जब चिट्टी बईं काली नहीं रही (Retain Benefits To Environment)

May 28, 2020 Chander Mohan 0

3 अप्रैल को जालन्धर निवासियों को एक अद्भुत और दिलकश नज़ारा देखने को मिला। अपने घरों की छत से उन्हें 160 किलोमीटर दूर हिमाचल प्रदेश की बर्फ़ से ढकी धौलाधार पर्वत श्रंखला के दर्शन हो रहे थे। उपर निर्मल नीला आकाश और दूर चमकता धौलाधार ! अपनी अच्छी क़िस्मत पर इंसान झूम उठा। ऐसा ही अनुभव श्रीनगर में हुआ जब लोगों को 190 किलोमीटर दूर पीर पंजाल शृंखला देखने को मिली। लॉकडाउन के बीच उत्तर भारत के कई शहरों से कई किलोमीटर दूर पहाड़ नज़र आने लगे। जैसे जैसे इंसान पीछे हटता गया क़ुदरत ने अपनी जगह वापिस हासिल करने का ज़बरदस्त प्रयास किया। कारख़ानों की चिमनियों से ज़हरीला धुआँ निकलना बंद हो गया। उन दिनों किसान पराली नही जला […]

चीन ने नेपोलियन को सही सिद्ध कर दिया (The Threat From China)

May 21, 2020 Chander Mohan 0

नेपोलियन ने एक बार कहा था, “चीन को सोने दो जब वह जाग गया तो  दुनिया को कष्ट होगा”। यह चेतावनी जो लगभग 200 वर्ष पहले दी गई थी को अधिकतर समय गम्भीरता से नही लिया गया क्योंकि चीन कई शताब्दी आंतरिक उथल पुथल, ग़रीबी और बीमारी से जूझता रहा। माऊ से-तुंग की सांस्कृतिक क्रांति में मरने वालों का अनुमान लाखों से दो करोड़ तक का है। एक समय तो यह लग रहा था कि चीन अराजकता में खो जाएगा लेकिन अब जबकि चीन एक सुपरपावर बन चुका है और उसकी आर्थिक और सैनिक ताक़त अमेरिका के बाद दूसरे नम्बर पर है, फ़्रांस के पूर्व सम्राट का कथन सही भविष्यवाणी प्रतीत होती है। चीन जाग ही नही चुका वह दहाड़ […]

देश की अनाथ औलाद (The Lost People of India)

May 14, 2020 Chander Mohan 0

प्रवासी मज़दूरों की त्रासदी ज़ारी है। महाराष्ट्र में औरंगाबाद के नज़दीक रेल पटरी पर सोए 16 मज़दूरों को माल गाड़ी रौंद गई।चालक कल्पना नही कर सकता था की रेल पटरी पर भी कोई सो सकता है। लेकिन बात दूसरी है। कितनी मजबूरी थी कि थके हारे भूखे प्यासे पुलिस के डंडों से बचते यह सब रेल पटरी पर ही सो गए? पहले लॉकडाउन ने ज़िन्दगी पटरी से उतार दी अब पटरी पर आ रही रेल उनके चिथड़े कर निकल गई। लॉकडाउन के कारण कई सौ किलोमीटर दूर अपने अपने गाँव के लिए निकले 80 प्रवासी रास्ते में ही दम तोड़ चुकें हैं। आज़ादी के बाद का यह सबसे बड़ा पलायन है। समय पर लॉकडाउन ने बड़ी संख्या में जाने बचाईं […]

जब दोस्तियाँ दूरियों में बदल गईं (When Distance Became Security)

May 7, 2020 Chander Mohan 0

फ़िल्म ‘मौसम’ का संजीव कुमार और शर्मीला टैगोर पर फ़िल्माया गुलज़ार द्वारा लिखित ख़ूबसूरत गाना है, ‘दिल ढूँढता है फिर वही फ़ुर्सत के रात दिन’। हर आदमी चाहता है कि उसके पास कुछ अतिरिक्त समय हो जिसका जैसे वह चाहे इस्तेमाल कर सके पर जब लॉकडाउन के कारण छप्पड़ फाड़ कर फ़ुर्सत के दिन ज़बरदस्ती मिले तो मानवता विचलित हो उठी। दोस्तियां दूरियों में बदल गईं। इंसान इंसान से ख़तरा महसूस करने लगा। जो अजनबी है वह चुनौती बन गया। दुकानें बंद,सड़के वीरान, पार्क सुनसान हो गए। कर्फ़्यू के कारण एक समय चारो तरफ़ सन्नाटा था।मरीज़ों के या मृतकों के आँकड़े ज़रा सा बढ़तें तो अखबारेंचिल्ला उठती,‘हड़कम्प मच गया’, ‘भूचाल आ गया’। कई टीवी चैनल अपनी जगह दहशत बढ़ाने में […]

अमेरिका की सरदारी पर सवालिया निशान (America Loses its Dominance)

April 30, 2020 Chander Mohan 0

अमेरिका के टैक्सास प्रांत के लै. गवर्नर डैन पैट्रिक ने एक इंटरव्यू में कहा है कि ग्रैंड पेरंटस अर्थात दादा-दादी, नाना-नानी को ‘अमेरिका की अर्थ व्यवस्था तथा युवा पीढ़ी के लिए मरने को तैयार रहना चाहिए’। अमेरिकी अरबपति टॉम गोलिसानो का भी कहना है कि ‘अर्थ व्यवस्था को बंद रखना कुछ लोगों को खोने से बदतर होगा’।यह दिलचस्प है कि डैन पैट्रिक जो ख़ुद छ: बच्चों के ग्रैंडफादर है अपनी क़ुरबानी की बात नही करते पर अमेरिका में ऐसी असंवेदनशील और निष्ठुर आवाज़ें सुनाई दे रही हैं कि देश की अर्थ व्यवस्था को चलते रखने के लिए अगर कमज़ोर,वंचित या बुज़ुर्ग का बलिदान देना पड़े तो ऐसा होने देना चाहिए। राष्ट्रपति डॉनलड ट्रंप का भी सारा ध्यान अर्थ व्यवस्था पर […]

नरेन्द्र मोदी की अग्नि परीक्षा (Agni-Pariksha of Narendra Modi)

April 23, 2020 Chander Mohan 0

देश और विदेश में उन लोगों को घोर निराशा हुई होगी जो हमारा फ़ातिहा तैयार कर इंतज़ार में थें। भारत इस चीनी वायरस से तमाम होने नही जा रहा। अभी तक यहाँ क़रीब 20000 संक्रमित हुए हैं और 600 की मौत हुई है। यह आँकड़े बढ़ रहें है पर अमेरिका में संक्रमित संख्या 800000 है और मरने वालों की संख्या 45000 है। योरूप के कई प्रमुख देश बुरी तरह फँसे हुए हैं लेकिन भारत ने स्थिति पर नियंत्रण रखा हुआ है। इसका बड़ा कारण है कि अपनी परिस्थिति को समझते हुए सरकार ने जल्द और तेज़ क़दम उठाए चाहे वह अप्रिय हैं। वह नीतिगत घपला नज़र नही आया जो आजकल अमेरिका में देखने को मिल रहा है। इसलिए जो सज्जन बहुत उत्सुकता […]