इन्हें बख्श दो (Why Divide Freedom Fighters)

October 24, 2019 Chander Mohan 0

  महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव बहुत असुखद विवाद छोड़ गया है। भाजपा ने अपने संकल्प पत्र में विनायक दामोदर सावरकर जिन्हें वीर सावरकर के नाम से भी जाना जाता है, को भारत रत्न देने की मांग की है। चुनाव प्रचार में भाजपा के नेताओं ने कांग्रेस से स्पष्टीकरण मांगा कि उनकी सरकारों ने सावरकर को भारत रत्न क्यों नहीं दिया? वह भूल गए कि अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार तथा नरेन्द्र मोदी की पहली सरकार ने भी सावरकर को भारत रत्न नहीं दिया था लेकिन अब महाराष्ट्र के चुनाव की मजबूरी थी इसलिए मामला गर्म किया गया। इसके विपरीत बहुत से लोग है जो सावरकर को भारत रत्न देने का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि सावरकर ने पांच […]

विभाजन और भव्य त्रिमूर्ति (Partition: The Grand Triumvirate)

November 15, 2018 Chander Mohan 0

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और वह लोग जो जवाहर लाल नेहरू को आजादी के बाद प्रधानमंत्री बनाए जाने की आलोचना करते हैं यह भूलते हैं कि यह फैसला महात्मा गांधी का था जिसे सरदार पटेल ने सहर्ष स्वीकार किया था। गांधी जी ने जवाहर लाल नेहरू के बारे लिखा था, “यह मेरी भाषा बोलेगा।” गांधी जी की इस इच्छा को पटेल ने खुशी से स्वीकार कर लिया था और उन्होंने नेहरू को कहा था, “उस लक्ष्य के लिए जिसके लिए भारत में किसी ने उतनी कुर्बानी नहीं दी जितनी आपने दी है मेरी बेहिचिक वफादारी और निष्ठा आपके साथ है। हमारी जोड़ी बेजोड़ है।“ जो लोग नेहरू की आलोचना करते हैं उन्हें पटेल के इन शब्दों का ध्यान रखना चाहिए जिनमें […]

क्योंकि तब सरदार पटेल थे (Because Sardar Patel was There)

November 8, 2018 Chander Mohan 0

सरदार वल्लभभाई पटेल के बारे मई 1933 में महात्मा गांधी लिखते हैं,“क्या मुझे इस बात का अहसास नहीं कि भगवान की मुझ पर कितनी अनुकंपा रही है कि मुझे वल्लभभाई जैसे असाधारण व्यक्ति का साथ मिला है। ” उन्होंने पटेल से यह भी कहा था, “तुम्हारा दिल शेर जैसा हैं”। लेकिन सरदार पटेल के योगदान के बारे सटीक टिप्पणी राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने मई 1959 में की थी कि, “आज एक भारत है जिसके बारे हम सोच सकते हैं और बात कर सकते हैं तो यह बहुत कुछ सरदार पटेल की शासन कला तथा मजबूत प्रशासन का परिणाम है।“ भारत की प्राचीन सभ्यता है लेकिन हम सदा बिखरे रहें हैं। यही कारण है कि 1947 से लगभग एक हजार […]

नेहरू और पटेल (Nehru and Patel)

November 9, 2017 Chander Mohan 0

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की शिकायत है कि सरदार वल्लभ भाई पटेल के नाम को इतिहास से मिटाने का प्रयास किया गया। प्रधानमंत्री की शिकायत गलत नहीं। जवाहरलाल नेहरू के बाद शास्त्री जी का कार्यकाल अल्पावधि रहा और शासन की बागडोर दशकों नेहरू-गांधी परिवार के हाथ रही इस कारण जिनके भी नेहरू के साथ मतभेद थे उन्होंने उनकी सम्मानीय जगह नहीं दी गई। पटेल, सुभाष बोस, सी. राजगोपालाचारी, अम्बेदकर, अबुल कलाम आजाद सबकी उपेक्षा सत्तारुढ़ ‘डायनेस्टी’ द्वारा की गई। इसका इससे बड़ा प्रमाण क्या हो सकता है कि जिस महान देशभक्त तथा प्रशासक ने 500 से अधिक रियासतों को इकट्ठा कर भारत संघ में विलय करवाया, पटेल, उन्हें भारत रत्न देर से 1991 में दिया गया। तब तक जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा […]

कैसे बनेगा ‘न्यू इंडिया’? (Is ‘New India’ Possible?)

August 17, 2017 Chander Mohan 0

यह लेख मैं 15 अगस्त को लिख रहा हूं। प्रधानमंत्री मोदी लाल किले से अपना चौथा भाषण दे हटें हैं। प्रधानमंत्री का भाषण अच्छा था लेकिन पिछले भाषणों जैसा प्रभावशाली नहीं था। इस देश को संभालने तथा वायदे पूरे करने का बोझ किसी को भी थका सकता है। उन्होंने 2022 तक ‘न्यू इंडिया’ लाने की बात कही। क्या यह संभव हो सकेगा? यह स्वतंत्रता दिवस है भी ऐतिहासिक क्योंकि हम अपनी आजादी के सात दशक पूरे कर गए हैं। इसी आजादी के बारे राम प्रसाद बिस्मिल जिन्हें दिसम्बर 1927 में फांसी दी गई थी, ने लिखा था, कभी वह दिन भी आएगा जब अपना राज देखेंगे, जब अपनी ही जमीं होगी और अपना आसमां होगा! अब 70 वर्ष से अपनी जमीन […]

थोड़ा है थोड़े की ज़रूरत है (Thoda He Thoda Ki Zaroorat He)

August 16, 2016 Chander Mohan 0

शहीद राम प्रसाद बिस्मल जिन्हें 19 दिसम्बर 1927 में फांसी दी गई थी, ने लिखा था, कभी वह दिन भी आएगा जब अपना राज होगा, जब अपनी ही जमीं होगी और अपना आसमां होगा! अब जबकि देश आजादी के सात दशक पूरे कर रहा है देखने की जरूरत है कि हमने अपनी जमीं और अपने आसमां का बनाया क्या है? इसमें कोई शक नहीं कि देश ने बेहद तरक्की है। बाहर के लोग पूछते हैं कि अगला सुपर पावर कौन है, चीन या भारत? इस वक्त हमारी अर्थव्यवस्था योरूप की अर्थव्यवस्था से चार गुणा तेजी से बढ़ रही है और 2030 के दशक में हम यूरोपियन यूनियन की अर्थव्यवस्था को मात दे देंगे। 2050 तक हमारी अर्थव्यवस्था यूरोपियन यूनियन से […]