शाही परिवार का स्कैंडल-ग्रस्त धारावाहिक, Meghan’s Surgical Strike

March 18, 2021 Chander Mohan 0

पुराना कहावत है कि आख़िर में पाँच ही बादशाह बचेंगे, चार ताश के और पाँचवा ब्रिटेन का। योरूप में एकाध को छोड़ कर अधिकतर देशों में राजशाही की जगह गणतन्त्र ने ले ली है पर ब्रिटेन में 94 साल की महारानी एलिज़ाबेथ 69 वर्ष से गद्दी पर क़ायम है और उनकी व्यक्तिगत लोकप्रियता बरक़रार है। विंसटन चर्चिल से लेकर आज तक वहां 14 प्रधानमंत्री बदल चुकें है पर महारानी चलती जा रहीं हैं। लंडन टाइम्स ने लिखा है, “ शताब्दियों से शाही परिवार के बने रहने का बड़ा कारण है कि वह ख़ुद को समय के अनुसार बदलते आ रहें हैं। अब फिर बदलने की ज़रूरत है”। टाइम्स हाल ही में महारानी के छोटे पोते प्रिंस हैरी तथा उसकी पत्नी […]

खिड़की खुली है थोड़ी, थोड़ी देर के लिए, Indo-Pak : Hope And Apprehension

March 11, 2021 Chander Mohan 0

भारत और पाकिस्तान के रिश्तों मे एक बार फिर ताज़ाहवा बहने लगी है।  740 किलोमीटर लम्बी नियंत्रण रेखा पर संघर्ष विराम की घोषणा कर दी गई है। 24-25 फ़रवरी की रात से दोनों तरफ़ से तोपें शांत हो गईं हैं। दोनों देशों के बीच दो दशक पुराना संघर्ष विराम समझौता 2007-2008 से ही उधड़ना शुरू हो गया था पर पिछले पाँच वर्षों से तो दोनो तरफ़ से ख़ूब गोलाबारी हो रही थी। अब तोपों पर कवर चढ़ा दिए गए हैं। क्या रिश्तों में सुखद मोड़ आएगा या पहले कई प्रयासों की तरह यह भी नक़ली सूर्योदय होगा? इसे समझने के लिए देखना होगा, 1. क्या हुआ ? 2. क्यों हुआ? 3. क्या हो सकता है आगे? क्या हुआ? 2019 मे […]

‘जय बांग्ला’ या ‘सोनार बांग्ला’ ?, The Bengal Elections

March 4, 2021 Chander Mohan 0

चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी के चुनाव की घोषणा कर दी है पर जहाँ सब चुनाव अपना अपना महत्व रखतें हैं पश्चिम बंगाल का चुनाव विशेष महत्व और चिन्ता देता है। इसके चार बड़े कारण हैं। एक, ममता बैनर्जी का अपना विशेष जुझारू व्यक्तित्व है। वह स्ट्रीट फाइटर हैं और उन्हें सुर्ख़ियों में बने रहना आता है। दूसरा, भाजपा के नेतृत्व ने इस चुनाव को प्रतिष्ठा का प्रश्न बनाया हुआ है और भाजपा की तीनों प्रमुख तोपें, प्रधानमंत्री मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, और पार्टी अध्यक्ष जे पी नड्डा वहाँ लगातार गर्ज रहीं हैं। तीसरा, राज्य का हिंसक राजनीतिक इतिहास है। और चौथा, यह चुनाव देश की भावी राजनीति को तय करेगा। पश्चिम बंगाल के 2016 […]

असुरक्षा की यह भावना क्यों है? Why This Insecurity?

February 25, 2021 Chander Mohan 0

वैसे तो यह तय माना जाता है कि जिसकी सरकार हो स्थानीय निकाय पर उसी का क़ब्ज़ा होता है पर फिर भी पंजाब के स्थानीय चुनाव में कांग्रेस के पक्ष में जिस तरह एकतरफ़ा परिणाम आया है और भाजपा को होलसेल रद्द कर दिया गया है, वह हैरान करने वाला है। हम एक प्रकार से भाजपा मुक्त पंजाब देख रहें हैं जहाँ कांग्रेस को लगभग 70 प्रतिशत सीटें मिली हैऔर भाजपा 2 प्रतिशत वार्ड में ही जीत सकी है। मुक्तसर, जहाँ अधिकतर भाजपा उम्मीदवारों को 20 से भी कम वोट मिलें हैं, की मिसाल हालत बयान करती है। 22 में से 10 जिंलों में भाजपा शून्य नही तोड़ सकी। इसका असर अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में देखने को […]

टीकाकरण : इंतज़ार किस का है? , Vaccination: Waiting for what?

February 18, 2021 Chander Mohan 0

पिछले सप्ताह मैंने कोविड-19 की वैक्सीन कोवीशील्ड का पहला टीका लगवा लिया है।यह टीका जालन्धर के सिविल अस्पताल में लगाया गया। 28 दिन के बाद टीके की दूसरी डोज़ लगेगी। यह सारी कहानी इसलिए बता रहा हूं क्योंकि आज भी बहुत लोग टीका लगवाने से घबरा रहें हैं। एक दूसरे कि तरफ़ देखा जा रहा है कि इसका कोई साइड इफैक्ट अर्थात बुरा असर तो नही है? मुझे भी सावधान किया गया था। कईयों का कहना था कि भारत में बनी वैक्सीन से फाइज़र या स्पुटनिक अधिक प्रभावी हैं इसलिए इनकी इंतज़ार करनी चाहिए। लेकिन मेरा अपनी स्वास्थ्य व्यवस्था पर भरोसा है इसलिए मैंने कोवीशील्ड का टीका लगवाया है। अगर डा. हर्ष वर्धन या डा. रणदीप गुलेरिया जैसे लोग कह […]

लंगर का वरदान, The Blessings of Langar

February 11, 2021 Chander Mohan 0

सन् 1569 की बात है। दिल्ली से लाहौर जाते समय बादशाह अकबर गोईंदवाल साहिब तीसरे सिख गुरू अमर दास जी से मिलने पहुँचे। उन्होंने गुरूजी की बहुत ख्याति सुनी थी इसलिए उन्हें मिलने के लिए गोईंदवाल साहिब रूक गए। अकबर को दूसरे धर्मों के बारे बहुत दिलचस्पी थी इसलिए गुरू अमर दास के साथ वह वार्तालाप चाहते थे। उनके साथ राजा हरिपुर भी थे। लेकिन वार्तालाप से पहले गुरूजी ने बादशाह और राजा को लंगर में पंगत में  बैठा दिया जहाँ सबको जाति, धर्म, स्तर या वर्ग की भिन्नता के बिना एक साथ सादा भोजन करवाया जाता था। बादशाह भी तैयार हो गए और शायद पहली बार उन्होंने आम लोगों के साथ बैठ कर भोजन किया था। अकबर लंगर की […]