पढ़ा-लिखा आतंकी अधिक घातक है, Educated Terrorist is More Lethal

लालक़िले के पास कार बम विस्फोट करने वाले डाक्टर उमर उन नबी ने एक रोंगटे खड़े करने वाले वीडियो में इसको न्यायोचित ठहराते हुए कहा है कि सुसाइड बॉम्बिंग को ग़लत समझा जाता है कि यह इस्लाम के सिद्धांतों के खिलाफ है। उसके अनुसार दरअसल यह “शहादत का अभियान” है। विडियो में उसका कहना है कि “जिहाद में ऐसी कार्यवाही न केवल जायज़ है बल्कि सराहनीय भी है”। यह वीडियो अप्रैल में बनाया गया था पर नवम्बर में अपलोड किया गया। इसके द्वारा नबी दूसरों को सुसाइड बॉम्बर बनने के लिए प्रेरित ही नही, उत्तेजित भी कर रहा है। कि हमारी एजेंसियाँ इस वीडियो के प्रसारण को रोक नहीं सकी यह बहुत बड़ी चूक साबित होगी। असादुद्दीन ओवैसी जो मॉडरेट मुसलमानों के प्रवक्ता बन रहे हैं, का कहना है कि इस्लाम में बेक़सूरों को मारना और खुद सुसाइड करना ‘हराम’ है।पर सुन कौन रहा है? नबी पहला सुसाइड बॉम्बर तो है नही।

 यह सारा घटनाक्रम बहुत चिन्ताजनक है कि जिन्हें व्हाइट कॉलर कहा जाता है,अर्थात् सफ़ेदपोश, भी फिदायीन बन रहे हैं और दूसरों को आतंकी बनने के लिए प्रेरित कर रहें हैं। इस सारे घटनाक्रम में जो डाक्टर पकड़े गए हैं उन्होंने 75-75 लाख रूपए दे कर डाक्टरी की है। वह अजमल कसाब जैसे गरीब परिवारों से नहीं है जो बेरोज़गारी से तंग आकर आतंक के रास्ते पर चल पड़ा था। यह सब तो खाते पीते परिवारों से है जो रेडिकल अर्थात् चरमपंथी बन गए है।.नबी और उसके गैंग जिसमें आधा दर्जन से अधिक डाक्टर हैं,जिनमें एक महिला डाक्टर भी है, ने सोच समझ कर आतंक का रास्ता अपनाया है। कोई ऐसा कष्ट नहीं था जिसने उन्हें ग़लत रास्ते पर चलने के लिए मजबूर किया हो। जो डाक्टर पकड़े गए हैं उनमें यह भावना सांझी है कि देश और दुनिया में मुसलमानों पर अत्याचार हो रहें हैं और बदला लेने के लिए जेहाद और हिंसा ही रास्ता है।

लगभग दो दशक से हमने ऐसी बड़ी साज़िश नहीं देखी। कश्मीर में हमले होते रहे पर आतंकी पाकिस्तान से आए थे। दिल्ली में 2011 में हाईकोर्ट के बाहर हुए विस्फोट जिसमें 12 मारे गए थे, के बाद लगभग शान्ति ही रही थी। मुम्बई के हमलावर  भी पाकिस्तान से आए थे पर यह गैंग तो भारतीय नागरिकों का है. उच्च शिक्षा प्राप्त युवक और युवतियाँ रेडिकल बन रहें हैं और दूसरों को रेडिकल बना रहें है। तार जैश-ए-मुहम्मद से जुड़ें हैं पर पाकिस्तान की पहलगाम जैसी सीधी दखल नहीं है। दुनिया की नज़रों से बचने के लिए उन्होंने रणनीति बदल ली है। अब उन्होंने प्रोफेशनलज़ को अपना हथियार बनाना शुरू कर दिया है।कश्मीर में पाकिस्तान के सैल हैं। बहुत सैल तमाम कर दिए गए पर बहुत से ज़िन्दा है। मौलवी इरफ़ान अहमद वगेय जो श्रीनगर में है ने उन्हें कट्टर बनाने में बड़ी भूमिका निभाई है। चिन्ता यह है कि और कितने है जो मस्जिदों और मदरसों के द्वारा नौजवानों को ग़लत रास्ते में जाने के लिए प्रेरित कर रहें है? पढ़े लिखें अधिक खतरनाक है क्योंकि वह टैंकनालिजी जानते हैं। दूसरा संदिग्ध आतंकवादी जसीर बिलाल जो पकड़ा गया है वह ड्रोन को भारी बैटरी से फ़िट कर राकेट की तरह इस्तेमाल करना चाहता था। देश के कई हिस्सों से धड़पकड़ और बरामदगी बताती है कि सारे देश में अफ़रा तफ़री फैलाने का इरादा था।

