Teri Rehbari ka Sawal hai -by Chander Mohan

March 10, 2015 Chander Mohan 0

तेरी रहबरी का सवाल है! जिस उम्मीद से जम्मू कश्मीर में पीडीपी-भाजपा सरकार का गठन हुआ था, वह अब एक दु:स्वप्न में परिवर्तित होती जा रही है। मसरत आलम को रिहा कर तथा उससे पहले जम्मू कश्मीर में शांतमय चुनाव के लिए अलगाववादियों, जेहादियों तथा ‘उस पार’ को श्रेय दे कर मुख्यमंत्री मुफ्ती मुहम्मद सईद ने जता दिया है कि कश्मीर की अलगाववादी राय को संतुष्ट करने के लिए वह देश की सुरक्षा तथा अखंडता से भी खेलने को तैयार हैं। यह एक विचित्र मुख्यमंत्री है जो अपने प्रदेश में सफल चुनाव के लिए पाकिस्तान का शुक्रिया कर रहा है! उनका तो एक प्रकार से कहना था कि पाकिस्तान जम्मू कश्मीर में आतंकवाद को नहीं, लोकतंत्र को प्रेरित कर रहा […]

Mother Teresa aur unki seva -by Chander Mohan

March 3, 2015 Chander Mohan 1

मदर टेरेसा और उनकी सेवा मोहन भागवत की इस टिप्पणी को लेकर बवाल मचा है कि मदर टेरेसा द्वारा की गई सेवा के पीछे लोगों को ईसाई बनाने की उनकी भावना थी। कांग्रेस ने उनकी आलोचना की है तथा अरविंद केजरीवाल का कहना है कि ‘मदर टेरेसा को तो बख्श दो।’ ईसाई संगठन अपनी जगह क्रोधित हैं। इस संदर्भ में मुझे तीन बातें कहनी हैं। एक, मदर टेरेसा करुणा की मूर्ति थीं। उन्होंने कुष्ठ रोगियों को, टीबी से पीडि़त लोगों को, एड्स के मरीजों को गले लगाया और उन्हें राहत दी। उन्होंने बेसहारा तथा लावारिस लोगों में प्यार बांटा। नाली में पड़े लोगों को भी उठा कर गले लगा लेती थीं। जो मानसिक तौर पर कमजोर थे, उन्हें भी उनके […]

Khuda Khaer kure -by Chander Mohan

February 28, 2015 Chander Mohan 0

खुदा खैर करे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की उपस्थिति में रविवार को जम्मू कश्मीर की नई सरकार शपथ ले रही है जिसमें मुख्यमंत्री बनने वाले मुफती मुहम्मद सईद की भाषा में, उत्तरी ध्रुव तथा दक्षिणी ध्रुव सांझीदार होंगे। मैं खुद इस गठबंधन के बारे कई सवाल कर चुका हूं लेकिन अगर जम्मू कश्मीर ने प्रगति करनी है और वहां शांति स्थापित करनी है तो ऐसे गठबंधन को मौका मिलना चाहिए जिसमें एक पार्टी को वादी में समर्थन मिला है तो दूसरी को जम्मू में। कई बार हिम्मत दिखानी पड़ती है पुरानी बातों को एक तरफ रख कर नई शुरुआत करनी पड़ती है। जैसे फिराख गोरखपुरी ने भी कहा है, अपने माज़ी से जो लिपटा है वह सौदाई है, कि बदल जाने […]

Roti Susti Honi Chahiye -by Chander Mohan

February 24, 2015 Chander Mohan 0

रोटी सस्ती होनी चाहिए मोदी सरकार के लिए पिछले कुछ सप्ताह बहुत अच्छे नहीं रहे। भूमि अधिग्रहण अध्यादेश जैसे मामलों को लेकर देश में भारी असंतोष है। एक बड़े आंदोलन की तैयारी हो रही है। पिछले कानून को नरम कर भूमि अधिग्रहण को आसान बनाने की कोशिश की गई जिससे किसानों में आक्रोश है। इस प्रयास के बारे तो यही कहा जा सकता है कि आता है रहनुमाओं की नीयत में फतूर उठता है साहिलों में वह तूफां न पूछिए! पहला कानून पांच वर्ष की जद्दोजहद के बाद संसद के दोनों सदनों में सर्वसम्मति से पारित हुआ था। इसे पारित करने से पहले भाजपा द्वारा दिए गए दो संशोधन स्वीकार किए गए। अब इसे बदलने की क्या जरूरत है सिवाय […]

Corporate Guspeth -by ChanderMohan

February 21, 2015 Chander Mohan 0

कारप्रेट घुसपैठ बड़े कारप्रेट घराने अपने हित के लिए किस तरह सरकारी तंत्र में घुसपैठ कर नाजायज़ फायदा उठाने का प्रयास करते रहे हैं यह केन्द्रीय सरकार के मंत्रालयों में जासूसी करने के प्रयासों से पता चलता है। सरकारी निर्णयों तथा नीतियों की दिशा को समय से पहले जानने के लिए भारत सरकार के कार्यालयों में चोरियां तक करवाई गईं। नीति, बैठकों की कार्रवाई, नए प्रस्ताव आदि से सम्बन्धित दस्तावेज को चोरी करवाया गया यह जानने के लिए कि सरकार क्या सोच रही है? डीजल, पेट्रोल आदि के दाम में एक रुपए के परिवर्तन से इन कम्पनियों को अरबों रुपए का फायदा मिलता है इसलिए पूर्व जानकारी प्राप्त करने के लिए हर प्रकार के नाजायज़ हथकंडे इस्तेमाल किए जाते हैं। […]

Ninduk Niyre rakhie -by Chander Mohan

February 17, 2015 Chander Mohan 0

‘निंदक नियरे राखिए’ व्यक्तित्व की राजनीति अंतहीन नहीं हो सकती। दिल्ली का चुनाव परिणाम पहली चेतावनी है कि प्रधानमंत्री तथा उनके साथियों को उनके इमेज मेकर्स द्वारा निर्मित लोकप्रियता की धारणा से अतिशीघ्र बाहर आ जाना चाहिए और इस हकीकत का सामना करना चाहिए कि लोग असंतुष्ट हैं। अगर वह नाराज़ नहीं तो निराश जरूर हैं। दिल्ली का चुनाव नरेन्द्र मोदी के अपराजेय होने का मिथक भी तोड़ गया इसलिए आगे राजनीतिक चुनौतियां बढ़ सकती हैं। पहली परीक्षा तो बजट अधिवेशन में होगी। फिर बिहार के चुनाव हैं। नेताओं को खुद से पूछना चाहिए कि जमीन पर जो चल रहा था उसे भांपने में वह क्यों असफल रहे? आप सब तो दिल्ली में बैठे थे, आपको पता क्यों नहीं चला […]