अकाली-भाजपा: कौन बैल, कौन गाड़ी, Which Way Will Punjab Go?

September 3, 2026 Chander Mohan 0

अकाली-भाजपा या भाजपा-अकाली, या दोनों में से कोई भी नही? जब से पंजाब में यह सुगबुगाहट शुरू हुई है कि शिरोमणि अकाली दल और भाजपा फिर इकट्ठे आ सकते है यह चर्चा भी गर्म है कि इस गठबंधन की बैल-गाड़ी में इस बार बैल कौन और गाड़ी कौन होगा? 1997 से लेकर 2022 तक जो 6 चुनाव हुए हैं उनमें तीन बार शिअद ने भाजपा के साथ मिल कर सरकार बनाई है और हर बार बैल, अर्थात् सीएम, शिअद का ही रहा है। पंजाब को आतंकवाद के काले युग से निकालने में इस बैल-गाड़ी का बड़ा योगदान रहा है। भाजपा 117 में से केवल 23 चुनाव क्षेत्रों पर ही चुनाव लड़ती रही है। एक बार अवश्य प्रदेश भाजपा ने अपना […]

प्रियंका गांधी: संस्करण 2, Can Priyanka Be The Alternative?

January 29, 2026 Chander Mohan 0

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भाजपा के नए अध्यक्ष नितिन नबीन को अपना बॉस कहा है। भाजपा में कौन ‘बॉस’ है यह सब जानते है, पर यह तो मानना पड़ेगा कि 45 वर्ष के नितिन नबीन को अध्यक्ष बना कर भाजपा के हाईकमान ने एक बार फिर प्रदर्शित कर दिया कि वह लगातार पार्टी का नवीनीकरण करते जातें हैं। पार्टी पुराने घिसे पिटे नेताओं के बल पर आश्रित नहीं रहती, जैसे कांग्रेस है या कई प्रादेशिक पारिवारिक पार्टियाँ हैं। झोले से अचानक ऐसा नाम निकाला जाता है कि लोग दंग रह जातें हैं। वह पाँच बार विधायक चुने जा चुके हैं और नीतीश कुमार के मंत्रिमंडल में मंत्री रहे हैं। उनके चुनाव से संदेश है कि भाजपा मेरिट को डाइनेस्टी पर […]

यह पार्ट-टाईम सियासत का टाईम नहीं है, No Time For Part Time Politics

November 20, 2025 Chander Mohan 0

बिहार में एनडीए की महा जीत और महागठबंधन की महा हार ने देश की राजनीति को बदल दिया है। पिछले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के बेहतर प्रदर्शन के बाद राहुल गांधी विपक्षी नेता बनने में सफल रहे थे। उसके बाद समझा गया कि विपक्ष के इंडिया गठबंधन में जान पड़ जाएगी। पर पहले महाराष्ट्र, फिर हरियाणा, फिर दिल्ली के बाद अब बिहार के चुनाव बता गए हैं कि भाजपा और एनडीए अपनी स्थिति मज़बूत करने में सफल रहें हैं जबकि कांग्रेस ऐसी जगह पहंच गई है कि उसकी प्रासंगिकता पर ही सवाल उठने लगे हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने तो भविष्यवाणी भी कर दी है कि आगे चल कर कांग्रेस का एक और विभाजन हो सकता है। बिहार में एनडीए को […]

प्रियंका गांधी की सक्रिय एंट्री, Priyanka Gandhi’s Entry

November 6, 2024 Chander Mohan 0

पुरानी बात है। तब लाल कृष्ण आडवाणी देश के उपप्रधानमंत्री और गृहमंत्री थे (2002-04)। उनके निवास स्थान पर एक मुलाक़ात के दौरान मैंने उनसे प्रियंका गांधी के राजनीतिक भविष्य के बारे पूछा था। आडवाणीजी का जवाब था, “हाँ, वह एक चुनाव जीत सकतीं हैं”। प्रियंका उस वक़्त लगभग 30 वर्ष की थीं। 1989 में जब वह 17 वर्ष की थीं तो अपने पिता राजीव गांधी के लिए उन्होंने प्रचार किया था पर अधिकतर माँ और भाई का हाथ ही बँटाती रहीं। उस वक़्त कहा गया कि प्रियंका की सबसे बड़ी ख़ासियत है कि न केवल शक्ल बल्कि हाव भाव में भी वह इंदिरा गांधी से मिलती हैं। जब माँ सोनिया गांधी कर्नाटक में बेल्लारी में सुषमा स्वराज के खिलाफ चुनाव […]

मोदी + हिन्दुत्व + वेलफ़ेयर स्कीम, Modi +Hindutva+Welfare Schemes

December 7, 2023 Chander Mohan 0

थी खबर गर्म कि ग़ालिब के उड़ेंगे पुर्ज़े                देखने हम भी गए थे प तमाशा न हुआ विधानसभा चुनाव परिणाम, विशेष तौर पर हिन्दी बैल्ट के तीन प्रदेश मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़, के परिणाम बता गए हैं कि जिन्होंने सोचा था कि हिमाचल प्रदेश और कर्नाटक के चुनाव के बाद भाजपा के लिए जीतना मुश्किल होगा और विशेष तौर पर मध्यप्रदेश में शासन विरोधी भावना एंटी इंकमबंसी पार्टी को ले डूबेगी, वह कितने ग़लत निकले। एक्ज़िट पोल भी कांटे की टक्कर बता रहे थे। सब अनुमान ग़लत निकले और नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा कांग्रेस का ‘तमाशा’ बना गई। जिन्होंने चुनाव से ठीक पहले पन्नू का मामला उछाला था को भी समझ आजाएगी कि उन्हें भारत की समझ […]

संघीय लोकतंत्र की जीत, Victory of Federal Democracy

May 18, 2023 Chander Mohan 0

आख़िर में कुछ काम नहीं आया। न हिजाब, न हलाल, न टीपूँ सुल्तान, न अज़ान, न केरल स्टोरी, न मुस्लिम आरक्षण, न राम मंदिर और न ही बजरंगबली। जब लोग बदलाव पर उतरते हैं तो किसी की परवाह नहीं करते। कोई नारा उन्हें प्रभावित नहीं करता। कर्नाटक में  83 प्रतिशत हिन्दू जनसंख्या है, मुसलमान 13 प्रतिशत हैं पर लोगों ने भाजपा को नकार दिया क्योंकि उनका ध्यान  उन मुद्दों पर था जो उनकी जेब पर असर डालतें हैं, महंगाई, बेरोज़गारी और भ्रष्टाचार। कांग्रेस की बम्पर जीत के पीछे व्यापक समर्थन है।  हिमाचल प्रदेश में भी 97 प्रतिशत हिन्दू जनसंख्या है जहां कांग्रेस को अच्छी जीत मिली थी। ध्रुवीकरण और विभाजित करने वाली राजनीति की एक सीमा है जो कर्नाटक के […]