दूसरी चिन्ता की बात है कि हमारी एजेंसियाँ इस साज़िश को पकड़ नहीं सकी। वह अभी तक वह कई साज़िशों को नाकाम कर चुकें है। 80 के क़रीब आतंकी पकड़े जा चुकें हैं। पर आंतरिक सुरक्षा के क्षेत्र में आत्म संतोष की कोई गुंजाइश नहीं है। यह काम कभी ख़त्म नहीं होता। आप को दुष्मन से एक कदम आगे रहना है। आपरेशन सिंदूर में हमने पाकिस्तान के टैरर नेटवर्क पर सीधा हमला किया था। भावलपुर में जैश-ए-मुहम्मद के हैडकवाटर को तबाह कर दिया जिस में मसूद अज़हर के परिवार के कई सदस्य मारे गए थे। पता था कि बदले की कार्रवाई होगी। 18 अक्तूबर को जैश के चेतावनी वाले पोस्टर कश्मीर में नोगाम की दीवारों पर लगे पाए गए। तब एक मौलवी पकड़ा गया था जिसने बताया कि दिल्ली के आसपास के छोटे शहरों में कट्टरपंथी डाक्टरों का एक गिरोह तैयार हो रह है। पर हमारी एजेंसियाँ नबी तक नहीं पहुँच सकी। तीन घंटे उसकी कार संदिग्ध हालत में दिल्ली में घूमती रही। उसने तो हड़बड़ी में विस्फोट कर दिया लगता है। दूसरा बड़ा सुराग फ़रीदाबाद में 2900 किलो आरडीएक्स की बरामदगी थी। अगर कहीं यह इस्तेमाल हो जाता तो बड़ी तबाही होती। यह भी बड़ी असफलता है कि दिल्ली से सटे अल-फलाह यूनिवर्सिटी में लम्बे समय से साज़िश तैयार हो रही थी पर किसी को ख़बर नहीं लगी। यूनिवर्सिटी के अधिकारी या तो सोए रहें या संलिप्त थे। इन हाथों से इस यूनिवर्सिटी को निकालने की ज़रूरत है।

बडा सवाल तो है कि यह डाक्टर-आतंकी इतना आरडीएक्स इकट्ठा करने में कैसे सफल रहे? क्या हम इस ग़लतफ़हमी का शिकार थे कि कश्मीर से धारा 370 हट गई है, बहुत मात्रा में वहाँ सुरक्षा कर्मी तैनात है इसलिए टैरर का इकोसिस्टम कमजोर पड़ गया और स्थिति नियंत्रण में रहेगी ?यह भी साफ़ है कि पाकिस्तान को आपरेशन सिंदूर से वह संदेश नहीं पहुँचा जो हम देना चाहते थे। हो सकता है कि अमेरिका से मिले समर्थन से पाकिस्तान और दुस्साहसी हो गया है। चीन साथ है ही। नई सरदर्द पाकिस्तान और बांग्लादेश के अवैध शासन की यारी है। श्रीनगर स्थित कोर के कमांडर रहे रिटायर्ड जनरल सैयद अता हसनैन ने लिखा है कि कश्मीर में “आतंकवाद के पद चिन्ह चाहे सिंकुड़ गए हों पर इसका वैचारिक और आर्थिक तंत्र अभी भी ज़िन्दा है”। स्पष्ट है कि कश्मीर में आतंक की जड़ें क़ायम है। इन्हें तबाह करने की ज़रूरत है क्योंकि युद्ध अभी चल रहा है, केवल युद्ध के सिपाही की शक्ल बदल गई हैं। दहशतगर्दों की नई जमात खड़ी हो रही है। यह सफ़ेदपोश हमारे ही स्कूलों, कालेजों और यूनिवर्सिटी में पढ़ लिख कर आतंकी बन रहें हैं। यह बहुत ख़तरनाक है।  

