पंजाब: एक बार फिर?, Once Again In Punjab?

March 2, 2023 Chander Mohan 0

क्या पंजाब में फिर काले दिनों की वापिसी हो रही है? क्या फिर 1980-1990 वाले दिन आ रहें हैं ? यह सवाल अब सब पंजाबियों को परेशान कर रहा है। ख़तरनाक संकेत कुछ समय से मिल रहे हैं। कुछ सप्ताह पहले मोहाली-चंडीगढ़ सीमा पर ‘बंदी सिखों की रिहाई’ को लेकर प्रदर्शन कर रहे क़ौमी इंसाफ़ मोर्चे के हथियारों से लैस कार्यकर्ताओं ने पुलिस पर हमला कर दिया और 40 के करीब पुलिस कर्मी घायल हो गए। एक पुलिस अधिकारी का कहना था कि “अगर हम भागते नहीं तो हमें मार दिया जाता”। लेकिन जो पिछले सप्ताह अमृतसर में अजनाला में हुआ वह तो और भी अधिक ख़तरनाक है। खालिस्तान के  समर्थक और ‘वारिस पंजाब दे’ के मुखी अमृतपाल सिंह के […]

भारत आसमान में, और ज़मीन पर, India in Sky, and on Ground

February 23, 2023 Chander Mohan 0

अमेरिका के राष्ट्रपति, फ़्रांस के राष्ट्रपति और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री गद्गद् हैं। एयर इंडिया ने 470 विमान ख़रीदने का सौदा किया है इनमें से 250 विमान एयरबस होंगे जो इंग्लैंड और फ़्रांस मिल कर बनाते हैं और 220 विमान बोइंग होंगे जो अमेरिका बनाता है। इस पर प्रफुल्लित बाइडेन का कहना था कि इससे अमेरिका के 44 राज्यों में 10 लाख रोज़गार पैदा होंगे। इसी तरह  दोनों फ़्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों और इंग्लैंड के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक भी बहुत प्रसन्न हैं कि दोनों के देशों में इस सौदे से रोजगार और राजस्व बढ़ेगा।  तीनों का प्रसन्न होना स्वाभाविक है क्योंकि यह अकेला सौदा 45.9 अरब डालर का है। यह कितनी बड़ी राशि है यह इससे पता चलता है कि कंगाली […]

मुशर्रफ: विवादित विरासत, Musharraf : Disputed Legacy

February 16, 2023 Chander Mohan 0

परवेज़ मुशर्रफ का भी वही हश्र हुआ है जो पहले कई तानाशाह का हो चुका है।  मुशर्रफ की मौत सद्दाम हुसैन की तरह ‘चूहे की मौत’ तो नहीं कही जा सकती पर अपने अंतिम दिनों में उन्हें अत्यंत अपमानजनक ज़िन्दगी जीनी पड़ी थी यहाँ तक कि अपना देश छोड़ कर दुबई भागना पड़ा था। वह देश नहीं लौट सकते थे और मौत के बाद ही उनका शव दफ़नाने के लिए पाकिस्तान लाया गया। उन्होंने अक्तूबर 1999 में नवाज़ शरीफ़ की सत्ता पलट दी थी।   दो साल  बाद आगरा शिखर वार्ता के लिए उन्होंने खुद को राष्ट्रपति घोषित कर दिया।2008 तक वह राष्ट्रपति रहे पर फिर हालात उनके ख़िलाफ़ होते गए और उन्हें सत्ता छोड़नी पड़ी। एक साल पहले बेनजीर भुट्टो […]

गांधी की हत्या और आज का भारत, Gandhi Assassination and Today’s India

February 9, 2023 Chander Mohan 0

हमारी आज़ादी को 75 वर्ष हो गए पर यह वह वर्ष भी है जब 75 साल पहले नए आज़ाद हुए देश की राजधानी के ठीक बीच एक महात्मा की गोली मार कर हत्या कर दी गई थी। मोहनदास कर्मचन्द गाँधी को ‘महात्मा’ की उपाधि रविन्द्रनाथ टैगोर ने दी थी। सरदार पटेल उन्हें बापू कहते थे। उन्हें  ‘राष्ट्रपिता’ पहली बार नेताजी सुभाष चंद्र ने कहा था। यह वही नेताजी हैं जिन्हें गांधी ने दो बार कांग्रेस अध्यक्ष नहीं बनने दिया था पर जिन्होंने आज़ाद हिन्द फ़ौज की तीन ब्रिगेड के नाम ‘गांधी ब्रिगेड’, ‘नेहरू ब्रिगेड’ और मौलाना अबुल कलाम आज़ाद के नाम पर ‘आज़ाद ब्रिगेड’ रखा था। इससे उस वकत के नेताओं के उच्च चरित्र  का पता चलता है कि देश […]

बीस साल बाद बीबीसी का बवाल, BBC: Why After 20 Years ?

February 2, 2023 Chander Mohan 0

2002 के गुजरात दंगे  1984 के दिल्ली के दंगों की तरह सदा एक कलंक रहेंगे। दुख है कि आज के युग में  भी नफरत की खूनी आँधी में  बेक़सूर मारे जाते हैं। यह न केवल प्रशासनिक असफलता बल्कि समाजिक गिरावट भी दर्शाता  है। दंगों का कोई औचित्य नहीं है, न होना चाहिए। पर गुजरात के दंगों को लेकर बीबीसी की डॉक्यूमेंट्री इंडिया:द मोदी क्वश्चन खुद अपने पर कई सवाल खड़े कर गई है।  यह डॉक्यूमेंट्री गुजरात के दंगों तथा कुछ और मामलों को  लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सख़्त आलोचना करती है। इन दंगों में 1000 के क़रीब लोग मारे गए थे जिनमें  अधिकतर मुसलमान थे। बीबीसी के अनुसार ब्रिटिश सरकार गुजरात के घटनाक्रम पर बहुत ‘वरिड’ अर्थात् चिन्तित थी […]

कुछ नहीं तो ख़्वाब-ए- सहर देखा तो है, Yatra: Atleast A New Narrative

January 26, 2023 Chander Mohan 0

आज 26 जनवरी है जिस दिन ‘हम,भारत के लोग’ ने खुद को संविधान दिया था। एमरजैंसी के महीनों को छोड़ कर इस संविधान ने देश को सही दिशा में रखने में बड़ी भूमिका निभाई है। आजकल ज़रूर संविधान के ‘बेसिक स्ट्रकचर’ को लेकर बहस चल रही है पर यह स्वस्थ बहस है और संविधान इसकी इजाज़त देता है। अगर सरकार जज नियुक्त करने के ‘कौलीजियम’ सिस्टम पर सवाल उठा रही है तो यह भी उसका अधिकार है, लोकतंत्र इसकी इजाज़त देता है। इन वर्षों में देश ने बहुत तरक़्क़ी की है और चर्चिल जैसे लोगों को झूठा करार दिया जो देश की आज़ादी के समय यह भविष्यवाणी कर रहे थे कि भारत का बिखराव कुछ ही समय की बात है। […]