क्या चीन का बहिष्कार हो सकता है? (Should We Boycott China?)

June 11, 2020 Chander Mohan 0

भारत ने चीन के साथ अगर दोस्ताना नही तो सामान्य रिश्ते रखने का भरसक प्रयास किया है लेकिन  इस मामले में एक और भारतीय प्रधानमंत्री फ़ेल हो रहें हैं। जवाहरलाल नेहरू से ले कर नरेन्द्र मोदी तक हर भारतीय प्रधानमंत्री से चीन ने दगा किया है। नरेन्द्र मोदी ने शी जिनपिंग को अहमदाबाद में साबरमती के किनारे झूला झुलाया,फिर वुहान और महाबलीपुरम में दोनों में अच्छी बातचीत हुई। हम चीन द्वारा फैलाए वायरस के मामले में ख़ामोश रहे। तायवान, हांगकांग, डब्ल्यू एच ओ सब पर हम मौनी बाबा बने रहे। पर न यह और न ही झूला या कथित वुहान स्पिरिट ही चीन को बदमाशी से रोक सकी। अनुमान है कि लद्दाख में पैंगांग झील के साथ लगते हमारे इलाक़े […]

बाक़ी चार साल (Remaining Four Fours)

June 4, 2020 Chander Mohan 0

हमारी पीढ़ी ने बहुत कुछ देखा है। विभाजन की त्रासदी का असर हम पर पड़ा  था। गांधीजी की हत्या, 1962 की लड़ाई, एमरजैंसी, पाकिस्तान का दो फाड़ होना, इंदिरा गांधी की हत्या, दंगे सब के बीच में से हम गुज़र कर हटें हैं। हम करोड़ों लोगों को ग़रीबी से निकालने में सफल रहे। कहा जाने लगा कि चीन के साथ भारत विश्व की भावी दिशा तय करेगा। दशकों के बाद नरेन्द्र मोदी की सरकार आई जिसे पूर्ण बहुमत प्राप्त था। अर्थ व्यवस्था में कुछ गिरावट के बावजूद आशा थी कि भारत अपनी चुनौतियों पर विजय पा लेगा। जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटा दिया गया। तीन तलाक़ की वाहियात प्रथा ख़त्म कर दी गई। अयोध्या में भव्य राम मंदिर के […]

जब चिट्टी बईं काली नहीं रही (Retain Benefits To Environment)

May 28, 2020 Chander Mohan 0

3 अप्रैल को जालन्धर निवासियों को एक अद्भुत और दिलकश नज़ारा देखने को मिला। अपने घरों की छत से उन्हें 160 किलोमीटर दूर हिमाचल प्रदेश की बर्फ़ से ढकी धौलाधार पर्वत श्रंखला के दर्शन हो रहे थे। उपर निर्मल नीला आकाश और दूर चमकता धौलाधार ! अपनी अच्छी क़िस्मत पर इंसान झूम उठा। ऐसा ही अनुभव श्रीनगर में हुआ जब लोगों को 190 किलोमीटर दूर पीर पंजाल शृंखला देखने को मिली। लॉकडाउन के बीच उत्तर भारत के कई शहरों से कई किलोमीटर दूर पहाड़ नज़र आने लगे। जैसे जैसे इंसान पीछे हटता गया क़ुदरत ने अपनी जगह वापिस हासिल करने का ज़बरदस्त प्रयास किया। कारख़ानों की चिमनियों से ज़हरीला धुआँ निकलना बंद हो गया। उन दिनों किसान पराली नही जला […]

चीन ने नेपोलियन को सही सिद्ध कर दिया (The Threat From China)

May 21, 2020 Chander Mohan 0

नेपोलियन ने एक बार कहा था, “चीन को सोने दो जब वह जाग गया तो  दुनिया को कष्ट होगा”। यह चेतावनी जो लगभग 200 वर्ष पहले दी गई थी को अधिकतर समय गम्भीरता से नही लिया गया क्योंकि चीन कई शताब्दी आंतरिक उथल पुथल, ग़रीबी और बीमारी से जूझता रहा। माऊ से-तुंग की सांस्कृतिक क्रांति में मरने वालों का अनुमान लाखों से दो करोड़ तक का है। एक समय तो यह लग रहा था कि चीन अराजकता में खो जाएगा लेकिन अब जबकि चीन एक सुपरपावर बन चुका है और उसकी आर्थिक और सैनिक ताक़त अमेरिका के बाद दूसरे नम्बर पर है, फ़्रांस के पूर्व सम्राट का कथन सही भविष्यवाणी प्रतीत होती है। चीन जाग ही नही चुका वह दहाड़ […]

देश की अनाथ औलाद (The Lost People of India)

May 14, 2020 Chander Mohan 0

प्रवासी मज़दूरों की त्रासदी ज़ारी है। महाराष्ट्र में औरंगाबाद के नज़दीक रेल पटरी पर सोए 16 मज़दूरों को माल गाड़ी रौंद गई।चालक कल्पना नही कर सकता था की रेल पटरी पर भी कोई सो सकता है। लेकिन बात दूसरी है। कितनी मजबूरी थी कि थके हारे भूखे प्यासे पुलिस के डंडों से बचते यह सब रेल पटरी पर ही सो गए? पहले लॉकडाउन ने ज़िन्दगी पटरी से उतार दी अब पटरी पर आ रही रेल उनके चिथड़े कर निकल गई। लॉकडाउन के कारण कई सौ किलोमीटर दूर अपने अपने गाँव के लिए निकले 80 प्रवासी रास्ते में ही दम तोड़ चुकें हैं। आज़ादी के बाद का यह सबसे बड़ा पलायन है। समय पर लॉकडाउन ने बड़ी संख्या में जाने बचाईं […]

जब दोस्तियाँ दूरियों में बदल गईं (When Distance Became Security)

May 7, 2020 Chander Mohan 0

फ़िल्म ‘मौसम’ का संजीव कुमार और शर्मीला टैगोर पर फ़िल्माया गुलज़ार द्वारा लिखित ख़ूबसूरत गाना है, ‘दिल ढूँढता है फिर वही फ़ुर्सत के रात दिन’। हर आदमी चाहता है कि उसके पास कुछ अतिरिक्त समय हो जिसका जैसे वह चाहे इस्तेमाल कर सके पर जब लॉकडाउन के कारण छप्पड़ फाड़ कर फ़ुर्सत के दिन ज़बरदस्ती मिले तो मानवता विचलित हो उठी। दोस्तियां दूरियों में बदल गईं। इंसान इंसान से ख़तरा महसूस करने लगा। जो अजनबी है वह चुनौती बन गया। दुकानें बंद,सड़के वीरान, पार्क सुनसान हो गए। कर्फ़्यू के कारण एक समय चारो तरफ़ सन्नाटा था।मरीज़ों के या मृतकों के आँकड़े ज़रा सा बढ़तें तो अखबारेंचिल्ला उठती,‘हड़कम्प मच गया’, ‘भूचाल आ गया’। कई टीवी चैनल अपनी जगह दहशत बढ़ाने में […]