इस स्थिति से निबटना बहुत बड़ी चुनौती है। जो मौडयूल हैं उन्हें सख़्ती से कुचलना चाहिए पर साथ ध्यान रखने की ज़रूरत है कि और इस ग़लत रास्ते पर न चल सकें। पूर्व वरिष्ठ पुलिस अधिकारी जे एफ रिबैरो ने लिखा है कि, “आतंकवाद की जड़ें द्वेष और अविश्वास में हैं”। कड़वी सच्चाई है कि मुस्लिम समुदाय में यह प्रभाव फैल रहा है कि वह दो दर्जे के नागरिक है।  इस प्रभाव को मिटाने की तत्काल ज़रूरत है। मुस्लिम समुदाय के साथ सत्तापक्ष का कोई सम्वाद नहीं है। लव जेहाद या लैंड जेहाद या एग्ज़ाम जेहाद या लिंचिंग जैसी हरकतें बंद होनी चाहिए। मुस्लिम रेढ़ी वालों को धमकाया जाता है। बुलडोज़र केवल मुस्लिम अपराधियों के घरों पर ही क्यों चलता है? मुहम्मद इखलाख को दादरी में इस ग़लतफ़हमी में लिंच किया गया कि वह गो-तस्करी में संलिपत है। अब यह समाचार है कि योगी आदित्य नाथ की सरकार अपराधियों के खिलाफ मामलों को वापिस लेने के बारे सोच रही है। इससे मुस्लिम समुदाय को क्या संदेश जाएगा कि कानून के आगे वह बराबर नही है? इससे यह भावना प्रबल होती है कि उन्हें न्याय नहीं मिलेगा और कई बदला लेने को तैयार हो जातें हैं। सरकार को सबसे बड़े अल्पसंख्यक समुदाय की तरफ़ अधिक संवेदनशीलता दिखानी चाहिए। वहाँ असुरक्षा की भावना बढ़ रही है। यह प्रभाव ख़तरनाक है कि उनको हाशिए पर धकेला जारहा है। 

2005 में उनकी अमेरिका यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की मौजूदगी में अमेरिका के राष्ट्रपति बुश ने अपनी पत्नि लौरा बुश को बताया था कि भारत में 15 करोड़ मुसलमान हैं पर एक आतंकवादी नहीं है। 20 सालों में इतना परिवर्तन क्यों आ गया है कि कुछ पढ़े लिखे खाते पीते मुसलमान आतंकी बन रहें हैं ? हम इसे केवल क़ानून और व्यवस्था का मामला ही नहीं कह सकते। देश में धार्मिक नफ़रत को बढ़ावा दिया जा रहा है। राष्ट्रीय सुरक्षा विशेषज्ञ तारा कारथा ने लिखा है, “इंडिया को अंदर झांकना चाहिए। ऐसा माहौल है जिसने युवा और महत्वकांक्षी डाक्टरों को रेडिकल बना दिया है, और कई और बनने के लिए तैयार हैं”। मीडिया का एक वर्ग भी नफ़रत को हवा देता रहता है। इन्हें हर मामला ‘हिन्दू- मुसलमान’ नज़र आता है। शिक्षा संस्थाओं में कटटरवाद को रोकने का अभियान चलाए जाने चाहिए। मदरसों की तरफ़ विशेष ध्यान देने की ज़रूरत है। कश्मीर के राजनीतिक वर्ग को फिर से साथ लेना चाहिए। संविधान सब को बराबरी का जो वादा करता है उसकी भावना को समझ कर कदम उठाए जाने चाहिए। हमारे पड़ोस में एक तरफ़ पाकिस्तान तो दूसरी तरफ़ बांग्लादेश है। हमारी तरक़्क़ी केवल पड़ोसी देशों को ही नही बहुत देशों को चुभ रही है। वह यह प्रभाव देना चाहते हैं की भारत सुरक्षित और मज़बूत देश नहीं है। एक बड़े समुदाय में असंतोष दुष्मनों की साज़िशों को आमंत्रित करता है। पाकिस्तान को बाहर से आतंकी भेजने की ज़रूरत नहीं रही। उन्हें यहाँ ही असंतुष्ट मिल जाऐंगे। यह जेहादी हमारी ही पैदायश हैं।

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About Chander Mohan 814 Articles
Chander Mohan is the grandson of the legendary editor of Pratap, Mahashya Krishan. He is the son of the famous freedom fighter and editor, Virendra. He is the Chief Editor of ‘Vir Pratap’ which is the oldest hindi newspaper of north west india. His editorial inputs on national, international, regional and local issues are widely read.