यह गुस्ताखी माफ करने लायक नहीं

July 4, 2013 Chander Mohan 0

यह गुस्ताखी माफ करने लायक नहीं पाकिस्तान की संसद ने एक प्रस्ताव पारित कर अफजल गुरू को फांसी दिए जाने की निंदा की है और उसके शव को उसके परिवारजनों को सौंपने की मांग भी की है। न केवल भारत के आंतरिक मामले में दखल देने वाले बल्कि एक प्रकार से हमें चिढ़ाने वाले इस प्रस्ताव में कश्मीरी अलगाववादियों को हर तरह से समर्थन देने का वायदा भी किया गया। यह आतंकी संगठनों को सिग्नल भी है कि बढ़े चलो, हम तुम्हारे साथ हैं! पाकिस्तान के राजनीतिक वर्ग ने आतंकवाद पर अपनी मोहर लगा दी है। हमारी संसद पर हमले को सही करार दिया। यह प्रस्ताव जयपुर में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री राजा परवेज अशरफ की हमारे विदेशमंत्री सलमान खुर्शीद द्वारा […]

बदलाव आएगा कैसे?

July 4, 2013 Chander Mohan 0

बदलाव आएगा कैसे? जयपुर में राहुल गांधी के भावुक भाषण को सुन कर दिसंबर 1985 में मुंबई में राजीव गांधी के कांग्रेस शताब्दी पर दिए गए भाषण की याद ताजा हो गई जब राजीव ने कहा था कि “हम (कांग्रेसजन) सार्वजनिक नैतिकता के किसी नियम का पालन नहीं करते, कोई अनुशासन नहीं है, सामाजिक जागरूकता की कोई भावना प्रकट नहीं करते, सार्वजनिक हित के लिए कोई चिंता नहीं। भ्रष्टाचार न केवल बर्दाश्त ही नहीं किया जाता उसे नेतृत्व का मापदंड भी समझा जाता है।” उस भाषण को 27 वर्ष हो गए। इस बीच अटल बिहारी वाजपेयी के शासन को छोड़ कर अधिकतर कांग्रेस या कांग्रेस समर्थक सरकारें ही रही हैं। पिछले नौ साल से तो सरकार की कमान सीधी कांग्रेस […]

लचर व्यवस्था के खिलाफ अविश्वास

July 4, 2013 Chander Mohan 0

लचर व्यवस्था के खिलाफ अविश्वास यह अभूतपूर्व है। दिल्ली में पहले ऐसा नजारा कभी नहीं देखा गया। इंडिया गेट से राष्ट्रपति भवन तक का सारा क्षेत्र युद्ध क्षेत्र बना हुआ है। निहत्थे महिलाओं और युवाओं पर बर्बर लाठीचार्ज हुआ, घोर सर्दियों में पानी की बौछार हुई; लेकिन इसके बावजूद प्रदर्शन नहीं रुक रहे। बाबा रामदेव तथा अन्ना हजारे के आंदोलनों के समय नेतृत्व देने वाले थे। जो आज दिल्ली में हो रहा है वह विशुद्ध जनांदोलन है कोई नेता नहीं। चलती बस में एक लडक़ी से सामूहिक बलात्कार के दर्दनाक मामले से सारे देश में आक्रोश की लहर फैल गई है। लेकिन सबसे खराब हालत दिल्ली की है जो देश की बलात्कार राजधानी बनती जा रही है, जो बात मुख्यमंत्री […]

हंगामें हैं, हंगामों का क्या

July 4, 2013 Chander Mohan 0

हंगामें हैं, हंगामों का क्या रविवार को कांग्रेस ने दिल्ली की रामलीला ग्राऊंड में विशाल रैली कर एक बार फिर अपनी संगठनात्मक क्षमता का परिचय दे दिया। सबसे अधिक लोग हरियाणा से थे इसीलिए कार की छत्त पर बैठे भुपिन्द्र सिंह हुड्डा बहुत आश्वस्त और प्रसन्न नजर आ रहे थे। पर इस महारैली के चित्र देख कर और त्रिमूर्ति के भाषण सुन कर मेरा तो यही कहना है, यह जश्न, यह हंगामें, दिलचस्प खिलौने हैं कुछ लोगों की कोशिश है कुछ लोग बहल जाएं! यह सही है कि यह सरकार मनरेगा और सूचना के अधिकार जैसी क्रांतिकारी योजनाएं ले कर आई थी पर यह पिछली मनमोहन सिंह सरकार का योगदान था। वर्तमान सरकार की कारगुजारी तो पूरी तरह से नकारात्मक […]

साख बचानी है या अध्यक्ष?

July 4, 2013 Chander Mohan 0

साख बचानी है या अध्यक्ष? सलमान खुर्शीद को नया विदेश मंत्री बना दिया गया। मंत्रिमंडल में फेरबदल का यह सबसे बड़ा संदेश है कि आदमी कैसा भी हो, कैसी भी गल्तियां करें जब तक वह कांग्रेस के प्रथम परिवार के लिए मरने को तैयार है सब कुछ माफ है। सलमान खुर्शीद तथा उनकी पत्नी द्वारा चलाए जा रहे एनजीओ में भारी घपले की जानकारी सार्वजनिक हो चुकी हैं लेकिन इसके बावजूद उनकी पदोन्नति बताती है कि कांग्रेस के हाईकमान को लोकलाज की चिंता नहीं है। केजरीवाल तथा कंपनी को भी बता दिया गया कि आप ने जो बोलना है बोलते रहो, हमारी सेहत पर कोई असर नहीं है। कांग्रेस के प्रथम परिवार के प्रति वफादारी ही सब कुछ है। विपक्ष […]

दिल बहलाने को ख्याल अच्छा है

July 4, 2013 Chander Mohan 0

दिल बहलाने को ख्याल अच्छा है पंजाबी का मुहावरा है “पिंड वसया नहीं उचक्के पहलां आ गए”, अर्थात्ï गांव तो अभी बसा नहीं बदमाश पहले पहुंच गए। 2014 के चुनाव को लेकर जनता दल (यू) तथा भाजपा के बीच जो रार छिड़ गई है उसके बारे भी यही कहा जा सकता है। दो वर्ष पड़े है और यह भी मालूम नहीं कि राजग की सरकार बनेगी या नहीं पर अभी से इसे लेकर राजग में सर फोडऩे की नौबत आ गई हैं। समझ नहीं आ रही कि इस वक्त बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भावी प्रधानमंत्री की योग्यता का मामला खोलने की क्या मजबूरी थी सिर्फ इसके कि वह खुद को बहुत बड़ा ‘सैक्यूलर’ सिद्ध करना चाहते हैं। उनकी […]