तल्ख थे, तल्ख रहेंगे (India-China, Tense Relationship)

October 10, 2019 Chander Mohan 0

अमेरिका के पूर्व विदेशमंत्री हैनरी किसिंजर ने चीन के नेतृत्व के बारे अपनी किताब  ‘ऑन चायना’ में लिखा था,  “वह सौदेबाजी या वार्ता को विशेष महत्व नहीं देते… वह नहीं समझते कि व्यक्तिगत संबंध का फैसलों पर विशेष असर पड़ता है चाहे वह व्यक्तिगत संबंधों के द्वारा अपने प्रयासों को बढ़ाने की कोशिश कर सकते हैं।” अब जबकि चेन्नई के पास प्राचीन मंदिरों के शहर मामल्लापुरम में भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तथा चीन के राष्ट्रपति जी जिनपिंग एक बार फिर मिल रहे हैं, आशा है कि हमारे प्रधानमंत्री किसिंजर की इस समझदार राय को याद रखेंगे। प्रधानमंत्री मोदी पहले शी जिनपिंग का अहमदाबाद में सागरमती के किनारे स्वागत कर चुके हैं। पिछले साल दोनों चीन के खूबसूरत शहर वुहान […]

अबकी बार ट्रम्प से प्यार (Ab Ki baar Trump se Pyar)

September 26, 2019 Chander Mohan 0

यह मानना पड़ेगा कि अमेरिकी राष्ट्रपतियों को साधने की कला में नरेन्द्र मोदी का कोई मुकाबला नहीं। जवाहर लाल नेहरू की अगवानी के लिए खुद राष्ट्रपति कैनेडी हवाई अडड्डे पर गए थे लेकिन रिश्ता आगे बढ़ नहीं सका क्योंकि तब तक नेहरू वृद्ध हो गए थे और युवा अमेरिकी राष्ट्रपति से संबंध कायम नहीं कर सके। सबसे कड़वे रिश्ते इंदिरा गांधी तथा अमेरिका के राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन के रहे हैं। बांग्लादेश के संकट के समय निक्सन ने हमारी बात सुनने से ही इंकार कर दिया था। जब दूसरे दिन मुलाकात का समय आया तो निक्सन ने इंदिरा गांधी को अपने दफ्तर के बाहर 45 मिनट इंतजार करवाया था। इंदिरा गांधी को भी आभास था कि वह एक प्राचीन सभ्यता की […]

कूटनीति के विकल्प और चुनौतियां (Choices and Challenges of Diplomacy)

September 13, 2018 Chander Mohan 0

भारत की विदेश नीति पर अपनी किताब ‘चौयसेस’ अर्थात  ‘विकल्प’ में मनमोहन सिंह सरकार के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शिव शंकर मेनन भारत-अमेरिका रिश्ते पर तब ली गई पहल के बारे लिखते हैं, “यह पहल इस धारणा पर आधारित थी कि बदली परिस्थिति में यह हमारे हित में है। चाहे दोनों देश यह कहने में शर्माते हैं कि उनकी सांझेदारी चीन से संतुलन बनाने के लिए है पर यह स्पष्ट है कि चीन का उत्थान इसकी प्रमुख प्रेरणा है… भारत अपने को बदलने, अपने विकास के लिए तथा स्थिर तथा शांतमय वातावरण के लिए अमेरिकी टैकनालिजी, बाजार तथा समर्थन चाहता है।“ इस सब पर कोई विवाद नहीं हो सकता है। जवाहर लाल नेहरू से लेकर सभी प्रधानमंत्रियों ने अमेरिका के साथ […]

चीन की वर्ल्ड ड्रीमज़ (China’s World Dreams)

May 18, 2017 Chander Mohan 0

चीन की वर्ल्ड ड्रीमज़चीन के बारे नैपोलियन ने कहा था कि इसे सोने दो क्योंकि जब वह जाग गया वह दुनिया को हिला कर रख देगा। दो शताब्दियों के बाद यह सोया ड्रैगन न केवल जाग उठा है बल्कि दहाड़ भी रहा है। चीन अब अगला सुपरपॉवर बनने के लिए बड़े कदम उठा रहा है। वह इस वक्त दुनिया का उत्पादन का केन्द्र है। अमेरिका का सबसे बड़ा लेनदार भी है। दुनिया का सबसे बड़ा व्यापारिक देश है। उसका 4068 अरब डॉलर का व्यापार अमेरिका के 3724 अरब डॉलर से आगे निकल गया है। वह दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थ व्यवस्था है। उसकी सेना दुनिया की सबसे बड़ी सेना है। सैनिक बजट अमेरिका के बाद सबसे बड़ा है। भारत […]