पूँछ सीधी नहीं होगी

October 15, 2014 Chander Mohan 0

पूंछ सीधी नहीं होगी सीमा पर फायरिंग अब लगभग खत्म हो चुकी है पर दशकों के बाद उस तरफ से इतनी ज़बरदस्त फायरिंग हुई है। भारतीय सेना का कहना है कि सीमा तथा नियंत्रण रेखा पर युद्ध जैसी स्थिति थी। 2003 के युद्घ विराम समझौते का कुछ नहीं बचा। इतनी जबरदस्त फायरिंग उस वक्त हुई जब पाकिस्तान के अपने फटेहाल हैं। उनके पश्चिमी क्षेत्र में उनकी सेना जेहादियों के साथ उलझी हुई है तो देश के अंदर नवाज शरीफ की सरकार अत्यंत कमज़ोर पड़ चुकी है। सेना के समर्थन से इमरान खान तथा कादरी के आंदोलन निर्वाचित सरकार को अत्यंत कमज़ोर छोड़ गए है। सवाल है कि जब पाकिस्तान की सेना को पश्चिमी सीमा पर जबरदस्त जेहादी चुनौती मिल रही […]

कैलाश सत्यार्थी कौन ?

October 13, 2014 Chander Mohan 0

कैलाश सत्यार्थी कौन? इस वर्ष नोबल शांति पुरस्कार संयुक्त रूप से भारत के कैलाश सत्यार्थी तथा पाकिस्तान की मलाला यूसफजई को दिया गया है। नोबल कमेटी का यह भी कहना है कि एक हिन्दू तथा एक मुसलमान को सम्मान दिया गया है। ऐसे सम्मान के लिए धर्म कब से महत्वपूर्ण हो गया? 17 वर्षीय मलाला यूसफजई को तो सब पहले से जानते थे कि किस प्रकार इस बहादुर लड़की ने लड़कियों की शिक्षा के अधिकार को लेकर तालिबान का विरोध किया और तालिबान ने उसके सिर पर गोली मार दी जिसके बाद उसे इंगलैंड लाया गया और उसे बचा लिया गया। हैरानी है कि उग्रवादियों की इतनी बड़ी जमात एक छोटी लड़की तथा उसकी किताब से डरती है। पाकिस्तान में […]

चलेंगे साथ साथ ?

October 8, 2014 Chander Mohan 0

चलेंगे साथ-साथ? भारत अमेरिका के रिश्तों में पहले भी ऐसे लम्हें आए हैं। जवाहर लाल नेहरू- जॉन कैनेडी, इंदिरा गांधी-लिंडन जॉनसन, राजीव गांधी- रौनल्ड रीगन, अटल बिहारी वाजपेयी-बिल क्लिंटन, मनमोहन सिंह- जार्ज बुश, जब लगा था कि दोनों देश एक नए दोस्ताना सफर पर चल निकलेंगे पर दुनिया के यथार्थ ने इन प्रयासों को सफल नहीं होने दिया। उनकी अपनी जरूरत है, हमारी अपनी मजबूरियां हैं इसलिए बहुत कुछ सांझा होने के बावजूद रिश्तों ने अधिक सकरात्मक मोड़ नहीं लिया। जुलाई 2005 में भारत-अमेरिका परमाणु समझौते के बाद एक बार फिर लगा कि भारत-अमेरिका के बीच नया युग शुरू हो रहा है लेकिन दो ही सालों में मामला ठप्प हो गया। चाहे उनके कमरे में महात्मा गांधी की तस्वीर लटकी […]

हम ऐसे क्यों हैं?

October 2, 2014 Chander Mohan 0

हम ऐसे क्यों हैं? यह लेख मैं दस दिन यूरोप मेें गुजारने के बाद लिख रहा हूं। इस दौरान मैंने दक्षिण जर्मनी के खूबसूरत शहर म्यूनिख मेें बहुत समय गुजारा है। आज फिर उस अहसास का वर्णन कर रहा हूं जो मैं हर बार विदेश यात्रा से लौटने के बाद करता हूं, और जो हर भारतीय भी महसूस करता है जो विदेश से लौटता है कि हम ऐसे क्यों हैं, हम वैसे क्यों नहीं हैं? हम खुद को कितना भी महान समझे यह हकीकत है कि अनुशासन, ईमानदारी, कर्त्तव्य पालन आदि के मामले में हमने पश्चिम के देशों के लोगों से अभी बहुत कुछ सीखना है। दस दिन मैं यूरोप मेेें घूमा हूं। मुझे कहीं पुलिस नजर नहीं आई। अगर […]

पर दिल है हिन्दोस्तानी!

September 28, 2014 Chander Mohan 0

पर दिल है हिन्दोस्तानी! प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अमेरिका पहुंच गए हैं। विश्व मंच पर यह उनका पहला बड़ा कदम है। इससे पहले उनकी ब्राजील तथा जापान की महत्वपूर्ण यात्राएं हो चुकी हैं लेकिन न्यूयार्क-वाशिंगटन तथा अमेरिका अलग है। वह देश महाशक्ति है, अंतरराष्ट्रीय मीडिया का केन्द्र है। यहां संयुक्त राष्ट्र भी है जहां हर देश का नेता अपनी बात कहने को हर साल पहुंचता है, कोई सुने या न सुने। इनके अतिरिक्त प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा का एक और पहलू भी है। यह वहां के भारतीय-अमेरिकी समुदाय का जोश है। यह जोश केवल उनके गुजराती समुदाय तक ही सीमित नहीं बल्कि वहां रह रहे भारतीय मूल के सभी लोग उनकी यात्रा से उत्साहित हैं। अनुमान है कि उन्हें सुनने के […]

इनके साथ सिल्क या कॉटन या खद्दर, कोई रूट नहीं चाहिए

September 24, 2014 Chander Mohan 0

इनके साथ सिल्क या कॉटन या खद्दर, कोई रूट नहीं चाहिए आप उन्हें जितना भी गुजरात में फाफड़ा और ढोकला खिला लो चीन की हरकतें नहीं बदलेंगी। वास्तव में उनके राष्ट्रपति शी जिनपिंग की यात्रा मुंह का ज़ायका कड़वा कर गई है। सवाल यह है कि यह कैसा देश है कि अपने राष्ट्रपति की भारत यात्रा के दौरान भी उसकी सेना घुसपैठ करती गई? यात्रा का माहौल ही तहस नहस कर दिया गया। ऐसा ही उस वक्त हुआ था जब चीन के प्रधानमंत्री ली कियांग भारत आए थे। जो गर्मजोशी अहमदाबाद में देखी गई वह नई दिल्ली में गायब थी। इनके तो नेता को बुलाना ही खतरे से खाली नहीं! कई करार हुए लेकिन जो मामला दोनों के रिश्तों में […]