभिन्न अंतराष्ट्रीय ताक़तों की स्पर्धा स्थिति को और जटिल बना देगी।

 उस देश का दुर्भाग्य है कि इस निर्णायक क्षण में बिना चुनाव लड़े मुहम्मद युनस शासक हैं। युनस  भारत विरोधी कठपुतली हैं। उनके समय हालत और बिगड़ें है। बांग्लादेशी वेबसाइट काउंटर पौयंट में ज़फ़र सोभान लिखतें हैं, “सीधी सी बात है कि आज अल्पसंख्यक पिछली सरकार की तुलना में बहुत कम सुरक्षित हैं…धार्मिक असहिष्णुता में भारी वृद्धि हुई है। इसका सामना करने का इस सरकार ने बहुत कम प्रयास किया है”। और भारत यह सब देखता रहा। हम न दोस्ती कर सके न दुष्मनी। बयान दागने के सिवाय कुछ ठोस नहीं किया। उन्हें चीन और पाकिस्तान के साथ गठबंधन में जाने से भी हम रोक नहीं सके। पिछले साल अपनी चीन की यात्रा के दौरान युनस ने यह विवादास्पद बयान दिया कि “उत्तर पूर्व के भारत के सात प्रांत घिरे हुए हैं। उनका समुद्र तक पहुँचने का कोई रास्ता नहीं है ।केवल हम बांग्लादेशी समुद्र के संरक्षक हैं। इससे कई सम्भावना निकलती है। यहाँ चीन की अर्थव्यवस्था का विस्तार हो सकता है”। यह एक अत्यंत शरारती बयान है। चीन जाकर हमारे सात प्रांतों की बात करने की ज़रूरत क्या थी? फिर चीन को वहाँ पसारने का निमंत्रण भी दे दिया। उनके कुछ सलाहकारों ने तो ‘ग्रेटर बांग्लादेश’ के सपने देखना शुरू कर दिया। एक ने तो कह दिया कि वह हमारे उत्तर पूर्व पर क़ब्ज़ा कर सकते हैं।

सवाल तो यह है कि इनकी ऐसी हिमाक़त करने की हिम्मत कैसे हो गई? बांग्लादेश को हमने तीन तरफ़ से घेरा हुआ है, केवल समुद्र रह जाता है। हम खुद को सुपर पावर समझतें हैं। हम जब चाहें उनको जकड़ सकतें हैं। हमें तो उनके समुद्र की अस्थायी नाकेबंदी कर ट्रेलर दिखाना चाहिए था लेकिन हमारी नीति ढीली है। न दोस्त ही बन सके न ही दुष्मनी ही निभाई। ट्रम्प तो वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति को बेडरूम से उठा कर ले आए। हमने बड़ा कदम उठाया तो मुस्ताफिज़ुर रहमान को आईपीएल से निकाल दिया!

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About Chander Mohan 798 Articles
Chander Mohan is the grandson of the legendary editor of Pratap, Mahashya Krishan. He is the son of the famous freedom fighter and editor, Virendra. He is the Chief Editor of ‘Vir Pratap’ which is the oldest hindi newspaper of north west india. His editorial inputs on national, international, regional and local issues are widely read.