वाजपेयी को क्यों नहीं?

November 19, 2013 Chander Mohan 0

वाजपेयी को क्यों नहीं? सचिन तेंदुलकर तथा वैज्ञानिक सीएनआर राव को ‘भारत रत्न’ दिए जाने का स्वागत है। दोनों ने ही अपने-अपने क्षेत्र में इतने कीर्तिमान स्थापित किए हैं कि इनकी बराबरी नहीं है। यह अफसोस की बात है कि राव ने भारत रत्न प्राप्त करते ही राजनीतिज्ञों को ‘इडीयटस’ कह दिया। उनकी शिकायत है कि विज्ञान तथा अनुंसधान को कम पैसे मिलते हैं। शिकायत सही है। शिक्षा के क्षेत्र को भी कम पैसे मिलते हैं लेकिन इतने बड़े वैज्ञानिक से आशा थी कि वह बेहतर शब्दों का चयन करेंगे। इन दोनों को भारत रत्न दिए जाने के साथ ही मांग उठी है कि हॉकी के जादूगर ध्यानचंद तथा पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को भी भारत रत्न मिलना चाहिए। […]

चाय वाले से बच कर रहो!

November 15, 2013 Chander Mohan 1

चाय वाले से बच कर रहो! चुनाव का मौसम है। इस दौरान नेताओं को कुछ आज़ादी तो है पर एक-दूसरे पर हमला करते वक्त वे जरूरत से अधिक असावधान हो रहे हैं। ‘खूनी पंजे’ के कारण नरेंद्र मोदी चुनाव आयोग को जवाबदेह बन गए हैं। कांग्रेस के  शकील अहमद ने मोदी को इंसान के रुप में जानवर कहा है। सबसे दुर्भाग्यपूर्ण समाजवादी पार्टी के नेता नरेश अग्रवाल की टिप्पणी है कि ‘चाय बेचने वाले का नज़रिया राष्ट्रीय स्तर का नहीं हो सकता ठीक वैसे ही जैसे एक सिपाही को कप्तान बना दिया जाए तो उसका नज़रिया कप्तान का नहीं हो सकता।’ यह एक टिप्पणी देश के सभी होनहार गरीबों का अपमान है जो उच्चाकांक्षी हैं। नरेश अग्रवाल तो कह रहे […]

सभी के वास्ते पत्थर कहां से लाओगे?

November 13, 2013 Chander Mohan 0

सभी के वास्ते पत्थर कहां से लाओगे? कांग्रेस के नेता भारी असुरक्षा की भावना प्रकट कर रहे हैं। जब से नरेंद्र मोदी को भाजपा का प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया गया है कांग्रेस के कई बड़े नेता आपा खो रहे हैं। शुरूआत तो सोनिया गांधी ने उन्हें ‘मौत का सौदागर’ कह कर की थी। उसके बाद से सिलसिला बढ़ता जा रहा है। उन्हें मदांध, मनोरोगी, दंगाई, हिटलर, कचरा, कहा जा चुका है। अब सूचना प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी ने उन्हें दानव तक कह दिया है। राहुल को शहजादा कहने पर जनार्दन द्विवेदी ने तो बाकायदा धमकी दे दी। और अभी तो सैमीफाईनल चल रहा है। निश्चित तौर पर आम चुनाव तक पहुंचते-पहुंचते कांग्रेस के बड़े नेता मोदी के लिए और […]

विदेश नीति में भी समर्पण

November 11, 2013 Chander Mohan 0

विदेश नीति में भी समर्पण प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह श्रीलंका में होने वाले राष्ट्रमंडल सम्मेलन में उपस्थित नही होंगे। वैसे तो मैं राष्ट्रमंडल को ही एक फिज़ूल संस्था समझता हूं। आखिर इंग्लैंड तथा उसकी पूर्व उपनिवेशों के बीच क्या सांझ हो सकती है? फिर भी मैं प्रधानमंत्री के निर्णय को दुर्भाग्यपूर्ण मानता हूं क्योंकि राष्ट्रमंडल की अप्रासंगिकता के बावजूद भारत इस फिज़ूल संगठन को गंभीरता से लेता रहा है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह खुद दो राष्ट्रमंडल सम्मेलन में शिरकत कर चुके हैं। प्रधानमंत्री का श्रीलंका न जाने का निर्णय आंतरिक दबाव में उठाया गया है। तमिलनाडु की दोनों बड़ी पार्टियां, अन्नाद्रुमुक तथा द्रुमुक इसके खिलाफ थी। तमिलनाडु की विधानसभा ने प्रधानमंत्री की प्रस्तावित यात्रा के विरोध में प्रस्ताव पारित किया था। तीन […]

सर्वेक्षण पर विलाप

November 8, 2013 Chander Mohan 1

सर्वेक्षण पर विलाप चुनाव आयोग को जनमत सर्वेक्षण पर पाबंदी लगाने की सिफारिश कर कांग्रेस पार्टी ने अपनी असुरक्षा की भावना को ही प्रकट किया। इसी पार्टी ने कर्नाटक में चुनाव से पहले सर्वेक्षण का स्वागत किया था क्योंकि इसमें पार्टी की जीत की भविष्यवाणी की गई थी, और पार्टी आसानी से यह चुनाव जीत भी गई। पर आजकल क्योंकि सभी सर्वेक्षण बता रहे हैं कि आने वाले मध्यप्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ तथा दिल्ली के चुनावों में पार्टी की हालत खराब है इसलिए पार्टी ने सर्वेक्षणों पर पाबंदी की वकालत की है। और यह पहली बार नहीं कि कांग्रेस को मीडिया के साथ समस्या आई हो। दिसंबर 2011 में सूचना तथा प्रसारण मंत्रालय ने फेसबुक, गुगल तथा यू-ट्यूब को चेतावनी दी […]

एक गैर जरूरी बहस

November 5, 2013 Chander Mohan 2

एक गैर जरूरी बहस आजकल जो बहस चल रही है कि क्या जवाहरलाल नेहरू बड़े नेता थे या सरदार पटेल को मैं बिलकुल गैर जरूरी समझता हूं। नरेन्द्र मोदी का कहना है कि अगर पटेल पहले प्रधानमंत्री होते तो देश की तस्वीर ही अलग होती। यह बात तो सही है कि नेहरू तथा पटेल की विचारधारा अलग-अलग थी लेकिन क्या होता, क्या न होता, इसके बारे क्या कहा जा सकता है? पटेल का देहांत दिसम्बर 1950 में हो गया था। अर्थात् आजादी मिलने के कुछ ही वर्ष बाद 63 साल पहले वे चल बसे। लेकिन आजादी के लिए संघर्ष तथा उसके बाद देश को संभालने के लिए उनका योगदान इतना था कि लोग आज भी उन्हें याद रखते हैं। जवाहरलालजी […]