और पंजाब बच गया! ( And Punjab Was Saved! )

March 22, 2017 1

पंजाब के चुनाव परिणाम के बाद राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़े एक व्हट्सअप चैट पर मनोज सिंह का यह संदेश था, ‘‘जिन्हें लोग ‘भक्त’ कहते हैं उन्होंने एक बार फिर प्रमाणित किया कि वह सिर्फ देशभक्त हैं! और वह देश के लिए कुछ भी कर सकते हैं। वोटिंग के समय विचारधारा को छोड़ सकते हैं, पार्टी को छोड़ सकते हैं।’’ इसका अर्थ क्या है? साधारण भाषा में इसका अर्थ यह है कि पंजाब में संघ ने डूबती और अप्रासंगिक भाजपा को अपने हाल पर छोड़ कर प्रदेश को आप के अराजक शासन से बचाने के लिए कांग्रेस को वोट दिलवा दिए। पंजाब में कांग्रेस की जीत जहां अमरेन्द्र सिंह के अनुभवी नेतृत्व पर मोहर थी वहीं यह शहरी वोटर, […]

पंजाब : कम बुराई कौन सी है? (Punjab: Which is the Lesser Evil?)

February 1, 2017 0

प्रधानमंत्री मोदी की प्रकाश सिंह बादल की तारीफ के बावजूद पंजाब में जो हवा चल रही है वह बादल परिवार और हुकूमत को उड़ा ले जाएगी। वोटर इस बात को लेकर बिलकुल साफ नजर आता है कि उसे क्या नहीं चाहिए। वह पांच साल और बादल सरकार और बादल परिवार नहीं चाहता। इसका असर भाजपा पर होगा जिसका अस्तित्व ही अकाली दल पर निर्भर करता है। भाजपा के हाईकमान ने पार्टी को अकालियों को आउटसोर्स कर दिया। पंजाब में भाजपा ने तो सुसाइड कर लिया लगता है और उनके बारे कहा जा सकता है कि कुछ लोग अपनी हिम्मत से तूफां की जद से बच निकले कुछ लोग मगर मल्लाओं की हिम्मत के भरोसे डूब गए! कई मामलों में बादल […]

शिकारी खुद शिकार हो गया! (The Hunter is Hunted)

September 6, 2016 0

आप से दुत्कारे नवजोत सिंह सिद्धू ने अपना आवाज-ए-पंजाब मोर्चा बना लिया है। इस मोर्चे में शामिल वह चार लोग हैं जिनकी बादल विरोधी छवि है। अभी तक कोई स्पष्टता नहीं कि पार्टी की विचारधारा क्या होगी, कौन इसके सदस्य होंगे? इतने कम समय में संगठन कैसे खड़ा होगा? 117 सीटों पर उम्मीदवार कहां से आएंगे? साधन कहां हैं? आदत के अनुसार सिद्धू दम्पति मामले को लटकाए रखे हुए है। घोषणा किश्तों में की जाती है पर ऐसी सिद्धू दम्पति की राजनीति है। वह सब कुछ रहस्यमय रखना पसंद करते हैं। अभी तो इनका भविष्य अनिश्चित नजर आता है। एक समय मनप्रीत बादल की भी बड़ी अच्छी छवि थी। जब उन्होंने अकाली दल छोड़ा तो समझा गया कि पंजाब की […]

उड़ता सिद्धू (Udta Sidhu)

July 26, 2016 1

    दो महीने पहले भाजपा को अपनी मां कहने के बाद नवजोत सिंह सिद्धू पार्टी को छोड़ गए हैं। कसमें खाने के बाद लोग मुकर जाते हैं। राजनीतिक मजबूरी में भी लोग बदल जाते हैं यह बात तो समझ अाती है लेकिन यह नहीं समझ अाता कि तीन महीने पहले सिद्धू ने राज्यसभा का मनोनयन क्यों स्वीकार किया था अगर उन्होंने इसे छोड़ना ही था? यह उन लोगों से विश्वासघात है जिन्होंने उसे इस काबिल समझा और खुद महामहिम राष्ट्रपति के पद का अनादर है जिन्होंने उनका मनोनयन किया। यह तो साफ है कि उन्होंने अकाली-भाजपा के साथ अपने सारे पुल साढ़ लिए हैं। उनकी पत्नी कह चुकी हैं कि लालबत्ती वाली गाडि़यों में ड्रग्स जाते हैं। खुद सिद्धू […]

Kaun Dalega Achkan

September 8, 2015 0

कौन डालेगा अचकन? 2017 के शुरू में पंजाब विधानसभा के चुनाव होने हैं जिसे देखते हुए सभी पार्टियों में मंथन तथा उठक-पटक शुरू हो गई है। महत्वाकांक्षाएं छलांग लगा रही हैं। कांग्रेस के नेता सुनील जाखड़ का कहना है कि ‘कईयों ने अचकन सिलवा ली है।’ लेकिन डालेगा कौन? प्रकाश सिंह बादल/सुखबीर बादल, कैप्टन अमरेन्द्र सिंह या कोई और कांग्रेस नेता, या आप का कोई प्रतिनिधि या खुद सुनील जाखड़? अरविंद केजरीवाल भी अचकन डालने (वह तो अभी तक बुशशर्ट ही डालते हैं) की दौड़ में शामिल हो सकते हैं, जैसी चर्चा पंजाब में शुरू हो चुकी है? आखिर दिल्ली में क्या रखा है छोटी सी आधी-अधूरी हुकूमत है? पंजाब पूरे अधिकार सम्पन्न विकसित राज्य है। तीनों बड़ी पार्टियों अकाली […]

Aks butt jayega tera bhi! -by Chander Mohan

March 31, 2015 0

अक्स बंट जाएगा तेरा भी! अरविंद केजरीवाल बेंगलुरू के जिंदल नेचर क्योर क्लिनिक से तंदरुस्त तथा तरोताज़ा होकर लौटे हैं पर यही हाल उनकी पार्टी का नहीं है। पार्टी में तो गंभीर फ्रैक्चर हो गया है। अरविंद केजरीवाल, प्रशांत भूषण तथा योगेन्द्र यादव वह त्रिमूर्ति है जिसने आप को बनाया था, इसे वैचारिक दिशा दी थी। अब भूषण तथा यादव को बाहर निकाला जा रहा है। जिन आदर्शों को लेकर पार्टी खड़ी की गई थी वह खत्म हो गए लगते हैं। लोकतंत्र, सुशासन, स्वराज, पारदर्शिता सब एक तरफ छोड़ कर अरविंद केजरीवाल एक मिनी तानाशाह बनते जा रहे हैं। सब कुछ ‘मैं’ है। प्रशांत भूषण तथा योगेन्द्र यादव का कसूर भी क्या है इसके सिवाय कि उन्होंने केजरीवाल के काम […]

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