न सरकार का सर झुके, न किसान की पगड़ी, Farmers Protest: Both Need To Step Back

February 4, 2021 Chander Mohan 0

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का कहना है कि किसान नेताओं के साथ 22 जनवरी को हुई अंतिम वार्ता में सरकार ने डेढ़ वर्ष तीन कृषि क़ानूनों को न लागू करने की जो पेशकश की थी, उस पर सरकार आज भी क़ायम है। सरकार ने तब यह प्रस्ताव भी रखा था कि किसानों की बाक़ी माँगें, विशेष तौर पर एम एस पी, पर विचार करने के लिए कमेटी बनाई जाएगी। सरकार की यह पेशकश काफ़ी उदार थी और इन क़ानूनों को ठंडे बस्ते में डालने के बराबार थी। ज़्यादा से ज़्यादा किसान संगठन डेढ़ वर्ष की अवधि को दो या तीन वर्ष तक बढ़ाने का सुझाव दे सकते थे, तब तक अगले चुनाव आ जाते और मामला लटक जाता। 26 जनवरी और […]

नियंत्रण से बाहर होता किसान आन्दोलन, Kisan Agitation Goes Out of Control

January 28, 2021 Chander Mohan 0

गणतन्त्र दिवस पर दिलली की घटनाएँ बहुत विचलित करने वाली हैं। जो किसान आन्दोलन अपनी शान्ति और व्यवस्था के लिए दुनिया के लिए मिसाल था, अचानक नियंत्रण से बाहर हो गया। न केवल बैरिकेड तोड़े गए बल्कि अनुशासन  में रहने के वादे भी तोड़ दिए गए। जिन मार्ग पर जाने का वादा किया था उन्हें छोड़ते हुए दिलली में घुस गए। आन्दोलन पर किसी का नियंत्रण नही रहा। संयुक्त किसान मोर्चे के नेता जो रोज़ टीवी पर नज़र आते थे, ग़ायब हो गए क्योंकि  कोई उनकी सुन नही रहा था। लेकिन ज़िम्मेवारी तो उनकी बनती है। जब ट्रैक्टर मार्च के लिए हज़ारों किसानों को राजधानी में इकट्ठा किया  गया तो यह सम्भावना तो सदैव थी कि कुछ नियंत्रण से बाहर […]

टीकाकरण : उपलब्धि और शंकाएँ, Vaccine : Achievement And Doubts

January 21, 2021 Chander Mohan 0

16 जनवरी 2021 का दिन एतिहासिक रहेगा। ‘सर्वे भवन्तु सुखिन:, सर्वे सन्तु निरामया:’ के श्लोक के साथ भारत में कोरोना के सबसे बड़े टीकाकरण अभियान का आग़ाज़ किया गया। इसे हम अंत की शुरूआत भी कह सकतें हैं।कुछ कमज़ोरियाँ रह जाऐंगी, कुछ ग़लतियाँ होंगी, यहां कुछ घपलों की सम्भावना से भी इंकार नही किया जा सकता, पर यह अभियान हमारे वैज्ञानिकों, डाक्टरों और विशेषज्ञों की प्रतिभा, उनकी मेहनत और संकल्प  की महान उपलब्धि है। फ़्रंट लाइन वर्करस को भी सलाम ! कितने और देश हैं जो यह दावा कर सकतें हैं कि उन्होंने अपने लिए यह टीका बनाया है? चीन ने बनाया है पर उसकी क्षमता पर सवाल उठाए जा रहें हैं। पाकिस्तान हसरत से यहाँ बने टीके की तरफ़ […]

अमेरिका में अराजकता, दुनिया के लिए सबक़, Lesson From America

January 14, 2021 Chander Mohan 0

‘अमेरिका कभी भी बाहर से नष्ट नही होगा। अगर हम लड़खड़ाने लगे और अपनी आज़ादी खो बैठे तो इसका कारण यह होगा कि हमने ख़ुद को नष्ट कर लिया’ –अब्राहम लिंकन अमेरिका के 16वें  राष्ट्रपति की यह भविष्यवाणी 160 सालों के बाद 6 जनवरी को लगभग सही साबित हो गई जब अमेरिका के 45वें राष्ट्रपति डानल्ड ट्रंप के उकसाने पर एक भड़की हुई भीड़ ने अमेरिकी लोकतन्त्र की सबसे पावन संस्था, उनकी संसद, पर ही हमला बोल दिया। बेक़ाबू भीड़ से बचाने के लिए सांसदों, उपराष्ट्रपति समेत, को सुरक्षित स्थान पर ले जाना पड़ा। कुछ दंगाईयों ने कॉनफैडरेसी के झंडे उठाए हुए थे जिसने दास प्रथा समाप्त करने के विरोध में 1865 में युद्ध किया था, और अब्राहम लिंकन के […]

तिब्बत और ‘इतिहास की हिचकिचाहट’ Tibet And Hesitations of History

January 7, 2021 Chander Mohan 0

एक महत्वपूर्ण  क़दम उठाते हुए अमेरिका के राष्ट्रपति डानल्ड ट्रंप ने उस क़ानून पर हस्ताक्षर कर दिए हैं जो तिब्बतियों के महामहिम दलाई लामा के उत्तराधिकारी के चुनने के अधिकार  की पुष्टि करता है,और  बीच में चीन के किसी प्रकार के दखल का विरोध करता है। बीजिंग ने अमेरिका के इस क़ानून का कड़ा विरोध किया है और उसे अपने ‘आंतरिक मामले’ में दखल क़रार दिया है। तिब्बती परम्परा के अनुसार दलाई लामा अवतार लेतें हैं, पर यह कौन होगा इसकी तलाश बौद्ध परम्परा के अनुसार की जाती है। सितम्बर 2011में दलाई लामा ने अगले दलाई लामा के चयन के बारे स्पष्ट दिशा निर्देश दे दिए थे ताकि किसी प्रकार की शंका या धोखा न हो। चीन यह मानने के […]

2020 बहुत बर्बाद कर गया, पर बहुत कुछ समझा भी गया 2020 Shadow on 2021

December 31, 2020 Chander Mohan 0

जब बीते साल की तरफ़ मुड़ कर देखता हूँ तो गाने की यह पंक्ति याद आजाती है, ‘जग सूना सूना लागे, जग सूना सूना लागे’। 2020 वह साल था जिसकी कोई आत्मा नहीं थी। कोई उपलब्धि नही थी, अगर थी तो यह कि हम बच गए! यह साल ज़िन्दगी की नाजुकता समझा गया। यह सबसे अशांत और विघटनकारी वर्ष था जिसमें बचे रहना ही मक़सद था। याद ही नही रहा कि कब किससे हाथ मिलाया था, या कब किसे गले लगाया था। सब कुछ वॉटसअप हो गया! ज़िन्दगी की छोटी छोटी ख़ुशियाँ दुर्लभ हो गईं। अलगाववाद न्यू नार्मल बन गया। नया अछूतीकरण शुरू हो गया। ज़िन्दगी के पुराने तौर तरीक़े टूटे फटे नज़र आ रहें हैं। क्योंकि एक दूसरे का […]